नई दिल्ली। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) में केन्द्र के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी पर भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोपों को लेकर जनतंत्र समाज (सिटिज़न्स फॉर डेमोक्रेसी) की तरफ से प्रो. आनंद कुमार ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक पत्र भेजा है। पत्र में डॉ. सच्चिदानंद जोशी को भारतीय विरासत संस्थान के कुलपति का अतिरिक्त कार्यभार सौंपे जाने का विरोध किया है।
सिटिज़न्स फॉर डेमोक्रेसी का पत्र
जनतंत्र समाज (सिटिज़न्स फॉर डेमोक्रेसी) ने पत्र में लिखा है कि वह इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी को भारतीय विरासत संस्थान के कुलपति का अतिरिक्त कार्यभार सौंपे जाने का कड़ा विरोध करता है। अब डॉ. जोशी दोनों पद पर बने रहेंगे। विगत मार्च 2026 में सरकार ने यह निर्णय लिया।
यह बताना ज़रूरी है कि 2016 में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र के सदस्य सचिव का कार्यभार संभालने से पहले डॉ. जोशी रायपुर स्थित कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के कुलपति थे और विश्वविद्यालय में शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया के लिए बनाई गई चयन समिति के अध्यक्ष थे। उन्होंने अभ्यर्थियों की निर्धारित पात्रता, अकादमिक उपलब्धियों और अनुभव की अनदेखी कर के कुछ ऐसे व्यक्तियों को साक्षात्कार में बुलाया जिन्हें विश्वविद्यालय की स्क्रूटिनी समिति ने अयोग्य ठहराया था। उनकी मनमानी के कारण अयोग्य व्यक्तियों की नियुक्ति की गई।
छत्तीसगढ़ लोकायुक्त आयोग ने इस मामले की जांचकर के डॉ. जोशी की निगरानी में की गई नियुक्तियों पर आपत्ति जताई थी और अयोग्य पाए गए पूर्व चयनित उम्मीदवारों के खिलाफ विधि अनुसार कार्रवाई करने की सिफारिश की थी।
डॉ. सच्चिदानंद जोशी के ख़िलाफ़ यह भी आक्षेप है कि वाराणसी में कला केन्द्र के लिए संविदा पर नियुक्ति करने में उन्होंने आरक्षण रॉस्टर को नज़रअंदाज़ किया था।
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र और भारतीय विरासत संस्थान, दोनों महत्वपूर्ण संस्थान हैं और पूरा समय माँगते हैं। यह विचारणीय है कि दोनों संस्थानों को एक ही व्यक्ति के हवाले क्यों कर दिया गया है।
दरअसल, होना तो यह चाहिए था कि छत्तीसगढ़ लोकायुक्त की कड़ी आपत्ति के बाद डॉ. जोशी को इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र में सदस्य सचिव के पद पर लाना ही नहीं चाहिए था और उनके ख़िलाफ़ उचित कार्यवाही करनी चाहिए थी। लेकिन ऐसा लग रहा है कि सरकार के संस्कृति मंत्रालय ने उनके ख़िलाफ़ सिद्ध हो चुके आरोपों को न सिर्फ़ ठुकरा दिया, बल्कि उनकी योग्यता का आधार माना। मानो, इतना काफी न हो, डॉ. जोशी को भारतीय विरासत संस्थान के कुलपति भी बना दिया गया है जिसकी निंदा होनी चाहिए। हम सरकार से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने का अनुरोध करते हैं।
सांसद सुधाकर सिंह ने प्रधानमंत्री को लिखा पत्र
जनतंत्र समाज से पहले बक्सर से लोकसभा सांसद सुधाकर सिंह ने प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर डॉ. सच्चिदानंद जोशी की नियुक्तियों और उनके पूर्व कार्यकाल में हुई कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की है। सांसद ने अपने पत्र में दावा किया है कि छत्तीसगढ़ लोक आयोग (लोकायुक्त) की जांच में डॉ. जोशी के विरुद्ध नियुक्ति प्रक्रिया में अनियमितताओं के प्रथमदृष्टया तथ्य प्रमाणित पाए गए थे और उनके विरुद्ध विधि अनुसार कार्रवाई की अनुशंसा की गई थी।
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विधायक ने की उच्चस्तरीय जांच की मांग
गाजीपुर की जमानियां विधानसभा से समाजवादी पार्टी के विधायक ओम प्रकाश सिंह ने प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) में भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोपों को लेकर उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने केंद्र के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी के कार्यकाल में लिए गए विभिन्न निर्णयों, नियुक्तियों और कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
विधायक ने पत्र में आरोप लगाया है कि वाराणसी स्थित गांधी विद्या संस्थान को आईजीएनसीए द्वारा कब्जे में लेने की कोशिश की गई तथा इस पूरे मामले में लाखों रुपये के कथित लेन-देन की जानकारी सामने आई है। पत्र के अनुसार, संस्थान के पुनर्निर्माण के नाम पर बड़ी राशि खर्च किए जाने तथा संबंधित संपत्ति को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
ओम प्रकाश सिंह ने वाराणसी केंद्र में वर्ष 2024-25 के दौरान हुई भर्ती प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि निर्धारित पांच पदों के लिए प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी की गई। उन्होंने कोऑर्डिनेटर पद पर दो लोगों की नियुक्ति तथा आरक्षण संबंधी नियमों के कथित उल्लंघन की जांच की मांग की है। उन्होंने केंद्र के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी के कार्यकाल में लिए गए विभिन्न निर्णयों, नियुक्तियों और कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
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