Arunachal Frontier Highway: चीन सीमा पर भारत अपनी रणनीतिक तैयारियों को और मजबूत करने जा रहा है. केंद्र सरकार ने अरुणाचल प्रदेश में अरुणाचल फ्रंटियर हाईवे के तहत करीब 278 किलोमीटर लंबी पांच सड़कों के निर्माण के लिए 2,423 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं. ये सड़कें चीन से लगी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के करीब स्थित दुर्गम इलाकों और अंतिम सीमावर्ती गांवों तक कनेक्टिविटी मजबूत करेंगी.
यह पूरा प्रोजेक्ट नेशनल हाईवे-913 का हिस्सा होगा. सड़कों के निर्माण से सीमावर्ती इलाकों में सेना की आवाजाही आसान होने के साथ-साथ स्थानीय लोगों के लिए भी बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है.
सरली-हुरी से बिले-मिगिंग तक बनेंगी सड़कें
इस मेगा प्रोजेक्ट के तहत अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी और पश्चिम सियांग जिलों में सड़क निर्माण किया जाएगा. इसमें सरली-हुरी, हुरी-तालीहा और बिले-मिगिंग जैसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हिस्से शामिल हैं. सबसे बड़े हिस्सों में सरली-हुरी शामिल है, जहां करीब 78.38 किलोमीटर लंबी सड़क बनाई जाएगी. इस प्रोजेक्ट पर लगभग 611 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे और इसे 36 महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. वहीं हुरी-तालीहा सेक्शन में भी दो प्रमुख सड़क परियोजनाएं शामिल हैं. इनमें एक करीब 57 किलोमीटर लंबी सड़क के निर्माण पर लगभग 525 करोड़ रुपये खर्च होंगे. दूसरे हिस्से में करीब 55 किलोमीटर लंबी सड़क बनाई जाएगी, जिसे 48 महीने में पूरा करने की योजना है.
बिले-मिगिंग जैसे दुर्गम इलाके भी जुड़ेंगे
प्रोजेक्ट में बिले-मिगिंग क्षेत्र में करीब 37 किलोमीटर लंबी सड़क भी शामिल है. इसके लिए करीब 274 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया गया है. अरुणाचल प्रदेश के कई सीमावर्ती इलाके बेहद दुर्गम हैं. ऐसे में सड़क नेटवर्क मजबूत होने से सेना के वाहनों और भारी सैन्य उपकरणों की आवाजाही पहले की तुलना में आसान हो सकती है. आपात स्थिति में जवानों तक रसद और जरूरी सामान पहुंचाने में भी मदद मिलेगी.
सिर्फ सेना नहीं, गांवों को भी होगा फायदा
अरुणाचल फ्रंटियर हाईवे का मकसद केवल रणनीतिक कनेक्टिविटी मजबूत करना नहीं है. इसका सीधा फायदा सीमा से सटे अंतिम गांवों में रहने वाले लोगों को भी मिलेगा. बेहतर सड़क संपर्क से स्थानीय लोगों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार और रोजगार के अवसरों तक पहुंच आसान होगी. साथ ही सीमावर्ती इलाकों में पर्यटन और स्थानीय कारोबार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. सरकार के मुताबिक, सीमावर्ती गांवों को मुख्य सड़क नेटवर्क से जोड़ना रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है. इससे इन इलाकों से लोगों के पलायन को रोकने और सीमावर्ती क्षेत्रों में आबादी की मौजूदगी मजबूत करने में मदद मिल सकती है.
चीन की सीमा के सामने भारत का इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत
चीन अरुणाचल प्रदेश को लेकर लगातार अपना दावा करता रहा है और LAC के अपने हिस्से में बुनियादी ढांचे को मजबूत कर रहा है. ऐसे में भारत की ओर से सीमावर्ती सड़क नेटवर्क को मजबूत करना रणनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है. 278 किलोमीटर लंबी इन पांच सड़कों के निर्माण से अरुणाचल के दुर्गम सीमावर्ती इलाकों में भारत की कनेक्टिविटी और पहुंच दोनों मजबूत होंगी. आने वाले वर्षों में यह हाईवे स्थानीय विकास के साथ-साथ देश की सीमा सुरक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.
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