West Bengal 2026:  पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के रुझानों में साफ हो गया है कि सूबे में भाजपा की सरकार बनने जा रही है। तो वही सीएम ममता की पार्टी TMC इन चुनावों में भाजपा से पिछड़ती जा रही है। वहीं इन रुझानों ने सभी को हैरान कर दिया है। 15 सालों से सीएम ममता का गढ़ रहे बंगाल में बीजेपी की लहर आना कोई आम बात नहीं है। दूसरी तरफ कहा जा रहा कि बीजेपी के उन 5 वादों ने चुनाव में अहम भूमिका निभाई है। जिनके असर की काट TMC ढूंढ़ ही नहीं पाई। आइए जानते है विस्तार से।

1. घुसपैठियों को बाहर करने का वादा

बीजेपी ने चुनाव प्रचार के दौरान घुसपैठ के मुद्दे को बार-बार उठाया। भारतीय जनता पार्टी का कहना था कि राज्य में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं की पहचान कर उन्हें बाहर भेज दिया जाएगा। साथ ही इस मुद्दे को राष्ट्रीय सुरक्षा और स्थानीय लोगों के अधिकारों से जोड़कर पेश किया गया। बता दें कि पश्चिम बंगाल के कई इलाकों में घुसपैठ की खबरें सामने आई थीं, और स्थानीय निवासियों को उनसे दिक्कत महसूस होती थी। ऐसे में बीजेपी के इस वादे ने काफी काम किया।

2. जनकल्याणकारी योजनाओं का वादा

बीजेपी ने जनता के लिए कई नई जनकल्याणकारी योजनाओं का वादा किया। इसमें गरीबों, किसानों और महिलाओं के लिए विशेष योजनाएं शामिल थीं। भाजपा ने दावा किया था कि केंद्र सरकार की योजनाओं को राज्य में सही तरीके से लागू किया जाएगा। इसके अलावा पार्टी ने ऐलान किया था कि अगर सूबे में बीजेपी की सरकार बनी, तो मई महीने से राज्य की हर महिला के बैंक खाते में 3000 रुपए भेजे जाएंगे। साथ ही बेरोजगार युवाओं के खातों में भी 3000 रुपए प्रति माह जमा कराने का वादा किया गया था। बंगाल के रुझानों में बीजेपी के वादे का असर देखने को मिला।

3. कानून-व्यवस्था को मजबूत करने का वादा

कानून-व्यवस्था का बीजेपी के चुनाव प्रचार का अहम हिस्सा रहा। भाजपा ने टीएमसी सरकार पर आरोप लगाया कि राज्या में अपराध और हिंसा की घटनाएं काफी ज्यादा बढ़ गई हैं। आरजी कर मेडिकल कॉलेज के 'रेप ऐंड मर्डर केस' का पार्टी ने जिक्र किया। बीजेपी ने दावा किया कि इस घटना से पश्चिम बंगाल की छवि न सिर्फ पूरे देश में खराब हुई, बल्कि सूबे में भी इसे लेकर भारी नाराजगी देखने को मिली। ऐसे मामलों का जिक्र कर बीजेपी ने वादा किया कि सत्ता में आने पर कानून-व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा। साथ ही सूबे में सीएम योगी का यूपी मॉडल लागू किया जाएगा। इसके अलावा गृह मंत्री ने तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं की 'गुंडागर्दी' पर भी लगाम कसने और उन्हें 'उल्टा लटकाकर सीधा करने' की भी बात कही। इस मुद्दे ने शहरी और मध्यम वर्ग के मतदाताओं के बीच असर डाला।

4. पश्चिम बंगाल को भ्रष्टाचार मुक्त करने का वादा

बीजेपी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई का मुद्दा काफी जोर-शोर से उठाया। पार्टी के अनुसार सरकारी योजनाओं में हो रही गड़बड़ियों और घोटालों पर रोक लगाई जाएगी। साथ ही पार्टी ने TMC पर 'सिंडिकेट राज' चलाने का आरोप लगाया। और कहा कि 5 तारीख को भाजपा की सरकार बनते ही राज्य में टीएमसी के सिंडिकेट खत्म कर दिए जाएंगे।

5. उद्योग धंधों को वापस लाने का वादा

बीजेपी ने राज्य में उद्योग और निवेश को बढ़ावा देने का वादा किया। पार्टी का कहना था कि बंगाल में बंद हो चुके उद्योगों को फिर से शुरू किया जाएगा, ताकि नए निवेशकों को आकर्षित किया जाएगा। पार्टी ने युवाओं और व्यापार से जुड़े लोगों के बीच यह मुद्दा चर्चा का विषय बना रहा। इसके अलावा बीजेपी ने किसानों से उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने का भी वादा किया

बीजेपी के 5 वादों की काट ढूंढ़ नहीं पाई TMC

चुनावी रुझानों से साफ है कि बीजेपी ने अपने 5 वादों के जरिए बंगाल में अपनी रणनीति को जमीन पर उतारने में कामयाबी हासिल की। वहीं इन वादों की काट तृणमूल कांग्रेस ढूंढ़ ही नहीं पाई। जनता ने TMC के वादों से ज्यादा बीजेपी के वादों पर यकीन किया। यही वजह है कि बीजेपी आजादी के बाद प्रचंड बहुमत के साथ सूबे में पहली बार अपनी सरकार बनाती दिख रही है।

 Written By: Geeta Sharma