ढाका। बांग्लादेश ने सोमवार को उम्मीद जताई कि भारत पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया में तेजी लाएगा। यह मांग भारतीय उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी और बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के बीच हुई बैठक के दौरान सामने आई।
दिनेश त्रिवेदी ने की प्रधानमंत्री तारिक रहमान से शिष्टाचार मुलाकात
भारत के बांग्लादेश में नियुक्त उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने ढाका स्थित बांग्लादेश सचिवालय में प्रधानमंत्री कार्यालय के कैबिनेट डिवीजन में प्रधानमंत्री तारिक रहमान से शिष्टाचार मुलाकात की।
यह बैठक ऐसे समय हुई है जब शेख हसीना को लेकर भारत और बांग्लादेश के बीच राजनयिक तनाव बढ़ा हुआ है। हसीना 2024 में छात्र आंदोलन के बाद सत्ता से हटाए जाने के बाद से भारत में रह रही हैं।
बैठक की शुरुआत में बांग्लादेश के प्रधानमंत्री ने भारतीय उच्चायुक्त का स्वागत किया। त्रिवेदी ने भी बांग्लादेश में पिछले दो महीनों के अपने अनुभव साझा किए।
शेख हसीना के प्रत्यर्पण प्रक्रिया में तेजी चाहता है बांग्लादेश
बांग्लादेश के प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, “बांग्लादेश ने उम्मीद जताई कि भारत शेख हसीना के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया में तेजी लाएगा।”
ढाका ने भारत से शहीद उस्मान हादी की हत्या में कथित रूप से शामिल लोगों को वापस भेजने की अपनी मांग भी दोहराई। हादी जुलाई 2024 के आंदोलन के प्रमुख चेहरों में से एक थे। 12 दिसंबर 2025 को उन्हें बेहद करीब से गोली मारी गई थी।
बयान में कहा गया कि बांग्लादेश ने भारत से शहीद उस्मान हादी की हत्या में शामिल आरोपियों को वापस करने का अनुरोध दोहराया।
बैठक में दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने भारत और बांग्लादेश के संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए अनुकूल माहौल बनाने की जरूरत पर जोर दिया।
बैठक में बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान, प्रधानमंत्री के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर और अन्य संबंधित अधिकारी भी मौजूद रहे।
यह बैठक ऐसे समय हुई जब इसके एक दिन पहले भारतीय उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने बांग्लादेश के विदेश मंत्री रहमान के साथ अलग से बैठक की थी।
भारत- बांग्लादेश के बीच राजनयिक तनाव की वजह शेख हसीना
भारत और बांग्लादेश के बीच हाल के राजनयिक तनाव की एक प्रमुख वजह शेख हसीना की भारत से की गई सार्वजनिक टिप्पणियां हैं।
बांग्लादेश वापस लौटना चाहती हैं शेख हसीना
5 अगस्त को नई दिल्ली में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने एक वर्चुअल प्रेस कार्यक्रम को संबोधित किया था। यह कार्यक्रम फॉरेन कॉरेस्पॉन्डेंट्स क्लब ऑफ साउथ एशिया की ओर से 2024 के छात्र आंदोलन के बाद उनके सत्ता से हटने की दूसरी वर्षगांठ के मौके पर आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम पर ढाका ने कड़ी आपत्ति जताई थी।
बांग्लादेश में लोकतंत्र बहाली चाहती हैं हसीना
अपने संबोधन में हसीना ने कहा था कि वह दिसंबर में अपने देश लौटने और लोकतंत्र बहाल करके देश को “सही रास्ते” पर लाने के लिए दृढ़ हैं। उन्होंने यह भी माना था कि वापसी पर उन्हें जेल या यहां तक कि मौत की सजा का सामना करना पड़ सकता है।
इसके बाद बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने कड़ा विरोध दर्ज कराया और हसीना के बयानों की निंदा की। ढाका ने कहा कि इस घटना से जनता की भावनाएं प्रभावित हुईं और दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने के प्रयास जटिल हुए।
भारत ने हसीना के इस कार्यक्रम से खुद को अलग कर लिया था। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया था कि सरकार का इस कार्यक्रम से कोई लेना-देना नहीं है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि यह कार्यक्रम एक “निजी मीडिया संस्था” द्वारा आयोजित किया गया था और नई दिल्ली वहां व्यक्त किए जाने वाले किसी भी विचार का समर्थन नहीं करती।
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जायसवाल ने कहा, “जिस बातचीत का आप जिक्र कर रहे हैं, उसका आयोजन एक निजी मीडिया संस्था कर रही है। सरकार की इसमें बिल्कुल भी भागीदारी नहीं है और न ही वह मंच पर व्यक्त किए जाने वाले किसी विचार का समर्थन करती है।”
Written By: Pradeep Singh