Iran-Israel conflict: पश्चिम एशिया में ईरान, अमेरिका और इस्राइल के बीच जारी सशस्त्र संघर्ष 163वें दिन में प्रवेश कर चुका है. तनातनी कम होने के बजाय अब नए मोर्चों पर फैलती दिख रही है. एक तरफ गाजा में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से पेश 15 सूत्री शांति योजना को इस्राइल ने सिरे से खारिज कर दिया है, वहीं दूसरी तरफ होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने के मुद्दे पर ईरान ने अमेरिका के समक्ष नई और सख्त शर्तें रख दी हैं.
इस्राइल ने ट्रंप की गाजा योजना क्यों ठुकराई?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा संकट को सुलझाने के लिए एक 15 सूत्री रोडमैप का प्रस्ताव रखा था, जिसमें हमास के चरणबद्ध निरस्त्रीकरण के साथ इस्राइली सेना की वापसी का प्रावधान शामिल था. इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कैबिनेट बैठक में इस योजना को खारिज करते हुए स्पष्ट कहा कि जब तक हमास का पूर्ण निरस्त्रीकरण (Complete Disarmament) नहीं हो जाता, तब तक इस्राइली सेना गाजा के किसी भी क्षेत्र से पीछे नहीं हटेगी. हमास के राजनीतिक ब्यूरो सदस्य बासेम नईम ने कहा कि उनका संगठन मध्यस्थों और वाशिंगटन से नेतन्याहू पर इस योजना को स्वीकार करने का दबाव बनाने की अपेक्षा कर रहा है. वर्तमान में इस्राइली सेना गाजा के आधे से अधिक हिस्से पर नियंत्रण बनाए हुए है, जबकि वहां रहने वाले 20 लाख फलस्तीनी गंभीर मानवीय संकट का सामना कर रहे हैं.
ओमान से बातचीत और ईरान की शर्तें
वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति की जीवनरेखा माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के लिए ईरान और ओमान के बीच एक अंतरिम समझौते के खाके पर बातचीत जारी है.नए प्रस्ताव के अनुसार, व्यावसायिक जहाजों को ईरान के नियंत्रण वाले रास्ते से प्रवेश और ओमान के नियंत्रण वाले समुद्री रास्ते से बाहर निकलने की अनुमति देने की बात कही जा रही है. ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने साफ किया है कि जब तक अमेरिका युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई (Reparations), ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकाबंदी का खात्मा और जब्त परिसंपत्तियों को बहाल नहीं करता, तब तक होर्मुज को पूरी तरह नहीं खोला जाएगा. 'शत्रु देशों' के जहाजों पर रोक: ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति ने योजना के तहत अमेरिका और इस्राइल से जुड़े जहाजों की आवाजाही पर रोक लगाने की बात कही है.
यमन में हूती हमले और क्षेत्रीय युद्ध का खतरा
मोखा बंदरगाह पर हमला: यमन के लाल सागर तट पर स्थित सरकार-नियंत्रित मोखा बंदरगाह पर ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के मिसाइल और ड्रोन हमले में 4 सैनिकों और 3 नागरिकों समेत कम से कम 7 लोगों की मौत हो गई और 15 अन्य घायल हुए। इस हमले से बंदरगाह और रसद आपूर्ति को भारी नुकसान पहुंचा है। हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारी ने सऊदी अरब के जिजान शहर स्थित अरामको रिफाइनरी को ड्रोन से निशाना बनाने का दावा किया। सऊदी ऊर्जा मंत्रालय ने रिफाइनरी की एक सुविधा में आग लगने की पुष्टि की है। इन हमलों से यमन में 2022 से जारी नाजुक युद्धविराम के पूरी तरह टूटने का खतरा बढ़ गया है।
अमेरिकी हथियारों का भंडार और सीधी चेतावनी
लंबे खिंचते संघर्ष के कारण उन्नत मिसाइल-रोधी और रक्षात्मक हथियारों के अमेरिकी स्टॉक पर भारी दबाव देखा जा रहा है, जिससे पेंटागन को घरेलू उत्पादन और आधुनिकीकरण में तेजी लानी पड़ रही है। ईरानी ग्राउंड फोर्स कमांडर ब्रिगेडियर जनरल अली जहांशाही ने चेतावनी दी है कि यदि कोई भी अमेरिकी सैनिक ईरानी भूमि पर कदम रखता है, तो ईरानी सेना सीधी और भीषण सैन्य कार्रवाई करेगी।
क्या है आगे का रास्ता?
163 दिनों के बाद भी गाजा में स्थायी संघर्षविराम, होर्मुज जलमार्ग का सुचारू संचालन, और यमन-सऊदी मोर्चे पर शांति का कोई सर्वमान्य हल निकलता नहीं दिख रहा है। राजनयिक मध्यस्थता जारी रहने के बावजूद सभी पक्ष अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं, जिससे पश्चिम एशिया के एक और लंबे और व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष में उलझने की आशंका बढ़ गई है।
Written by Shailesh Yadav