राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल आज यानी 24 अगस्त को चीन के बीजिंग दौरे पर रवाना होंगे। उनका यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर बातचीत फिर से आगे बढ़ रही है। डोभाल बीजिंग में चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ अहम बैठक करेंगे।
25वें दौर की विशेष प्रतिनिधि वार्ता
अजीत डोभाल और वांग यी के बीच 25 अगस्त को भारत-चीन सीमा मुद्दे पर विशेष प्रतिनिधि वार्ता का 25वां दौर होगा। यह बातचीत दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद के समाधान और सीमा पर शांति बनाए रखने के लिए बनाए गए विशेष प्रतिनिधि तंत्र का हिस्सा है। भारत और चीन के बीच करीब 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा को लेकर विवाद है। ऐसे में डोभाल-वांग यी की बैठक में वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC पर शांति और स्थिरता बनाए रखने के मुद्दे पर खास चर्चा होने की उम्मीद है।
क्या होगा डोभाल की बातचीत का एजेंडा?
डोभाल के दौरे में मुख्य रूप से इन मुद्दों पर बातचीत होने की संभावना है—
* भारत-चीन सीमा विवाद और LAC पर स्थिति
* सीमा पर शांति एवं स्थिरता बनाए रखना
* दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के प्रयास
* सीमा से जुड़े लंबित मुद्दों पर आगे की बातचीत
* भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में कदम
हालांकि, बैठक का पूरा आधिकारिक एजेंडा पहले से सार्वजनिक नहीं किया गया है।
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शी जिनपिंग के भारत दौरे से पहले क्यों अहम है मुलाकात?
डोभाल का बीजिंग दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के संभावित भारत दौरे से पहले हो रहा है। शी के सितंबर में भारत में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने की संभावना है। ऐसे में डोभाल और वांग यी की बातचीत दोनों देशों के बीच आगे होने वाली उच्चस्तरीय वार्ता के लिए माहौल तैयार कर सकती है।
भारत पहले भी स्पष्ट कर चुका है कि दोनों देशों के रिश्तों को बेहतर बनाने के लिए सीमा पर शांति और स्थिरता जरूरी है। इसलिए डोभाल की यह यात्रा केवल सीमा विवाद तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि भारत-चीन संबंधों को आगे बढ़ाने के लिहाज से भी अहम है।
क्यों खास है अजीत डोभाल का चीन दौरा?
दरअसल, भारत और चीन के रिश्तों में सीमा विवाद सबसे संवेदनशील मुद्दों में से एक है। ऐसे में दोनों देशों के शीर्ष सुरक्षा और कूटनीतिक अधिकारियों की सीधी बातचीत से सीमा पर तनाव कम करने और आपसी विश्वास बढ़ाने की कोशिशों को आगे बढ़ाया जा सकता है। अब सबकी नजर 25 अगस्त को होने वाली डोभाल-वांग यी वार्ता पर है। देखना होगा कि बातचीत से सीमा विवाद और भारत-चीन संबंधों को लेकर कोई ठोस प्रगति सामने आती है या नहीं।
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