Delhi News: देश की राजधानी दिल्ली में जंतर-मंतर पर एक महिला पत्रकार से छेड़खानी के गंभीर आरोपों से घिरे एसीपी विवेक भगत को अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त के पद पर मिला प्रमोशन फिलहाल रोक दिया गया है। दिल्ली सरकार ने बीते दिन एसीपी विवेक भगत को एडिशनल डीसीपी के पद पर प्रमोट किया था। लेकिन मामले के तुल पकड़ने के बाद फिलहाल प्रमोशन लिस्ट से उनका नाम हटा दिया गया है। महिला से हुए दुर्व्यवहार मामले की जांच क्राइम ब्रांच की टीम को सौंपी गई है। फिलहाल जांच लगातार जारी है। जिसकी रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

महिला पत्रकारों से उत्पीड़ने के प्रमोशन रूकने की वजह

दिल्ली सरकार की तरफ से 5 अक्टूबर 2026 को 12 डीएएनआईपी अधिकारियों को अतिरिक्त डीसीपी के पद पर प्रमोशन की लिस्ट जारी की गई थी। इस लिस्ट में साल 2018 बैच के अधिकारी विवेक भगत का नाम भी शामिल था। वर्तमान समय में उनकी तैनाती कनॉट प्लेस थाने में एसीपी के पद पर है। लेकिन देर रात ही दिल्ली सरकार ने सोमवार को जारी प्रमोशन लिस्ट में संशोधन कर ACP विवेक भगत का नाम हटा दिया गया है। जिसके बाद उन्‍हें एडिशनल डीसीपी का चार्ज नहीं दिया जाएगा।

दिल्ली सरकार द्वारा प्रमोशन लिस्ट से विवेक भगत का नाम हटाए जाने के पीछे की असली वजह महिला पत्रकारों से कथित तौर पर उत्‍पीड़न का आरोप बताई जा रही है। एसीपी विवेक भगत को प्रमोशन देकर एडीसीपी पद सौंपने के मतलब साफ ही सरकार का पर सवाल उठना। फिलहाल इस मामले में स्‍पष्‍टीकरण सामने आया है। लेकिन सरकार ने स्थिति को समझते हुए ACP विवेक भगत को ADCP का कार्यभार सौंपने के आदेश में संशोधन किया। प्रमोशन रूकने के बाद यह भी सामने आया है कि अब खुद एसीपी विवेक भगत ने इस मामले की सही ठंग से जांच होने के साथ-साथ संतोषजनक निष्कर्ष तक पहुंचने की बात कही है।

सोशल मीडिया अकॉउंट एक्स पर दी जानकारी

देर रात दिल्ली सरकार ने अपने सोशल मीडिया अकॉउंट एक्स पर पोस्ट कर मामले से अवगत कराया। दिल्ली सरकार ने सोमवार की रात स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि 5 अक्टूबर को दिल्ली, अंडमान निकोबार द्वीप समूह पुलिस सेवा के 12 अधिकारियों को ADCP के पद पर प्रमोशन दिया गया था। लेकिन सरकार द्वारा संशोधन आदेश जारी होने के तुरंत बाद एसीपी विवेक भगत का नाम हटा दिया गया है। सरकार की तरफ से 25 अगस्त को इन 12 अधिकारियों को अतिरिक्त कार्यभार देने का प्रस्ताव शुरू किया गया था। जिसे 5 अक्टूबर को मंजूरी देकर लिस्ट को जारी कर दिया गया। सरकार का कहना है कि इस आदेश को वर्तमान घटना से जोड़कर नहीं देखा जा सकता है।
अब सरकार ने क्‍या कहा

क्या 11 अधिकारियों की लिस्ट फिर से होगी जारी

दिल्ली सरकार के स्पष्टीकरण में साफ है ADCP का वर्तमान कार्यभार एक अस्थायी प्रशासनिक व्यवस्था है। जिसमें अधिकारियों को किसी तरह का वित्तीय लाभ नहीं मिलता है। वह नियमित तौर पर तैनात नियुक्त ADCP के वैधानिक अधिकारों और कर्तव्यों का इस्तेमाल नहीं कर सकते। लेकिन यह खबर भी सामने आ रही है कि महिला पत्रकारों से उत्पीड़न मामले में नाम आने के बाद विवेक भगत ने खुद इस पद पर प्रमोशन लेने से साफ इनकार कर दिया था। सरकार ने विवेक भगत की मांग को लेकर 5 अक्टूबर के आदेश में संशोधन करा। सरकार अब ADCP का वर्तमान कार्यभार देने के मामले में और 11 अधिकारियों के लिए दोबारा लिस्ट जारी करने पर तैयारी कर रही है।

क्राइम ब्रांच कर रही है आरोपों की जांच

शनिवार को जंतर-मंतर पर निर्वाचन आयोग के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान 3 महिला पत्रकारों से दिल्ली पुलिस के अधिकारियों पर कथित यौन उत्पीड़न का आरोप लगा था। दिल्ली पुलिस ने मामले में शिकायतें दर्ज की है। निष्पक्ष जांच के लिए इन्हें क्राइम ब्रांच को भेज दिया गया है। पुलिस के मुताबिक प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति सामने आई थी। इसी दौरान महिला पत्रकारों ने पुलिस अधिकारियों पर कथित दुर्व्यवहार और यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए। आरोपों के बाद कई स्वतंत्र पत्रकारों ने पुलिस अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग को लेकर संसद मार्ग थाने के बाहर विरोध प्रदर्शन भी किया।

आदेश में था किनका नाम शामिल?

सरकार द्वारा जारी प्रमोशन लिस्ट में विवेक भगत, डॉ. विकास श्योकंद, ए वेंकटेश, गुरसेवक सिंह, रेनू लता, विदुषी कौशिक, मनु हिमांशु, सकारिया मिहिर प्रवीणभाई, गरिमा तिवारी, आशीष कुमार, मनीष लाडला और रोहित गुप्ता को ADCP का कार्यभार सौंपा था। लेकिन सरकार ने देर रात लिस्ट में संशोधन कर भगत का नाम हटा दिया। अन्य 11 अधिकारियों को लेकर आगे जानकारी दी जाएगी। फिलहाल जांच की प्रगति और उसके बाद कार्रवाई को लेकर अतिरिक्त जानकारी साझा नहीं की गई है।

 

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