नई दिल्ली: विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी विवाद के बीच CJP ने सरकार पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी करने का आरोप लगाया है। बता दें कि CJP नेता सौरव दास ने दावा किया कि उन्हें और पार्टी के कुछ अन्य नेताओं को गिरफ्तार करने की योजना बनाई जा रही है। इस दौरान उन्होंने ये भी कहा कि इस तरह की कार्रवाई से युवाओं की आवाज दबाई नहीं जा सकेगी और देशभर में आंदोलन जारी रहेगा। यह बयान रविवार को दिल्ली में हुए प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिए जाने और पुलिसकर्मियों के घायल होने के बाद सामने आया है।

युवा पीढ़ी जाग चुकी है...
सौरव दास ने X पर पोस्ट करते हुए लिखा कि सरकार अगर गिरफ्तारी जैसी कार्रवाई के जरिए आंदोलन को रोकने की कोशिश कर रही है तो यह उसकी गलती होगी। युवा अब जाग चुका है और इस तरह की कार्रवाई स्वीकार नहीं की जाएगी। इस दौरान सौरव दास ने ये भी दावा किया कि सरकार उन्हें, अभिजीत, आशुतोष, रत्ना और CJP के अन्य नेताओं को गिरफ्तार करने की योजना बना रही है। पार्टी के सदस्य जेल जाने या इससे भी गंभीर परिणामों का सामना करने के लिए तैयार हैं।

उन्होंने लोगों से अपील की कि नेता मौजूद हों या नहीं, अधिकारों और भविष्य के लिए संघर्ष जारी रखा जाए। दास ने 10 अक्टूबर से बड़े पैमाने पर प्रदर्शन का आह्वान भी किया।

अभिजीत दीपके ने अमित शाह को घेरा
CJP नेता अभिजीत दीपके ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को निशाने पर लेते हुए X पर लिखा, 'Kitno ko arrest karoge AmitShah? 10 Oct ko poora desh aa raha hai.' CJP ने SIR विवाद को लेकर लोगों से 10 अक्टूबर को बड़े प्रदर्शन के लिए जुटने की अपील की है। पार्टी का दावा है कि देशभर में आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा।

दिल्ली प्रदर्शन में 15 पुलिसकर्मी घायल
रविवार को राजधानी दिल्ली में हुए एक प्रदर्शन के दौरान करीब 15 दिल्ली पुलिसकर्मियों के घायल होने की जानकारी पुलिस सूत्रों ने दी। इनमें कुछ महिला पुलिसकर्मी भी शामिल थीं, जिन्हें कथित तौर पर प्रदर्शनकारियों के काटने से चोट लगी। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, प्रदर्शन के सिलसिले में करीब 110 लोगों को हिरासत में लिया गया।

यूथ कांग्रेस ने भी किया था प्रदर्शन
इससे पहले रविवार को इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने रायसीना रोड से जंतर-मंतर की ओर मार्च करने की कोशिश की। IYC ने केंद्र सरकार पर मुख्य चुनाव आयुक्त को संरक्षण देने का आरोप लगाया और उनके तत्काल इस्तीफे की मांग की। मार्च का नेतृत्व IYC के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब ने किया। बड़ी संख्या में युवा कार्यकर्ता हाथों में पोस्टर लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे।

प्रदर्शन को देखते हुए इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया और बैरिकेडिंग की गई। चिब ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर जाने से रोका जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए जंतर-मंतर जाने की अनुमति है तो उन्हें वहां जाने दिया जाना चाहिए।

ज्ञानेश कुमार को बचाने की कोशिश
IYC नेताओं ने केंद्र सरकार पर ज्ञानेश कुमार को बचाने का आरोप लगाया। राष्ट्रीय सचिव रोशनी जायसवाल ने कहा कि सरकार मामले को दबाने के लिए हर संभव तरीका अपना रही है। वहीं, IYC लीगल टीम के राष्ट्रीय समन्वयक चितवन गोदारा ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा जब तक न्याय नहीं मिलता। ये नेताओं के राजनीतिक आरोप हैं, जिन पर केंद्र सरकार और संबंधित पक्षों का पक्ष अलग हो सकता है।

क्या है SIR विवाद?
SIR को लेकर विवाद उस रिपोर्ट के बाद तेज हुआ जिसमें The Indian Express ने दावा किया था कि चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने करीब 10 महीनों के दौरान कम से कम 14 मौकों पर मतदाता सूची, मतदाता पंजीकरण और चुनाव आयोग की तकनीकी प्रणालियों से जुड़े फैसलों पर आपत्तियां उठाई थीं। हालांकि, निर्वाचन आयोग ने इसे संस्थागत असहमति मानने से इनकार किया है।

आयोग के मुताबिक, ड्राफ्ट चरण में अधिकारियों की ओर से सवाल, सुझाव और इनपुट देना सामान्य प्रशासनिक और निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा है। आयोग ने यह भी कहा कि SIR के कार्यक्रम से जुड़े फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे। फिलहाल SIR को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और विरोध-प्रदर्शन का दौर जारी है। CJP ने 10 अक्टूबर से बड़े प्रदर्शन का आह्वान किया है, ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमाने की संभावना है। 

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