Cockroach Janata Party (CJP) के कार्यकर्ता आशुतोष रांका ने दावा किया है कि उन्हें, अभिजीत दिपके और सौरव दास को 10 अक्टूबर से पहले राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) या किसी अन्य संबंधित कानूनी प्रावधान के तहत गिरफ्तार किया जा सकता है। रांका ने कहा कि तीनों कार्यकर्ता 6 जून से ही जेल जाने के लिए मानसिक रूप से तैयार हैं और उन्हें किसी भी संभावित कार्रवाई का डर नहीं है।

रांका ने सोशल मीडिया पर किया पोस्ट

रांका ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि कई सूत्रों ने उन्हें संभावित गिरफ्तारी की जानकारी दी है, उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र की बीजेपी सरकार उनके आंदोलन से घबराई हुई है और इसी वजह से हिंसा का सहारा ले रही है, उन्होंने कहा कि वे बेहतर और अधिक जवाबदेह भारत के लिए संघर्ष कर रहे हैं और उनके पास खोने के लिए कुछ नहीं है।

गिरफ्तार किया जा सकता है- रांका

रांका ने कहा कि उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है, पीटा जा सकता है या इससे भी गंभीर कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन इससे उनका आंदोलन नहीं रुकेगा, उन्होंने महात्मा गांधी के विचारों का हवाला देते हुए सरकार पर डर के कारण हिंसा का रास्ता अपनाने का आरोप लगाया।

वहीं, CJP कार्यकर्ता अभिजीत दिपके ने कहा कि UAPA, NSA या लंबे समय तक जेल में रखने की धमकी से संगठन अपनी आवाज नहीं दबाएगा, उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर वे महीनों या वर्षों तक जेल में रहने के लिए तैयार हैं, लेकिन लोकतंत्र की रक्षा के अपने संघर्ष से पीछे नहीं हटेंगे। दिपके ने यह भी कहा कि संगठन गांधी के अहिंसक और शांतिपूर्ण प्रतिरोध के रास्ते पर आगे बढ़ेगा।

सौरव दास ने भी लगाय आरोप

सौरव दास ने भी सरकार पर संभावित गिरफ्तारी की तैयारी करने का आरोप लगाया, उन्होंने कहा कि अगर सरकार को लगता है कि इस तरह की कार्रवाई से युवा डरकर चुप हो जाएंगे, तो यह उसकी गलतफहमी है। दास ने लोगों से अपील की कि उनके साथ संगठन के अन्य नेताओं की गिरफ्तारी होने पर भी अधिकारों और भविष्य के लिए आंदोलन जारी रखा जाए।

दास ने लोगों से की अपील

दास ने 10 अक्टूबर से बड़े स्तर पर प्रदर्शन और लोगों की लामबंदी का आह्वान किया। CJP की ओर से नागरिकों से अपील की गई है कि SIR विवाद को लेकर 10 अक्टूबर से बड़े विरोध प्रदर्शन के लिए एकजुट हों।

यह घटनाक्रम मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे प्रदर्शनों के बीच सामने आया है। प्रदर्शनकारी विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठा रहे हैं। पुलिस कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिए जाने की भी बात सामने आई है।

क्या है मामला

विवाद को उस रिपोर्ट के बाद और तूल मिला, जिसमें दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने करीब 10 महीनों के दौरान मतदाता सूची, मतदाता पंजीकरण और चुनाव आयोग की तकनीकी व्यवस्था से जुड़े फैसलों पर कम से कम 14 मौकों पर आपत्तियां दर्ज कराई थीं।

हालांकि, चुनाव आयोग ने इन आपत्तियों को संस्थागत असहमति मानने से इनकार किया है। आयोग के मुताबिक, किसी निर्णय के अंतिम रूप लेने से पहले अधिकारियों की ओर से सवाल, सुझाव और इनपुट देना उसकी सामान्य प्रशासनिक एवं निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा है। ECI ने यह भी स्पष्ट किया कि SIR की समय-सारणी से जुड़े फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे।

 

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