देश भर के अलग- अलग हिस्सों में पूर्व शिक्षा मंत्री धमेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर विद्यार्थियों द्वारा जमकर प्रदर्शन किया गया है। इस प्रदर्शन के दौरान कई विद्यार्थियों पर एफआईआर भी दर्ज की गई है। एफआईआर पर विद्यार्थियों का कहना है कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से किया गया वहीं पुलिस प्रशासन का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए विद्यार्थियों पर एफआईआर की गई है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है, इस एफआईआर से विद्यार्थियों के करियर पर क्या असर होगा, चलिए आपको बताते है।

बैकग्राउंड वेरिफिकेशन से हो जाएगी दिक्कत
आजकल किसी भी सरकारी नौकरी में चयन से पहले विद्यार्थी का बैकग्राउंड वेरिफिकेशन कराया जाता है। यदि उसमें ऐसा दिखेगा कि विद्यार्थी पर एफआईआर हुई है तो उसके चुने जाने के चांसेस कम जाऐंगे। इसके अलावा प्राइवेट नौकरी में भी बैकग्राउंड वेरिफिकेशन की जाती है। यदि वैरिफिकेशन के दौरान किसी भी तरह की लंबित एफआईआर या ऐसा कुछ दिखता है तो भी इस स्थिति में नौकरी मिलने में देरी का सामना करना पड़ सकता है।

कैरेक्टर सर्टिफिकेशन प्राप्त करने में भी हो सकती है दिक्कत
FIR दर्ज होने की स्थिति में कैरैक्टर सर्टिफिकेट प्राप्त करने में भी दिक्कत हो सकती है। यह डॉक्युमेंट कई यूनिवर्सिटीज, हॉस्टल्स, फेलोशिप और दूसरे एजुकेशनल प्रोग्राम्स में एडमिशन के दौरान मांगा जाता है. हालांकि, इसका प्रभाव हर एक मामले के नेचर और संबंधित संस्थान के नियमों पर निर्भर करता है।

पासपोर्ट और वीजा प्रक्रिया में भी हो सकती है दिक्कत
एफआईआर दर्ज होने की स्थिति में पासपोर्ट और वीजा प्रक्रिया होने में भी दिक्कत होती है। लंबित आपराधिक मामलों की स्थिति में पासपोर्ट आवेदन या उसके रिन्यूअल के दौरान अतिरिक्त जांच हो सकती है। इसी तरह कुछ देशों की वीजा प्रक्रिया में भी आवेदक के कानूनी रिकॉर्ड को चेक किया जाता है, जिससे आवेदन प्रभावित हो सकता है। इसके अलावा एफआईआर होने की स्थिति में विद्यार्थियों को मानसिक रुप से भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

Written by Rozi Sinha