PAKISTAN NEWS : पाकिस्तान में सत्ताधारी पार्टी मुस्लिम लीग ने इफ्तिखार गिलानी का नाम POK के नए PM पद के लिए चयनित किया। कल 28 अगस्त 2926 को इफ्तिखार गिलानी भले ही POK की भाग दौड़ संभालने की जिम्मेदारी अपने हाथ में ले चुके हैं लेकिन पीओके की जनता ने उन्हें लूजर पीएम का ताज पहना दिया है। पीओके की जनता के लिए बैरिस्तर इफ्तिखार अली गिलानी महज एक कठपुतली की तरह मानते हैं।
पीओके विधानसभा में आयोजित समारोह में ली शपथ
पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज़ (पीएमएल-एन) के नेता इफ़्तिख़ार गिलानी ने पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (पीओके) के 17वें प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ली। शुक्रवार को मुज़फ़्फ़राबाद स्थित पीओके विधानसभा में आयोजित समारोह में उन्होंने पद की शपथ लेने के बाद सदन को अपना पहला संबोधन दिया। प्रधानमंत्री बनने के बाद अपने भाषण में गिलानी ने भारत के खिलाफ तीखी बयानबाजी की और कश्मीर मुद्दे को लेकर भारत पर निशाना साधा।
आखिर क्यों बोले लूजर पीएम और कठपुतली
दरअसल पीओके की जनता द्वारा उन्हें लूजर पीएम और कठपुतली कहने के पीछे एक नहीं बल्कि कई वजह है। इसमें पहला और शर्मनाक कारण तो यही है कि गिलानी अपनी ही सीट से चुनाव हार गए थे। लेकिन इस्लामाबाद के आकाओं की दया का असर है कि गिलानी को विधानसभा में एंट्री मिली। इस घटिला राजनीतिक खेल के बाद पीओकी की आवाम का गुस्सा इस समय सातवें आसमान पर है। ऐसे में एक बार फिर से हिंसा भड़कने जैसी आशंका भी जताई जा रही है।
गिलानी के नाम पर आखिर में नवाज शरीफ ने लगाई मुहर
दरअसल पीओके में इस समय बेहद खराब स्थिति चल रही है। ऐसे में गिलानी की हार के बाद भी प्रधानमंत्री पद पर बैठाकर अहम जिम्मेदारी सौंपना राजनीतिक तौर पर कई बढ़े सवाल खड़े करता है। गिलानी को 44 में से 30 वोट मिले थे। गिलानी के सामने पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के मुख्तार अहमद थे, उन्हें 14 वोट ही मिले थे। गिलानी के नाम पर आखिर में नवाज शरीफ ने मुहर लगाई थी। जिसके बाद विधानसभा में गिलानी के आगे बहुमत हासिल करने का रास्ता साफ हो गया। पीएम बनने में कई आकाओं का भी योगदान रहा है क्योंकि पीओके की जनता खुद गिलानी को नापसंद करती है। ऐसे में गिलानी का पीएम बनना पीओके की जनता का गुस्सा भड़का रहा है।
आखिर कैसे नवाज शरीफ की ख्वाहिश पर फिर गया पानी?
पीओके में चुनाव प्रचार के समय नवाज शरीफ ने पीओके में कहा था कि अगर नवाज शरीफ चुनाव जितते हैं तो वह शहबाज शरीफ से अपील करेंगे कि उन्हें प्रधानमंत्री बनाया जाए। लेकिन नवाज शरीफ इन चुनावों में खरे नहीं उतरे। वह मौजूदा विधानसभा के सदस्य नहीं है। ऐसे में नवाज शरीफ का पीओके का प्रधानमंत्री बने की ख्वाहिश पर पानी फिर गया है। असेंबली में कुल 53 सीटें है, 45 पर जनता ने वोट डाला। सदन में 46 सदस्य मौजूद हैं, पुंछ और सुधनोती जिलों की 7 सीटों पर कानून व्यवस्था खस्ताहाल होने के बाद चुनाव नहीं हुआ था। शुक्रवार को हुई वोटिंग में 44 विधायक शामिल हुए। स्पीकर ने मतदान से दूर रहे।
कौन है इफ्तिखार गिलानी?
इफ्तिखार गिलानी पेशे से बैरिस्टर के नाम से भी प्रचलित है। इफ्तिखार गिलानी ने ब्रिटेन से वकालत की शिक्षा की। इसके बाद वह PoK की राजनीति में एक्टिव हुए। वह पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज यानी PML-N से जुड़े। पार्टी में PoK के सूचना सचिव के पद पर भी संभाल चुके हैं। इफ्तिखार गिलानी के राजनीतिक सफर की बात करें तो इसकी शुरुआत मुजफ्फराबाद से हुई लेकिन वहीं पर लोगों के दिलों में अपनी जगह नहीं बना पाए। साल 2011 में गिलानी पहली बार पीओके विधानसभा चुनाव जीते। साल 2016 में भी वह विधानसभा में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में कामयाब रहे। PML-N सरकार में वह शिक्षा मंत्री बने और इसी पद पर वह तकरीबन 5 साल तक शिक्षा विभाग को संभाले रहे। राजनीतिक करियर में साल 2021 और 2026 में उन्हे करारी हाल मिली।
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