नई दिल्ली: भारत आतंकवाद, संगठित अपराध और नशीले पदार्थों की तस्करी जैसी समस्याओं से निपटने के लिए दूसरे देशों के साथ मिलकर काम करने को तैयार है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 13 अक्टूबर को बिम्सटेक (BIMSTEC) गृह मंत्रियों की पहली बैठक में कहा कि भारत इन खतरों से निपटने के लिए बिम्सटेक कन्वेंशन के प्रति प्रतिबद्ध है।
इस बैठक में सदस्य देशों के बीच सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जा रही है। इसका मकसद आतंकवाद और दूसरे अंतरराष्ट्रीय अपराधों पर रोक लगाने के लिए आपसी सहयोग बढ़ाना है।
आतंकवाद और ड्रग तस्करी पर कैसे लगेगी लगाम?
आज आतंकवाद और नशीले पदार्थों की तस्करी जैसी समस्याएं सिर्फ एक देश तक सीमित नहीं हैं। कई बार अपराधी एक देश में वारदात करते हैं और दूसरे देश में छिप जाते हैं। ऐसे मामलों में अपराधियों तक पहुंचने के लिए अलग-अलग देशों की सुरक्षा एजेंसियों के बीच तालमेल जरूरी होता है।
बिम्सटेक देशों के बीच सहयोग बढ़ने से अपराध से जुड़ी जानकारी साझा करने, जांच में मदद लेने और ऐसे मामलों पर मिलकर कार्रवाई करने में मदद मिल सकती है।
कौन-कौन से देश हैं शामिल?
बिम्सटेक बंगाल की खाड़ी के आसपास के देशों का एक संगठन है। इसमें भारत समेत कुल सात देश शामिल हैं। इनमें बांग्लादेश, भूटान, भारत, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड शामिल हैं। यह संगठन सदस्य देशों के बीच व्यापार, आर्थिक विकास, तकनीक और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने के लिए काम करता है।
अमित शाह का बयान इसी दिशा में भारत की प्रतिबद्धता को दिखाता है कि आतंकवाद और संगठित अपराध जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए क्षेत्रीय स्तर पर सहयोग जरूरी है।
क्या है बिम्सटेक कन्वेंशन?
बिम्सटेक कन्वेंशन एक समझौता है, जिसका मकसद आतंकवाद, संगठित अपराध और नशीले पदार्थों की तस्करी जैसी समस्याओं से निपटने में सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाना है। इस समझौते पर 11 दिसंबर 2009 को हस्ताक्षर किए गए थे और यह 16 मार्च 2021 को लागू हुआ।
भारत के लिए यह बैठक इसलिए भी अहम है, क्योंकि क्षेत्र में सुरक्षा बनाए रखने के लिए पड़ोसी देशों के साथ मिलकर काम करना जरूरी है। सदस्य देशों के बीच बेहतर तालमेल से सीमा पार होने वाले अपराधों पर लगाम लगाने और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
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