11 अक्टूबर 2026 रविवार से शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ होने जा रहा है। 9 दिनों तक मां भगवती के 9 स्वरूपों की पूजा-अराधना कर भक्त अपनी मनोकामनाओं को पूरा कर सकते हैं। तो चलिए बताते हैं आपको भी घटस्थापना का सही समय और क्या है शुभ मुहूर्त?
कलश स्थापना को लेकर होती है दुविधा
शारदीय नवरात्रि का प्रारंभ 11 अक्तूबर रविवार से शुरू होने वाला है। यह नवरात्रि इस साल बेहद खास होने वाली है, क्योंकि इस बार मां भगवती हाथी पर सवार होकर आएंगी और भक्तों को शुभ परिणाम देंगी। ऐसे में लोगों के घरों इस बार घटस्थापना या कलश स्थापना प्रथम नवरात्रि में सबसे मुख्य माना जाता है। जिसके शुभ मुहूर्त को लेकर लोगों में कई दुविधा बनी रहती है।
नवरात्रि के 9 दिन मां दुर्गा के 9 स्वरूपों को कैसे करें प्रसन्न? जानिए सही मंत्र, भोग और पूजा विधि
कुछ लोग पूरे रिति रिवाजों के साथ कलश स्थापित करते हैं। इस साल भगवती मां हाथी पर सवार होकर आएंगी और भक्तों के सभी कष्टों को हर लेंगी। सभी भक्त नवरात्रि में पूरे विधि विधान से पूजा आराधना करते हैं। इसके लिए सही समय और शुभ मुहूर्त का खास ध्यान रखा जाता है। सबसे जरूरी होता है कलश स्थापना (घट स्थापना)। जिसे लेकर लोगों को काफी असमंजस की स्थिति पैदा होती है।
क्या है सही मुहूर्त?
नवरात्रि के 9 दिनों में मां दुर्गा के 9 अलग-अलग स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा के कुछ नियम होते हैं। इसके साथ ही घट स्थापना या कलश स्थापना के लिए भी शुभ मुहूर्त होता है। इस बार प्रातःकाल शुभ मुहूर्त: 6:19 बजे से सुबह 10:12 बजे तक (अवधि: करीब 3 घंटे 52 मिनट) रहेगा। कलश स्थापना के लिए अभिजीत मुहूर्त सबसे शुभ माना जाता है। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक रहेगा। देखा जाए तो कलश स्थापना का शुभ समय इस बार सुबह 6:19 से दोपहर 12:31 बजे तक रहेगी।
कैसे करें कलश स्थापित?
बात करें पंचांग की तो पंचांग के मुताबिक घटस्थापना का शुभ और सही मुहूर्त सुबह 6:19 बजे से 10:12 बजे तक रहेगा। इसके साथ ही 11:44 से दोपहर 12:31 बजे तक अभिजीत मुहूर्त रहेगा। यह समय भी कलश स्थापना के लिए बेहद शुभ माना जाता है। तो चलिए बताते हैं कैसे करें कलश की स्थापना?
कलश में स्थापना से पहले क्या कुछ डालें?
नवरात्रि पर सबसे पहले स्नान कर जहां मां भगवती और कलश को स्थापित करना है, उस स्थान को साफ करें। गंगा जल से जगह को पवित्र कर लें। एक चौकी रखें। उसके ऊपर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाकर मां भगवती की तस्वीर या प्रतिमा की स्थापित करें। कलश स्थापना के लिए सबसे पहले मिट्टी के पात्र में जौ बोएं। अब मिट्टी का कलश अच्छे से धो लें। इसमें पहले पानी भर ले।
उसके बाद थोड़ा सा गंगा जल डाले। फिर एक हल्दी की गांठ, सुपारी, लोंग का जोड़ा, इलायची, अक्षत के कुछ दाने, एक सिक्का, घी, गाय का कच्चा दूध और कुमकुम डालें। इसके बाद कलश के ऊपर आम के 5 पत्ते लगाए और ढक्कन रख दें। अब इस ढक्कन में साबुत चावल रखे। इसके बाद इसके उपर पान का पत्ता, सुपारी, लोंग का जोड़ा, एक सिक्का और नारियल रखें और इसे मां के सामने स्थापित करें।
राहुकाल या फिर रात के समय नहीं करें घटस्थापना
सही दिशा में रखें नारियल- घटस्थापना के दौरान घट के ऊपर नारियल भी रखा जाता है। हालांकि, नारियल आपको इस तरह से रखना चाहिए कि उसका मुख (तीन आंख वाला भाग) ऊपर आसमान या नीचे जमीन की ओर न हो। नारियल को हमेशा इस तरह से रखें कि उसका मुख साधक की ओर रहे। सही मुहूर्त का रखें ध्यान- घट को सही समय पर आपको स्थापित करना चाहिए।
राहुकाल या फिर रात के समय घट को स्थापित करने पर पूजा के बाद भी आपको शुभ फल नहीं मिलते। शारदीय नवरात्रि में घटस्थापना के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 19 मिनट से 10 बजकर 12 मिनट तक है। इसके साथ ही अभिजीत मुहूर्त में सुबह 11 बजकर 37 मिनट से दोपहर 12 बजकर 24 मिनट तक भी आप घट स्थापित कर सकते हैं।
यह भी पढ़ें: 9 अक्टूबर 2026 राशिफल: इन 5 राशियों की चमकेगी किस्मत, ग्रहों की चाल से धन लाभ के बनेंगे योग!