Bihar News: बिहार में हवाई कनेक्टिविटी बढ़ाने से लेकर रोजगार के नए अवसर पैदा करने तक, राज्य सरकार ने कई अहम फैसले लिए हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में पांच नए एयरपोर्ट और नौ हेलीपोर्ट बनाने समेत 24 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इसके साथ ही पटना में राज्य का पहला टेक पार्क बनाने और अनुसूचित जाति बहुल 3,021 गांवों के विकास पर 634.41 करोड़ रुपये खर्च करने का फैसला भी लिया गया है।

छपरा, किशनगंज और बेगूसराय समेत इन 5 जिलों में बनेंगे एयरपोर्ट
बिहार में हवाई सेवाओं का विस्तार करने के लिए पांच स्थानों पर नए एयरपोर्ट बनाए जाएंगे। मंत्रिमंडल से मंजूरी मिलने के बाद किशनगंज, छपरा, उलाव (बेगूसराय), फारबिसगंज (अररिया) और सबैया (गोपालगंज) में एयरपोर्ट निर्माण की योजना आगे बढ़ेगी। इसके अलावा, राज्य के नौ आकांक्षी जिलों में हेलीपोर्ट बनाए जाएंगे। इनमें औरंगाबाद, बांका, जमुई, कटिहार, खगड़िया, नवादा, शेखपुरा, बेगूसराय और सीतामढ़ी शामिल हैं। सरकार का उद्देश्य राज्य के ज्यादा से ज्यादा क्षेत्रों को हवाई सेवाओं से जोड़ना है, ताकि लोगों को आवागमन में सुविधा मिले और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ावा दिया जा सके।

यात्रियों को मिलेगी मुफ्त पिकअप-ड्रॉप की सुविधा
नई हवाई सेवा व्यवस्था के तहत यात्रियों को नजदीकी शहर तक मुफ्त पिकअप और ड्रॉप की सुविधा देने का भी प्रावधान है। इससे एयरपोर्ट या हेलीपोर्ट तक पहुंचना यात्रियों के लिए आसान हो सकता है। परियोजनाओं की लागत का 25 प्रतिशत राज्य सरकार वहन करेगी। उड़ानों के संचालन के दौरान प्रचार-प्रसार पर सालाना 10 लाख रुपये खर्च करने का भी प्रावधान है। इसके अतिरिक्त करों में छूट, परिचालन खर्च में सहायता और उड़ानों के लिए निर्धारित वित्तीय सहयोग दिया जाएगा। इन प्रोत्साहनों का उद्देश्य हवाई सेवाओं के संचालन को बढ़ावा देना और उन क्षेत्रों में कनेक्टिविटी विकसित करना है, जहां अभी हवाई यात्रा के विकल्प सीमित हैं।

कितना होगा खर्च?
बिहार सरकार ने अनुसूचित जाति बहुल 3,021 गांवों के विकास के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में 634.41 करोड़ रुपये खर्च करने की मंजूरी दी है। यह राशि प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना के तहत खर्च की जाएगी। योजना के लिए पात्र गांवों में अनुसूचित जाति की आबादी कम से कम 40 प्रतिशत और कुल आबादी 500 या उससे अधिक होनी चाहिए। इन गांवों में पेयजल, स्वच्छता, शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, आवास, सड़क, बिजली और स्वच्छ ईंधन जैसी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत किया जाएगा। इसके साथ कृषि पद्धतियों, वित्तीय समावेशन, डिजिटलीकरण, आजीविका, सामाजिक सुरक्षा और कौशल विकास पर भी काम किया जाएगा। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं को एक साथ जोड़कर विकास कार्यों को आगे बढ़ाने की योजना है।

पटना के गर्दनीबाग में बनेगा बिहार का पहला टेक पार्क
बिहार में आईटी सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए पटना के गर्दनीबाग में राज्य का पहला टेक पार्क बनाया जाएगा। इसके निर्माण और विकास की जिम्मेदारी नेशनल बिल्डिंग्स कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन (NBCC) को दी जाएगी। राज्य मंत्रिमंडल ने इस परियोजना के लिए सूचना प्रौद्योगिकी विभाग और NBCC के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर करने की मंजूरी दी है।

100 से ज्यादा कंपनियों के निवेश की उम्मीद, 5 हजार रोजगार का लक्ष्य
टेक पार्क परियोजना में 100 से अधिक कंपनियों के निवेश की संभावना जताई गई है। इससे 5,000 से ज्यादा प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। राज्य सरकार को उम्मीद है कि इस परियोजना से बिहार में आईटी क्षेत्र का विस्तार होगा और युवाओं को अपने ही प्रदेश में रोजगार के नए विकल्प मिलेंगे। इससे रोजगार के लिए दूसरे राज्यों की ओर होने वाले पलायन को कम करने में भी मदद मिल सकती है। सरकार के मुताबिक, टेक पार्क बिहार आईटी नीति-2024 और बिहार जीसीसी नीति-2026 के तहत निवेश आकर्षित करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

कनेक्टिविटी, गांवों का विकास और रोजगार पर जोर
मंत्रिमंडल के इन फैसलों में हवाई कनेक्टिविटी बढ़ाने, बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करने और तकनीकी क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने पर जोर दिया गया है। एयरपोर्ट और हेलीपोर्ट से क्षेत्रीय आवागमन को बढ़ावा देने की उम्मीद है, जबकि गांवों के विकास और टेक पार्क से जुड़ी योजनाओं का लक्ष्य बुनियादी सुविधाओं तथा रोजगार के अवसरों को मजबूत करना है। हालांकि, इन परियोजनाओं का वास्तविक लाभ निर्माण कार्यों की प्रगति, उड़ानों के संचालन और निवेश व रोजगार से जुड़े लक्ष्यों के जमीन पर लागू होने पर निर्भर करेगा।

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