वाशिंगटन: पाकिस्तान में गरीबी और विकास के बीच का अंतर एक बार फिर चर्चा में है। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) की नई रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान की 38.3 प्रतिशत आबादी बहुआयामी गरीबी का सामना कर रही है। इसका मतलब है कि देश में बड़ी संख्या में लोगों को स्वास्थ्य, शिक्षा और बेहतर जीवन जीने के लिए जरूरी सुविधाएं पर्याप्त रूप से नहीं मिल पा रही हैं।
क्या कहती है UNDP की रिपोर्ट?
UNDP की 2026 ग्लोबल मल्टीडायमेंशनल पॉवर्टी इंडेक्स (MPI) रिपोर्ट 12 अक्टूबर को जारी हुई। इसमें दुनिया के 108 देशों में गरीबी की स्थिति का आकलन किया गया है। रिपोर्ट में गरीबी को केवल कम कमाई तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि यह भी देखा गया है कि लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजमर्रा की बुनियादी सुविधाएं कितनी मिल रही हैं।
पाकिस्तान में 38.3 प्रतिशत आबादी बहुआयामी गरीबी से प्रभावित पाई गई। वहीं, इस श्रेणी में आने वाले लोगों के बीच अभाव की औसत तीव्रता 51.7 प्रतिशत दर्ज की गई। इसका मतलब है कि गरीबी का सामना कर रहे परिवारों को कई जरूरी सुविधाओं की कमी एक साथ झेलनी पड़ती है।
भारत और बांग्लादेश से भी की गई तुलना
रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार, पाकिस्तान में बहुआयामी गरीबी का स्तर भारत और बांग्लादेश के मुकाबले अधिक दर्ज किया गया। भारत में यह आंकड़ा 16.4 प्रतिशत और बांग्लादेश में 14.9 प्रतिशत रहा।
हालांकि, इन देशों के आंकड़े अलग-अलग वर्षों में किए गए घरेलू सर्वेक्षणों पर आधारित हैं। इसलिए इनकी तुलना करते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि सभी देशों का डेटा एक ही समय का नहीं है।
गरीबी का मतलब सिर्फ पैसों की कमी नहीं
बहुआयामी गरीबी का मतलब है कि किसी परिवार को एक साथ कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा हो। इसमें बच्चों की पढ़ाई छूटना, पर्याप्त पोषण न मिलना, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच की कमी और साफ पानी या बिजली जैसी सुविधाओं का अभाव शामिल हो सकता है।
ऐसी परिस्थितियों में परिवारों के लिए अपनी आर्थिक स्थिति सुधारना और बच्चों को बेहतर भविष्य देना मुश्किल हो जाता है। शिक्षा और स्वास्थ्य की कमी का असर आगे चलकर रोजगार के अवसरों पर भी पड़ सकता है।
विकास की राह में बड़ी चुनौती
UNDP की रिपोर्ट बताती है कि गरीबी को कम करने के लिए सिर्फ आर्थिक विकास पर्याप्त नहीं है। लोगों तक शिक्षा, स्वास्थ्य और जरूरी सुविधाएं पहुंचाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। पाकिस्तान के लिए इन क्षेत्रों में सुधार करना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
रिपोर्ट के आंकड़े यह भी दिखाते हैं कि किसी देश की विकास स्थिति को समझने के लिए केवल उसकी अर्थव्यवस्था या लोगों की आय देखना काफी नहीं है। यह जानना भी जरूरी है कि आम लोगों को बेहतर जीवन जीने के लिए जरूरी सुविधाएं मिल रही हैं या नहीं।
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