नई दिल्ली: पाकिस्तान ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि सऊदी अरब और तुर्की के साथ हाल ही में हुए नए रक्षा समझौते के तहत यमन के हूती विद्रोहियों के खिलाफ तत्काल कोई सैन्य कार्रवाई नहीं की जाएगी। हालांकि, पाकिस्तान ने कहा कि यह समझौता भविष्य में व्यापक रक्षा सहयोग के लिए एक ढांचा उपलब्ध कराता है।
पाकिस्तान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सज्जाद हैदर खान ने कहा कि फिलहाल मक्का संयुक्त रक्षा समझौते के तहत हूतियों के खिलाफ किसी तरह की सैन्य कार्रवाई पर चर्चा नहीं हो रही है। हालांकि, इस्लामाबाद रक्षा और सुरक्षा से जुड़े मामलों में सऊदी अरब के साथ करीबी समन्वय जारी रखे हुए है।
प्रवक्ता ने कहा कि अगर परिस्थितियां इसकी मांग करती हैं तो पाकिस्तान समझौते के तहत कार्रवाई करेगा। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि समझौते को लागू होने में समय लगेगा और तीनों देशों के बीच रक्षा सहयोग के नए आयाम धीरे-धीरे सामने आएंगे।
यह स्पष्टीकरण ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा हुआ है और हूतियों की ओर से सऊदी अरब को निशाना बनाकर नए हमले किए गए हैं। पाकिस्तान पहले ही ईरान से अपील कर चुका है कि वह हूतियों पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल करे और सऊदी अरब के खिलाफ आगे होने वाले हमलों को रोके।
क्या है मक्का समझौता?
पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच हुआ मक्का समझौता सामूहिक रक्षा और प्रतिरोध क्षमता को मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया है।
समझौते के तहत तीनों देशों में से किसी एक पर सशस्त्र हमला होने की स्थिति को तीनों देशों पर हमला माना जाएगा।
हालांकि, इस्लामाबाद ने लगातार यह स्पष्ट किया है कि यह समझौता मूल रूप से रक्षात्मक प्रकृति का है। इसका मतलब यह नहीं है कि सऊदी अरब से जुड़े हर सुरक्षा संकट में पाकिस्तान की सेना स्वतः सैन्य हस्तक्षेप करेगी।
पाकिस्तान ने सऊदी अरब में अपनी मौजूदा सैन्य मौजूदगी का भी उल्लेख किया। उसके मुताबिक, पाकिस्तानी सैनिक पहले से ही सऊदी अरब में प्रशिक्षण और लॉजिस्टिक सहायता के लिए तैनात हैं। यह दोनों देशों के लंबे समय से चले आ रहे रक्षा सहयोग का हिस्सा है।
धीरे-धीरे बढ़ेगा रक्षा सहयोग
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि नए समझौते को एक व्यापक ढांचे के रूप में देखा जाना चाहिए, जिसके तहत भविष्य में अतिरिक्त रक्षा तंत्र और सहयोग विकसित किए जा सकते हैं।
तीनों देशों ने समझौते को संस्थागत रूप देना भी शुरू कर दिया है। इसके तहत Strategic Political and Defence Committee का गठन किया गया है।
पाकिस्तान के इस ताजा रुख से उन अटकलों पर विराम लगने की संभावना है कि सऊदी अरब पर हूतियों के ताजा हमलों के बाद इस्लामाबाद तुरंत यमन संघर्ष में कूद सकता है।
फिलहाल हूतियों के खिलाफ ऑपरेशन नहीं
फिलहाल पाकिस्तान का संदेश साफ है-मक्का समझौता जरूरत पड़ने पर सामूहिक कार्रवाई का रास्ता जरूर खोलता है, लेकिन हूतियों के खिलाफ किसी सैन्य अभियान पर अभी विचार नहीं किया जा रहा है।
इससे पाकिस्तान के लिए एक तरफ सऊदी अरब के साथ रक्षा प्रतिबद्धता बनाए रखना संभव होगा, वहीं दूसरी तरफ यमन संघर्ष में तत्काल सीधे सैन्य रूप से शामिल होने से भी बचा जा सकेगा।
यह भी पढ़ें: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का भारत दौरा, BRICS समिट में PM मोदी से करेंगे मुलाकात