नई दिल्ली: भारत इस साल BRICS समिट 2026 की अध्यक्षता कर रहा है और इसी के तहत राजधानी दिल्ली में 18वीं BRICS समिट का आयोजन किया जा रहा है। वही नई दिल्ली में आयोजित होने वाली BRICS समिट में हिस्सा लेने के लिए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का भारत दौरा प्रस्तावित है। यह यात्रा इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि 2019 के बाद यह उनका पहला भारत दौरा होगा। वे करीब सात साल बाद भारत आने की तैयारी में हैं। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच भारत मंडपम में द्विपक्षीय बैठक भी हो सकती है। यह बैठक भारत-चीन रिश्तों के लिहाज से काफी अहम मानी जा रही है।

सम्मेलन में ब्रिक्स देशों के शीर्ष नेता एक मंच पर नजर आएंगे। वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार, ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा, बहुपक्षीय सहयोग और बदलते अंतरराष्ट्रीय समीकरण जैसे मुद्दे बैठक के केंद्र में रह सकते हैं।

12-13 सितंबर को दिल्ली में BRICS समिट
BRICS समिट का आयोजन 12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में किया जा रहा है। इसकी थीम "Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability" रखी गई है। साथ ही भारत की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में सदस्य देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक सहयोग बढ़ाने को लेकर चर्चा होगी। शी जिनपिंग का इस सम्मेलन में शामिल होना भारत और चीन के रिश्तों के लिहाज से खास माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच पिछले कुछ वर्षों में सीमा विवाद और अन्य मुद्दों को लेकर तनाव रहा है। ऐसे में जिनपिंग का भारत आना दोनों देशों के रिश्तों में आगे की दिशा तय करने के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है।

2019 के बाद पहली बार भारत आएंगे शी जिनपिंग
अगर यह दौरा तय कार्यक्रम के मुताबिक होता है तो शी जिनपिंग करीब सात साल बाद भारत की यात्रा करेंगे। इससे पहले वह अक्टूबर 2019 में चेन्नई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिले थे। उस समय दोनों नेताओं के बीच भारत-चीन संबंधों और द्विपक्षीय सहयोग को लेकर बातचीत हुई थी। इसके बाद 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों के रिश्तों में बड़ा तनाव पैदा हुआ।

मोदी-जिनपिंग मुलाकात पर क्यों है सबकी नजर?
BRICS समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बैठक होने की संभावना सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक हो सकती है। अगर दोनों नेताओं की आमने-सामने बातचीत होती है तो इसमें भारत-चीन सीमा, व्यापार, आर्थिक संबंध और दोनों देशों के बीच तनाव कम करने जैसे मुद्दे उठ सकते हैं। भारत और चीन एशिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार काफी बड़ा है, लेकिन लंबे समय से व्यापार असंतुलन और रणनीतिक चिंताएं भी भारत के लिए अहम मुद्दे रहे हैं। ऐसे में दोनों नेताओं की बातचीत का असर आर्थिक और कूटनीतिक रिश्तों पर भी पड़ सकता है।

BRICS में किन मुद्दों पर होगी चर्चा?
BRICS अब केवल आर्थिक सहयोग का मंच नहीं रह गया है। वैश्विक राजनीति में इसका महत्व लगातार बढ़ा है। समिट के दौरान सदस्य देशों के बीच कई अहम मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।

* वैश्विक अर्थव्यवस्था और व्यापार
* विकासशील देशों के लिए वित्तीय सहयोग
* ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा
* तकनीक और डिजिटल सहयोग
* वैश्विक दक्षिण की भूमिका
* बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार
* अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा
* सदस्य देशों के बीच व्यापार और निवेश

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह दौरा?
शी जिनपिंग का भारत दौरा ऐसे समय हो रहा है जब दुनिया में भू-राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। अमेरिका-चीन संबंधों में तनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध और वैश्विक व्यापार में बदलाव के बीच भारत की भूमिका भी लगातार महत्वपूर्ण हो रही है। ऐसे में एक ही मंच पर भारत, चीन और रूस जैसे प्रमुख देशों के नेताओं की मौजूदगी दुनिया का ध्यान खींचेगी। खासकर मोदी-जिनपिंग बातचीत से यह संकेत मिल सकता है कि दोनों देश आने वाले समय में अपने रिश्तों को किस दिशा में ले जाना चाहते हैं।

हालांकि, शी जिनपिंग के दौरे को लेकर अंतिम आधिकारिक कार्यक्रम और दोनों नेताओं की संभावित द्विपक्षीय बैठक की पुष्टि का इंतजार रहेगा। लेकिन अगर जिनपिंग भारत आते हैं, तो यह सात साल बाद उनकी पहली भारत यात्रा होगी और BRICS समिट के साथ-साथ भारत-चीन रिश्तों के लिए भी बड़ा कूटनीतिक घटनाक्रम साबित हो सकता है।

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