India-America Defence Ties: भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग लगातार अहम होता जा रहा है। दोनों देश सैन्य तकनीक, रक्षा उपकरणों, समुद्री सुरक्षा और आधुनिक युद्ध प्रणालियों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर काम कर रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या भारत-अमेरिका की यह साझेदारी भारतीय सेना की ताकत बढ़ाने और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में अहम भूमिका निभा सकती है?

यूनाइटेड स्टेट्स पैसिफिक कमांड (USPACOM) के कमांडर, एडमिरल सैमुअल पापरो ने अंडमान और निकोबार कमांड (ANC) के कमांडर-इन-चीफ, वाइस एडमिरल विनीत मैककार्टी के साथ बैठक की। इस बैठक में दोनों देशों की रक्षा सेनाओं के बीच लगातार सहयोग पर चर्चा हुई। गौरतलब है कि इस डील से पाक-चीन जैसे देशों की नींद उड़ सकती है।

India-America Defence Ties भारत के लिए साबित होगा गेमचेंजर

भारत में अमेरिकी दूतावास ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर जानकारी देते हुए लिखा, "अमेरिका-भारत की अहम रक्षा साझेदारी लगातार आगे बढ़ रही है! जापान जाते समय, USPACOM के कमांडर एडमिरल पापारो ने AN_Command के कमांडर-इन-चीफ, वाइस एडमिरल विनीत मैक्कार्थी (AVSM) से मुलाकात की और हमारी रक्षा सेनाओं के बीच लगातार सहयोग पर चर्चा की।

यह देखकर बहुत अच्छा लगता है कि हमारी साझेदारी और मजबूत हो रही है, क्योंकि हम मिलकर एक सुरक्षित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं"।

रक्षा सहयोग से भारत को क्या होगा फायदा?

भारत लंबे समय से अपनी सैन्य जरूरतों के लिए अलग-अलग देशों से रक्षा उपकरण खरीदता रहा है। अब देश का जोर स्वदेशी उत्पादन, तकनीक हस्तांतरण और घरेलू कंपनियों की भागीदारी बढ़ाने पर भी है। अमेरिका के साथ सहयोग इन लक्ष्यों को आगे बढ़ाने का एक रास्ता बन सकता है।

आधुनिक निगरानी प्रणाली, मानवरहित विमान, सैन्य संचार और समुद्री क्षेत्र की निगरानी में बेहतर तकनीक मिलने से भारतीय सेनाओं की परिचालन क्षमता मजबूत हो सकती है। हालांकि, इसका वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि किन परियोजनाओं पर समझौते होते हैं और उनमें भारत को तकनीक तथा उत्पादन से जुड़ी कितनी भागीदारी मिलती है।

बता दें कि हिंद महासागर में भारत लगातार अपने पैर पसारने में लगा हुआ है। जिससे भारत की रक्षता को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

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