काठमांडू: नेपाल ने मंगलवार को पहली बार ‘Gen-Z शहीद दिवस’ मनाया। यह दिन 8 और 9 सितंबर 2025 को हुए Gen-Z आंदोलन में मारे गए युवाओं की याद में आयोजित किया गया।
काठमांडू के बनेश्वर इलाके में आयोजित स्मृति समारोह में आंदोलन के दौरान घायल हुए लोग, मृतकों के परिवार और उनके करीबी शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत मृत आत्माओं की शांति के लिए मंत्रोच्चार के साथ हुई। इसके बाद शहीद हुए युवाओं की तस्वीरों के सामने दीप जलाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।
‘यह सिर्फ छुट्टी नहीं, बलिदान की याद है’
समारोह में शामिल लोगों ने कहा कि Gen-Z शहीद दिवस को केवल सार्वजनिक अवकाश के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह युवाओं के बलिदान, सुशासन, जवाबदेही और बेहतर भविष्य के संकल्प का प्रतीक होना चाहिए।
पिछले साल के आंदोलन में शामिल रहे किरण बीके ने कहा कि मौजूदा सरकार अभी तक Gen-Z आंदोलन की भावना को पूरी तरह लागू नहीं कर पाई है। उन्होंने सरकार की क्षमता और कामकाज पर सवाल उठाते हुए कहा कि युवाओं की उम्मीदों के मुताबिक बदलाव अभी बाकी हैं।
आंदोलन में गई थी 77 लोगों की जान
8 और 9 सितंबर 2025 को हुए Gen-Z आंदोलन ने नेपाल की राजनीति में बड़ा बदलाव ला दिया था। इस प्रदर्शन के दौरान कम से कम 77 लोगों की मौत हुई थी।
आंदोलन के दबाव के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को पद छोड़ना पड़ा था और संसद भंग कर अंतरिम सरकार का गठन किया गया था।
युवाओं के लिए गर्व और दर्द का दिन
Gen-Z आंदोलन में शामिल कई युवाओं ने इस दिन को गर्व और दर्द दोनों से जुड़ा बताया।
समारोह में पहुंची आस्था श्रेष्ठ ने कहा कि उस दिन की याद आज भी डर और दर्द से भरी हुई है। उन्होंने बताया कि आंदोलन के दौरान हर तरफ अफरा-तफरी, डर और लोगों की चीखें थीं।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि आंदोलन के बाद नेपाल में राजनीतिक बदलाव की उम्मीद बनी है, लेकिन सरकार के कामकाज से पूरी तरह संतुष्टि अभी नहीं है।
सरकार ने 45 लोगों को घोषित किया था शहीद
अंतरिम सरकार ने 3 नवंबर 2025 को आंदोलन में मारे गए 45 लोगों को शहीद घोषित किया था। इनमें 42 लोगों को “Gen-Z Governance Warriors” और तीन पुलिसकर्मियों को सम्मान दिया गया था।
इसके बाद नेपाली कैलेंडर के अनुसार भद्रा 23 यानी 8 सितंबर को हर साल Gen-Z Martyrs’ Day के रूप में मनाने का फैसला किया गया।
नेपाल की राजनीति में आया बड़ा बदलाव
Gen-Z आंदोलन के बाद नेपाल में बड़ा राजनीतिक संकट पैदा हुआ। पुलिस कार्रवाई, गोलीबारी और प्रशासनिक फैसलों को लेकर सवाल उठे।
रिपोर्ट के मुताबिक, काठमांडू घाटी में मारे गए कई प्रदर्शनकारियों की मौत गोली लगने से हुई थी। आंदोलन के बाद तत्कालीन गृह मंत्री रमेश लेखक ने भी पद से इस्तीफा दे दिया था।
कई दिनों की चर्चा के बाद पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री बनाया गया, जिन्होंने संसद भंग करने और 5 मार्च को चुनाव कराने की सिफारिश की।
नेपाल में पहली बार मनाया गया Gen-Z शहीद दिवस अब युवाओं की ताकत, राजनीतिक बदलाव और जवाबदेही की मांग का प्रतीक बन गया है।
यह भी पढ़ें: Prince Harry Latest News: प्रिंस हैरी और मेगन की शाही स्थिति में कोई बदलाव नहीं! किंग चार्ल्स ने फिर किया साफ