नई दिल्ली: दिल्ली सरकार अगले एक से दो महीने में पेइंग गेस्ट (PG) आवासों को नियंत्रित करने के लिए नई नीति लाने जा रही है। दिल्ली के शहरी विकास मंत्री आशीष सूद ने मंगलवार को इसकी जानकारी दी।
सत्य निकेतन में PG बिल्डिंग हादसे के बाद सरकार ने यह कदम उठाने का फैसला किया है। इस हादसे में सात लोगों की मौत हो गई थी, जिसके बाद दिल्ली में छात्रों के रहने वाले किराये के मकानों और PG की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे थे।
PG संचालकों पर लागू होंगे नए नियम
आशीष सूद ने कहा कि प्रस्तावित Paying Guest Accommodation Regulation and Safety Bill, 2026 के तहत PG आवासों को व्यवस्थित और सुरक्षित बनाने पर जोर दिया जाएगा।
नई नीति में कई बड़े प्रावधान शामिल होने की उम्मीद है-
- PG के लिए अनिवार्य लाइसेंस व्यवस्था
- जोन के हिसाब से किराया तय करने की व्यवस्था
- बिल्डिंग की संरचनात्मक और फायर सेफ्टी जांच
- किराया, सुविधाओं और सुरक्षा मानकों की जानकारी देने के लिए केंद्रीकृत पोर्टल
मंत्री ने कहा कि छात्रों और उनके अभिभावकों को यह पता होना चाहिए कि वे किस सुविधा के लिए कितना भुगतान कर रहे हैं और वह जगह सुरक्षा मानकों पर खरी उतरती है या नहीं।
छात्रों ने बताईं अपनी समस्याएं
दिल्ली के विभिन्न विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों और NSS स्वयंसेवकों के साथ बातचीत के दौरान छात्रों ने PG और किराये के मकानों से जुड़ी कई समस्याएं उठाईं।
छात्रों ने शिकायत की कि कई जगह—
- मनमाने बिजली बिल वसूले जाते हैं
- किराये के समझौतों का पालन नहीं किया जाता
- किराया बहुत ज्यादा लिया जाता है
- सुरक्षा जांच की व्यवस्था कमजोर है
छात्रों के लिए सस्ते आवास की तैयारी
सरकार विश्वविद्यालयों के हॉस्टलों के लिए FAR (Floor Area Ratio) बढ़ाने और खाली सरकारी इमारतों को छात्र आवास में बदलने पर भी विचार कर रही है।
इसका उद्देश्य छात्रों को सुरक्षित और किफायती रहने की सुविधा उपलब्ध कराना है।
नीति बनाने से पहले होगी सभी पक्षों से चर्चा
आशीष सूद ने कहा कि नई PG नीति को अंतिम रूप देने से पहले छात्रों, अभिभावकों, PG संचालकों और नागरिक एजेंसियों से सुझाव लिए जाएंगे।
उन्होंने बताया कि इस प्रस्तावित नीति को लेकर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू के साथ भी चर्चा हो चुकी है।
सत्य निकेतन हादसे के बाद बढ़ी कार्रवाई
सत्य निकेतन इमारत हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने प्रमुख छात्र इलाकों जैसे साउथ कैंपस और मुखर्जी नगर में संरचनात्मक ऑडिट के आदेश दिए हैं।
सरकार का कहना है कि छात्रों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और छात्र आवास के रूप में इस्तेमाल हो रही सभी इमारतों को सुरक्षा मानकों का पालन करना होगा।
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