UPI Tax controversy: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र की मोदी सरकार पर (UPI) से जुड़े लेनदेन पर संभावित शुल्क को लेकर जोरदार हमला बोला है। खरगे ने आरोप लगाया कि पहले से ही महंगाई से परेशान आम जनता पर डिजिटल पेमेंट्स टैक्स का अतिरिक्त बोझ डालकर उनकी बचत को खत्म करने की योजना बनाई जा रही है।

UPI लेनदेन पर टैक्स और खरगे के आरोप

मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर पोस्ट साझा करते हुए कहा कि मोदी सरकार की नजर अब UPI लेनदेन पर भी टिक गई है। उनके अनुसार, 'No fees on UPI' की नीति को बदलकर अब ₹2,000 से अधिक के लेनदेन पर संभावित शुल्क लगाने की बात की जा रही है। खरगे का कहना है कि जहां थोक महंगाई पहले से ही 10% के करीब पहुंच रही है, वहीं डिजिटल पेमेंट्स पर शुल्क लगाना जनता की बची-कुची बचत को खत्म करने जैसा है।

नोटबंदी और कैशलैस इकोनॉमी पर तंज

खरगे ने 10 साल पहले हुई नोटबंदी का जिक्र करते हुए सरकार की नीतियों के विरोधाभास पर सवाल उठाए: 

नोटबंदी का उद्देश्य: सरकार ने दावा किया था कि नोटबंदी का मुख्य उद्देश्य देश में डिजिटल पेमेंट्स और कैशलेस इकोनॉमी को बढ़ावा देना है।

नीतियों में बदलाव: खरगे का आरोप है कि जब जनता ने कैशलैस लेनदेन को अपना लिया, तब सरकार उन पर अतिरिक्त शुल्क लगाकर झटका दे रही है।

MDR और आम उपभोक्ता पर वित्तीय असर

संसद में वित्त मंत्री के बयानों का हवाला देते हुए खरगे ने सवाल उठाया कि एक तरफ सरकार दावा करती है कि UPI पर कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं लगेगा, वहीं दूसरी ओर मीडिया रिपोर्टों के अनुसार ₹5,000 और ₹10,000 के लेनदेन पर संभावित वसूली की बातें सामने आ रही हैं।

ये भी पढ़ें: ईरान डील के लिए बेताब? ट्रंप का दावा, युद्ध के बाद गिरेगी तेल की कीमत!

उन्होंने स्पष्ट किया कि मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) का बोझ सीधे तौर पर व्यापारियों पर पड़ेगा, जिसे व्यापारी वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें बढ़ाकर आम जनता से ही वसूलेंगे। खरगे के अनुसार, राहत देने के बजाय सरकार रोज आम आदमी की जेब पर डाका डालने के नए रास्ते खोज रही है।