भारत में UPI को लेकर एक बार फिर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि अमेरिका के दबाव में भारत के सबसे लोकप्रिय डिजिटल पेमेंट सिस्टम UPI पर ट्रांजैक्शन चार्ज लगाने का रास्ता खोला जा रहा है। राहुल गांधी ने इसे देश के छोटे दुकानदारों और आम लोगों के लिए चिंता का विषय बताया है।

राहुल गांधी का आरोप है कि सरकार UPI के मौजूदा Zero-MDR मॉडल को बदलने की दिशा में आगे बढ़ रही है। MDR यानी Merchant Discount Rate वह शुल्क है, जो डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने वाले मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर पेमेंट सिस्टम से जुड़े पक्षों को दिया जाता है। अभी UPI पर ज्यादातर छोटे और सामान्य डिजिटल पेमेंट के लिए ऐसा शुल्क नहीं लिया जाता।

अमेरिका का दबाव क्यों आया चर्चा में?

दरअसल, UPI के बढ़ते इस्तेमाल और भारत के डिजिटल पेमेंट मॉडल को लेकर अमेरिका की कुछ बड़ी पेमेंट कंपनियों की अपनी व्यावसायिक रुचि है। भारत में UPI के जरिए हर दिन करोड़ों लेनदेन होते हैं और इसकी लागत कम रखने वाला मॉडल दुनिया के दूसरे देशों से अलग है।
राहुल गांधी का आरोप है कि अमेरिकी कंपनियों के दबाव के चलते सरकार UPI पर शुल्क लगाने की दिशा में दरवाजा खोल रही है। उनका कहना है कि अगर भविष्य में बड़े मर्चेंट पेमेंट पर शुल्क लगाया जाता है तो इसका असर अंततः ग्राहकों पर भी पड़ सकता है।

राहुल गांधी ने क्या कहा?

राहुल गांधी ने सरकार पर निशाना साधते हुए इसे अमेरिका के दबाव से जोड़ दिया है। उनका कहना है कि सरकार का यह फैसला अमेरिका के कुछ बड़े कम्पनियो के खातिर लिया जा रहा हैं जो कि आम लोगो की जेबों पर सीधा असर डालेगी साथ ही उनका दावा है कि अगर UPI पर शुल्क लगाने की व्यवस्था आती है तो इसका असर छोटे व्यापारियों और आम ग्राहकों पर भी पड़ सकता है।

क्या अभी UPI पर चार्ज लग गया है?

यह बात समझना बेहद जरूरी है कि अभी ऐसा कोई फैसला लागू नहीं हुआ है कि आम यूजर को हर UPI पेमेंट पर चार्ज देना होगा। ₹2,000 तक के UPI लेनदेन को शुल्क से सुरक्षित रखने की व्यवस्था जारी है। वहीं ₹2,000 से ऊपर के कुछ मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR की संभावित व्यवस्था को लेकर चर्चा चल रही है। यानी अगर आप किसी दोस्त या परिवार के सदस्य को UPI से पैसे भेजते हैं तो इस पर नया चार्ज लागू होने की बात नहीं है। चर्चा मुख्य रूप से मर्चेंट यानी दुकानदार और कारोबारियों को किए जाने वाले बड़े UPI पेमेंट को लेकर है।

सरकार और बैंकों के सामने क्या चुनौती है?

UPI का इस्तेमाल बढ़ने के साथ बैंकों और पेमेंट कंपनियों पर भी ट्रांजैक्शन प्रोसेस करने की लागत आती है। अभी इस सिस्टम को बनाए रखने के लिए सरकार की ओर से इंसेटिव समेत अलग-अलग व्यवस्थाएं हैं। ऐसे में बड़े ट्रांजैक्शन पर MDR लागू करने की चर्चा का एक तर्क सिस्टम की लागत और पेमेंट इन्फ्रास्ट्रक्चर को टिकाऊ बनाना भी है। हालांकि, अभी यह तय नहीं है कि कितना शुल्क लिया जाएगा, किन कारोबारियों पर लागू होगा और इसका बोझ आखिरकार कौन उठाएगा। यही वजह है कि UPI चार्ज को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है।

फिलहाल सबसे अहम बात यही है कि UPI पर कोई नया सार्वभौमिक चार्ज लागू नहीं हुआ है। अभी बहस इस बात पर है कि भविष्य में बड़े मर्चेंट ट्रांजैक्शन के लिए MDR की व्यवस्था लाई जाए या नहीं और अगर लाई जाती है तो उसका ढांचा क्या होगा।

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