नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट एक बार फिर पूरी दुनिया के लिए चिंता का बड़ा कारण बन गया है। दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में शामिल इस स्ट्रेट से तेल की आवाजाही पर संकट के बावजूद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा दावा किया है। ट्रंप का कहना है कि होर्मुज से तेल गुजर रहा है और अमेरिका इस पूरे रास्ते की सुरक्षा में बड़ी भूमिका निभा रहा है। अब उनका कहना है कि इस सुरक्षा का खर्च अमेरिका अकेले क्यों उठाए, दूसरे देशों को भी इसकी भरपाई करनी चाहिए।

ट्रंप ने क्या कहा?

ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर कहा कि होर्मुज स्ट्रेट से तेल गुजर रहा है। उन्होंने उन देशों पर निशाना साधा, जिन्हें उनके मुताबिक अमेरिका की सुरक्षा व्यवस्था का फायदा मिल रहा है लेकिन उन्होंने इस संकट के दौरान अमेरिका की मदद नहीं की। ट्रंप ने यह भी कहा कि ऐसे देशों को युद्ध खत्म होने के बाद अमेरिका को उस खर्च की भरपाई करनी चाहिए जो होर्मुज की सुरक्षा में किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका कई पीढ़ियों से दूसरों के लिए खुद से ज्यादा काम करता आया है।

होर्मुज में आखिर चल क्या रहा है?

होर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी और अरब सागर के बीच तेल परिवहन का बेहद अहम रास्ता है। यहां तनाव बढ़ने का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ता है। हालिया संघर्ष के बीच इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों की संख्या सामान्य स्तर के मुकाबले काफी कम हुई है।
रॉयटर्स की 15 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार को सिर्फ चार कमोडिटी जहाज होर्मुज से गुजरे, जबकि उससे एक दिन पहले यह संख्या 10 थी। युद्ध से पहले यहां रोजाना औसतन करीब 125 जहाजों की आवाजाही होती थी। यानी मौजूदा स्थिति में समुद्री यातायात बुरी तरह प्रभावित है।

तेल की सप्लाई पर कितना असर?

होर्मुज के रास्ते में किसी भी तरह की लंबी रुकावट का असर सिर्फ खाड़ी देशों पर नहीं बल्कि पूरी दुनिया के तेल बाजार पर पड़ सकता है। इस मार्ग से वैश्विक कच्चे तेल और एलएनजी की बड़ी मात्रा गुजरती है। ऐसे में जहाजों की आवाजाही कम होने से तेल की कीमतों और सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ रही है।
15 सितंबर की रिपोर्टों के मुताबिक ब्रेंट क्रूड 108 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ था। अगर तनाव और बढ़ता है और तेल की आवाजाही लंबे समय तक बाधित रहती है तो दुनिया के कई देशों में ईंधन की कीमतों पर दबाव और बढ़ सकता है।

अमेरिका क्यों मांग रहा है पैसे?

ट्रंप का तर्क है कि अमेरिकी सेना जिस सुरक्षा व्यवस्था के जरिए वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने की कोशिश कर रही है, उसका फायदा कई दूसरे देशों को भी मिल रहा है। ऐसे में अमेरिका पर इसका पूरा आर्थिक बोझ नहीं होना चाहिए। व्हाइट हाउस ने इससे पहले भी दावा किया था कि अमेरिकी सेनाओं ने होर्मुज में शिपिंग लेन को सुरक्षित करने के लिए कार्रवाई की है और बड़ी संख्या में वाणिज्यिक जहाजों को अमेरिकी सुरक्षा के तहत गुजरने में मदद मिली है।
हालांकि मौजूदा स्थिति यह दिखाती है कि तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। होर्मुज में जहाजों की आवाजाही अभी भी सामान्य स्तर से काफी नीचे है और क्षेत्र में सैन्य एवं कूटनीतिक तनाव जारी है।

दुनिया पर पड़ेगा सीधा असर

होर्मुज संकट जितना लंबा चलेगा, उसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर उतना ही ज्यादा पड़ सकता है। तेल महंगा होने पर परिवहन, बिजली, उद्योग और रोजमर्रा की कई चीजों की लागत बढ़ सकती है। यही वजह है कि दुनिया की नजर फिलहाल अमेरिका-ईरान तनाव और होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति पर टिकी है।

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