UP Link Expressway: उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे नेटवर्क के विस्तार की दिशा में जेवर लिंक एक्सप्रेसवे परियोजना को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। गंगा और यमुना एक्सप्रेसवे को जोड़ने के लिए प्रस्तावित 74.3 किलोमीटर लंबे लिंक एक्सप्रेसवे के निर्माण की प्रक्रिया को गति देने की तैयारी है।
यूपी कैबिनेट ने चार लिंक एक्सप्रेसवे परियोजनाओं के लिए कुल 17,542 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भूमि अधिग्रहण और अन्य विकास कार्यों की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को प्रक्रिया पूरी कर निर्माण शुरू कराने के निर्देश दिए हैं।
गंगा-यमुना एक्सप्रेसवे को जोड़ेगा 74.3 किमी लंबा कॉरिडोर
जेवर लिंक एक्सप्रेसवे का निर्माण उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) की ओर से किया जाना प्रस्तावित है। करीब 74.3 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर यमुना एक्सप्रेसवे पर फिल्म सिटी के नजदीक से शुरू होकर बुलंदशहर जिले में स्याना के पास गंगा एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा।
इस लिंक एक्सप्रेसवे के तैयार होने से दोनों प्रमुख एक्सप्रेसवे के बीच सीधा संपर्क स्थापित होगा। इससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सड़क कनेक्टिविटी बेहतर होने और यात्रियों को लंबी दूरी की यात्रा में सुविधा मिलने की उम्मीद है।
भूमि अधिग्रहण का काम लगभग पूरा, 33 एकड़ जमीन बाकी
परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया महत्वपूर्ण है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) क्षेत्र में करीब 95 प्रतिशत भूमि खरीदी जा चुकी है। प्राधिकरण के जिम्मे लगभग 740 एकड़ जमीन खरीदने का काम था, जिसमें से करीब 33 एकड़ भूमि की खरीद बाकी बताई गई है।
बुलंदशहर जिला प्रशासन और यमुना प्राधिकरण भूमि खरीद की प्रक्रिया में जुटे हैं। वहीं, यूपीडा की ओर से निर्माण के लिए पहले ही टेंडर जारी किए जाने की जानकारी दी गई है। शेष भूमि की खरीद और जरूरी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद निर्माण कार्य आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
चार लिंक एक्सप्रेसवे परियोजनाओं को मिली मंजूरी
फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे: पैकेज-1 और पैकेज-2
आगरा-लखनऊ से पूर्वांचल एक्सप्रेसवे लिंक: दोनों एक्सप्रेसवे को जोड़ने वाली परियोजना
झांसी लिंक एक्सप्रेसवे: पैकेज-1 और पैकेज-2
जेवर लिंक एक्सप्रेसवे: पैकेज-1 और पैकेज-2
इन परियोजनाओं का उद्देश्य प्रदेश के पश्चिमांचल, मध्यांचल और पूर्वांचल क्षेत्रों के बीच सड़क संपर्क को बेहतर बनाना है। इससे लखनऊ और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र तक आवागमन अधिक सुगम और सुरक्षित बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
तीन साल में निर्माण पूरा करने का लक्ष्य
इन परियोजनाओं का निर्माण विकासकर्ताओं के चयन के बाद लगभग तीन वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। निर्माण पूरा होने के बाद पांच वर्षों तक इनके रखरखाव की व्यवस्था भी की जाएगी। परियोजनाओं के निर्माण और अनुरक्षण पर होने वाला संभावित खर्च राज्य सरकार वहन करेगी।
उपलब्ध विवरण के मुताबिक, इस प्रस्ताव में केंद्र सरकार की वित्तीय भागीदारी शामिल नहीं है। विकासकर्ताओं का चयन न्यूनतम वित्तीय प्रस्ताव प्रस्तुत करने वाले निविदाकर्ताओं के आधार पर किया गया है। निर्माण कार्य इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) पद्धति के तहत कराया जाएगा। इस व्यवस्था में निर्माण की निर्धारित गुणवत्ता और समयसीमा सुनिश्चित करने पर जोर रहेगा।
जेवर एयरपोर्ट और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मिल सकता है लाभ
जेवर लिंक एक्सप्रेसवे के तैयार होने से गंगा और यमुना एक्सप्रेसवे के बीच संपर्क बेहतर होगा। इससे जेवर एयरपोर्ट और आसपास के विकसित हो रहे क्षेत्रों तक सड़क मार्ग से पहुंचने के विकल्पों को भी लाभ मिल सकता है। हालांकि, यात्रियों को वास्तविक सुविधा और यात्रा समय में कितना बदलाव मिलेगा, यह अंतिम मार्ग, प्रवेश बिंदुओं और परियोजना के पूरा होने पर निर्भर करेगा।
फिलहाल, भूमि अधिग्रहण पूरा करने, निर्माण संबंधी औपचारिकताएं आगे बढ़ाने और विकासकर्ताओं के चयन के बाद काम शुरू होने की प्रक्रिया पर नजर रहेगी। यदि तय समयसीमा के अनुसार परियोजना पूरी होती है, तो यह उत्तर प्रदेश के एक्सप्रेसवे नेटवर्क में एक महत्वपूर्ण कड़ी बन सकती है।