दिल्ली: दिल्ली-NCR में बढ़ते वायु प्रदूषण ने चिंता बढ़ा दी है। AQI 300 के पार पहुंचने के बीच प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए GRAP-1 के नियमों को लेकर चर्चा तेज है। इसके तहत सड़कों की धूल, निर्माण स्थलों, कूड़ा जलाने और वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर निगरानी बढ़ाई जाती है। जानिए GRAP-1 में क्या-क्या नियम हैं और आम लोगों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

मुख्य बातें

  • GRAP-1 में प्रदूषण कम करने के उपायों पर जोर।
  • निर्माण स्थलों पर धूल रोकने के नियमों का पालन जरूरी।
  • खुले में कूड़ा और पत्तियां जलाने पर रोक।
  • प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की जांच और कार्रवाई।
  • सड़कों की सफाई और धूल नियंत्रण के उपाय।
  • GRAP-1 में सभी निजी गाड़ियों या निर्माण कार्यों पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं।

 

GRAP-1 में किन चीजों पर होती है सख्ती?

1. निर्माण स्थलों पर धूल रोकना जरूरी

निर्माण और तोड़फोड़ वाली जगहों पर धूल उड़ने से रोकने के उपाय करने होते हैं। निर्माण सामग्री को ढककर रखना और तय नियमों का पालन करना जरूरी है।

2. सड़कों की धूल पर नियंत्रण

सड़कों की नियमित सफाई, जरूरत के अनुसार पानी का छिड़काव और धूल उड़ने वाले क्षेत्रों पर निगरानी जैसे कदम उठाए जाते हैं।

3. खुले में कूड़ा जलाने पर कार्रवाई

कूड़ा, पत्तियां और अन्य अपशिष्ट खुले में जलाने पर रोक है। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

4. प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर नजर

वाहनों से निकलने वाले धुएं की जांच की जाती है। प्रदूषण प्रमाणपत्र (PUC) के नियमों का पालन नहीं करने वाले वाहनों पर कार्रवाई हो सकती है।

5. जनरेटर और औद्योगिक इकाइयों की जांच

नियमों के मुताबिक प्रतिबंधित या प्रदूषण मानकों का उल्लंघन करने वाले जनरेटर और औद्योगिक इकाइयों पर कार्रवाई की जा सकती है।

6. निर्माण सामग्री ढोने वाले वाहनों पर निगरानी

रेत, मिट्टी और अन्य निर्माण सामग्री ले जाने वाले वाहनों को ढककर रखना जरूरी है, ताकि रास्ते में धूल न फैले।

क्या GRAP-1 में गाड़ियों और निर्माण कार्यों पर पूरी तरह रोक है?

GRAP-1 लागू होने का मतलब सभी निजी गाड़ियों को बंद करना या हर निर्माण कार्य पर पूरी तरह रोक लगाना नहीं है। इस चरण में प्रदूषण कम करने के लिए मौजूदा नियमों का पालन सख्ती से कराया जाता है। प्रदूषण की स्थिति और आधिकारिक आदेशों के आधार पर GRAP के अगले चरणों में अतिरिक्त पाबंदियां लगाई जा सकती हैं।

AQI 300 पार होने का क्या मतलब है?

AQI यानी वायु गुणवत्ता सूचकांक हवा में प्रदूषण के स्तर को बताता है। भारत में 301 से 400 के बीच AQI को ‘बहुत खराब’ श्रेणी में रखा जाता है। ऐसी हवा में लंबे समय तक रहने से सांस लेने में परेशानी हो सकती है, खासकर बच्चों, बुजुर्गों और सांस या हृदय संबंधी बीमारियों से जूझ रहे लोगों को।

प्रदूषण से बचने के लिए क्या करें?

- प्रदूषण अधिक होने पर बाहर व्यायाम करने से बचें।
- सांस लेने में परेशानी होने पर चिकित्सकीय सलाह लें।
- बच्चों और बुजुर्गों को अधिक प्रदूषित वातावरण में लंबे समय तक रहने से बचाएं।
- अपने क्षेत्र का AQI देखकर बाहर जाने की योजना बनाएं।

दिल्ली-NCR में AQI 300 पार होने के बीच GRAP-1 के नियमों को समझें। जानें निर्माण स्थलों, सड़कों की धूल, कूड़ा जलाने और वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर क्या कार्रवाई होती है और खराब हवा से बचने के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।