नई दिल्ली: दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए शुरू की गई कार्रवाई के पहले ही दिन बड़ी संख्या में वाहनों के खिलाफ कदम उठाए गए। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कुल 68 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया, जबकि करीब 1,500 गाड़ियों को दिल्ली की सीमाओं से ही वापस लौटा दिया गया।

बॉर्डर पर वाहनों की सख्त जांच

रिपोर्ट्स के मुताबिक, रविवार शाम 5 बजे तक के आंकड़े के मुताबिक, PUCC नियमों को तोड़ने पर 56.6 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। वहीं, प्रतिबंध के बावजूद दिल्ली में एंट्री करने वाले वाहनों पर 2 लाख रुपये और निर्माण और तोड़फोड़ वाली जगहों पर धूल रोकने के नियमों का पालन नहीं करने पर 9.8 लाख रुपये का पर्यावरण मुआवजा लगाया गया।

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस सोशल मीडिया, रेडियो आदि संचार माध्यमों के जरिए लोगों को GRAP नियमों के बारे में जागरूक कर रही है। इसके अलावा, दिल्ली की सीमाओं पर प्रदुषण को लेकर जागरूकता से जुड़े बोर्ड भी लगाए गए हैं। ट्रैफिक पुलिस भी GRAP नियमों में पालन को लेकर सख्ती बरत रही है।

BS-VI मानक से पुराने वाहनों पर लगी पाबंदी

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस का कहना है कि GRAP नियमों का पालन कराने के लिए वह आगे भी कार्रवाई करेगी। दिल्ली के बाहर से आने वाले BS-VI मानक से पुराने वाहनों पर लगी पाबंदी के तहत ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग ने 14,930 वाहनों की जांच की। इनमें से लगभग 10.31% वाहनों को दिल्ली में एंट्री नहीं करने दी गई और उन्हें बॉर्डर से ही वापस भेज दिया गया। इस दौरान 127 चालान काटे गए और 62 वाहनों को जब्त किया गया।

68 लाख रुपये का जुर्माना, आगे भी जारी रहेगी कार्रवाई

कार्रवाई के पहले दिन ही 68 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। प्रशासन की ओर से प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर निगरानी बढ़ाई जा रही है। इस अभियान के तहत जांच और कार्रवाई लगातार जारी रहने की उम्मीद है।

दिल्ली में सर्दियों की शुरुआत के साथ वायु गुणवत्ता खराब होने की समस्या गंभीर हो जाती है। वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल और अन्य प्रदूषणकारी गतिविधियां हवा की गुणवत्ता को प्रभावित करती हैं। ऐसे में वाहनों की जांच और नियमों का पालन सुनिश्चित करना प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

सिविल निर्माण पर 31 जनवरी तक रोक

धूल उड़ाने वाली तोड़फोड़ और बाहरी सिविल निर्माण भी 1 नवंबर से 31 जनवरी तक बंद रहने वाले हैं. कुछ जरूरी सार्वजनिक परियोजनाओं को तय शर्तों पर छूट मिलेगी. घर के अंदर की फिनिशिंग, प्लंबिंग और बिजली का काम धूल रोकने के मानकों का पालन हो तो चल सकता है. 

पार्किंग फीस भी 1 नवंबर से 28 फरवरी तक दोगुनी रहेगी. यह दिल्ली भर के अधिकृत पार्किंग स्थलों पर लागू होगी, पर दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन की पार्किंग को छूट रहेगी सरकारी और निजी दफ्तरों में 1 नवंबर से 31 जनवरी तक 50 फीसदी कर्मचारी ही दफ्तर आएंगे, बाकी घर से काम करेंगे

आम लोगों को प्रदूषण से राहत दिलाने की कोशिश

दिल्ली में प्रदूषण का असर लोगों की सेहत पर भी पड़ता है। खराब हवा के कारण सांस लेने में परेशानी, आंखों में जलन और सांस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। खासतौर पर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से सांस की बीमारी से जूझ रहे लोगों को अधिक सावधानी बरतने की जरूरत होती है।

हालांकि, केवल वाहनों की जांच से प्रदूषण की समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी। इसके लिए निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल, कचरा जलाने और अन्य प्रदूषणकारी गतिविधियों पर भी प्रभावी नियंत्रण जरूरी है। अब देखना होगा कि प्रशासन की यह सख्ती आने वाले दिनों में दिल्ली की हवा की गुणवत्ता सुधारने में कितनी कारगर साबित होती है।

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