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'RSS हजार सिर वाला जहरीला सांप...', कर्नाटक के मंत्री यतींद्र सिद्धारमैया का बड़ा बयान
Karnataka News: सोमवार 17 अगस्त को कर्नाटक के मंत्री यतींद्र सिद्धारमैया ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर निशाना साधा।
Karnataka News: सोमवार 17 अगस्त को कर्नाटक के मंत्री यतींद्र सिद्धारमैया ने RSS पर निशाना साधा। अपने बयान में यतींद्र सिद्धारमैया ने आरएसएस को सांप्रदायिकता और जातिवाद से प्रेरित 'हजार सिर वाला जहरीला सांप' बताया। साथ ही कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से स्पष्ट माफी की मांग की। इसी कड़ी में कर्नाटका के गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सार्वजनिक रूप से इस सौ साल पुराने संगठन की कानूनी स्थिति, संपत्ति में पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल उठाए।
'RSS हजारों सिर वाले जहरीले सांप की तरह'
आगे उन्होंने कहा कि RSS हज़ारों सिर वाले जहरीले सांप की तरह है। यह जातिवाद, सांप्रदायिकता और मनुवाद के जहर से भरा हुआ है। यह ऐसा सांप है जो जहर उगलता है और पूरे समाज में जहर घोलना चाहता है। अगर हमने इसे नहीं रोका, तो हमारा समाज बर्बाद हो जाएगा और हमारे देश को भी नुकसान पहुंचेगा।
यतींद्र सिद्धारमैया 'शुद्धिकरण' का मुद्दा भी उठाया
उन्होंने यह भी मांग की कि RSS, BJP और श्री राम सेना, उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष की जनसभा के बाद एक जगह पर किए गए कथित 'शुद्धिकरण' के लिए मल्लिकार्जुन खड़गे से सार्वजनिक रूप से माफ़ी मांगें। यतींद्र सिद्धारमैया ने कहा, RSS, BJP और श्री राम सेना को हमारे कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से सार्वजनिक रूप से माफ़ी मांगनी चाहिए।
जब तक वे ऐसा नहीं करते, हमें यह विरोध जारी रखना चाहिए और हार नहीं माननी चाहिए। मैं अपने सभी कांग्रेस कार्यकर्ताओं से आंदोलन जारी रखने की अपील करता हूं। जो लोग जागरूक हैं और मानते हैं कि जाति व्यवस्था को खत्म किया जाना चाहिए, उन्हें RSS की घटिया सोच की निंदा करनी चाहिए और इसके खिलाफ़ विरोध करना चाहिए।
कर्नाटक के गृह मंत्री ने भी RSS पर उठाए सवाल
सिद्धारमैया के बयानों के साथ-साथ, कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर BJP महासचिव बी.एल. संतोष से RSS की कानूनी स्थिति के बारे में सवाल किया। खड़गे ने ज़ोर देकर कहा कि संवैधानिक लोकतंत्र में राष्ट्रीय स्तर पर प्रभाव रखने के लिए पूरी पारदर्शिता ज़रूरी है। "सवाल अस्तित्व का नहीं, बल्कि जवाबदेही का है। अगर RSS को अपना 'अस्तित्व साबित करने' के लिए किसी रजिस्ट्रेशन की ज़रूरत नहीं है, तो देश को यह तो बताए कि उसका कानूनी दर्जा क्या है?
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कानूनी तौर पर RSS का गठन कौन करता है? उसकी संपत्ति का मालिक कौन है? उसके बैंक खाते किसके नाम पर चलते हैं? चंदा किस तरह लिया जाता है और उसका हिसाब-किताब कैसे रखा जाता है? उसके ऑडिट किए गए खाते और कानूनी खुलासे कहां हैं? एक सदी पुरानी संस्था, जिसका देश भर में इतना बड़ा प्रभाव है, उसे इन बुनियादी सवालों का जवाब देने में सक्षम होना चाहिए।
'RSS किस कानून और कानूनी ढांचे के तहत काम करती है'
'हमारा अस्तित्व है' कहना इस सवाल का जवाब नहीं है कि 'आप किसके प्रति जवाबदेह हैं?' और कानूनी पारदर्शिता की जगह इतिहास नहीं ले सकता। संवैधानिक लोकतंत्र में, कोई संस्था जितनी बड़ी और प्रभावशाली होती है, उसमें पारदर्शिता की ज़रूरत उतनी ही ज़्यादा होती है, कम नहीं,' खड़गे ने कहा। कर्नाटक के मंत्री ने आगे इस बात पर ज़ोर दिया कि RSS के अस्तित्व पर किसी को शक नहीं है, कर्नाटक सरकार बस यह पूछ रही है कि यह संस्था किस कानून और कानूनी ढांचे के तहत काम करती है।
Written By: Geeta Sharma
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