Patna Muzaffarpur Rapid Rail: बिहार में तेज रफ्तार और बेहतर क्षेत्रीय कनेक्टिविटी की दिशा में बड़ा कदम आगे बढ़ा है। पटना से मुजफ्फरपुर के बीच सेमी हाई स्पीड रैपिड रेल कॉरिडोर बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। अगर यह योजना तय दिशा में आगे बढ़ती है तो फिलहाल डेढ़ से दो घंटे में पूरा होने वाला पटना-मुजफ्फरपुर का सफर भविष्य में एक घंटे से भी कम समय में पूरा किया जा सकेगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (NCRTC) ने काम शुरू कर दिया है। राज्य सरकार ने उसे वैकल्पिक विश्लेषण रिपोर्ट (AAR) और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने की जिम्मेदारी दी है।

पहले पता चलेगा कहां है सबसे ज्यादा यात्रियों का दबाव
NCRTC की टीम ने शुरुआती काम शुरू कर दिया है। सबसे पहले यह अध्ययन किया जा रहा है कि पटना-मुजफ्फरपुर के बीच किन इलाकों से सबसे ज्यादा यात्री सफर करते हैं और भविष्य में कहां यात्रियों की संख्या बढ़ सकती है। यात्रियों की संभावित संख्या और ट्रैफिक पैटर्न के आधार पर रूट, स्टेशन और ठहराव तय किए जाएंगे। इसके साथ ही जमीन की जरूरत, निर्माण तकनीक, परियोजना की लागत और दूसरी तकनीकी जरूरतों का भी आकलन होगा। यानी अभी अंतिम रूट और स्टेशनों पर मुहर नहीं लगी है। AAR और DPR तैयार होने के बाद परियोजना की तस्वीर और स्पष्ट होगी।

हाजीपुर के रास्ते जुड़ेंगे पटना और मुजफ्फरपुर
प्रस्तावित योजना में पटना-हाजीपुर-मुजफ्फरपुर के बीच अलग RRTS कॉरिडोर विकसित करने की बात है। यह सामान्य रेलवे या मेट्रो से अलग क्षेत्रीय परिवहन व्यवस्था होगी, जिसका मकसद आसपास के शहरों को तेज गति से जोड़ना है। अगर यह कॉरिडोर बनता है तो पटना, हाजीपुर और मुजफ्फरपुर के बीच रोजाना नौकरी, कारोबार, शिक्षा और दूसरे कामों के लिए आने-जाने वाले लोगों को बड़ा फायदा मिल सकता है।

बस, रेलवे और पटना मेट्रो से जुड़ेगा RRTS
परियोजना की योजना केवल तेज ट्रेन चलाने तक सीमित नहीं है। यात्रियों को एक जगह से दूसरी जगह आसानी से पहुंचाने के लिए RRTS को बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, पटना मेट्रो और दूसरे सार्वजनिक परिवहन साधनों से जोड़ने की संभावनाएं भी देखी जा रही हैं। इसका मतलब यह होगा कि यात्री ट्रेन से उतरने के बाद दूसरे साधन के लिए लंबा सफर या अलग व्यवस्था करने के बजाय एकीकृत परिवहन नेटवर्क का इस्तेमाल कर सकेंगे।

कैबिनेट से मिल चुकी है मंजूरी
बिहार कैबिनेट ने जुलाई में राज्य में RRTS के चार कॉरिडोर के लिए AAR और DPR तैयार करने को मंजूरी दी थी। इनमें मुजफ्फरपुर-हाजीपुर-पटना कॉरिडोर भी शामिल है। इन रिपोर्टों को तैयार करने के लिए करीब 31.59 करोड़ रुपये के बजट को भी मंजूरी दी गई है। अब NCRTC को परियोजना की तकनीकी संभावनाओं का अध्ययन करने और रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है।

160 किमी प्रति घंटे तक की रफ्तार
RRTS की सबसे बड़ी खासियत इसकी रफ्तार है। इस तरह की रैपिड ट्रेनें अधिकतम करीब 160 किलोमीटर प्रति घंटे की गति तक चल सकती हैं, जबकि औसत परिचालन गति करीब 100 किलोमीटर प्रति घंटे तक हो सकती है। पटना और मुजफ्फरपुर के बीच दूरी को देखते हुए इस सेवा के शुरू होने पर दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय काफी कम हो सकता है। अभी सड़क या सामान्य रेल परिवहन से सफर में करीब डेढ़ से दो घंटे लगते हैं।

तीन बड़े शहरों और औद्योगिक हब को मिलेगा फायदा
बता दें कि इससे पटना, हाजीपुर, मुजफ्फरपुर जैसे तीन बड़े शहर जुड़ जाएंगे. पटना राज्य की राजधानी और बड़ा प्रशासनिक-व्यावसायिक केंद्र है। हाजीपुर वैशाली क्षेत्र का प्रमुख औद्योगिक और परिवहन केंद्र है, जबकि मुजफ्फरपुर उत्तर बिहार का बड़ा कारोबारी और शैक्षणिक शहर है। कॉरिडोर को भविष्य में प्रस्तावित सोनपुर एयरपोर्ट से जोड़ने की संभावना भी देखी जा सकती है।

अगर परियोजना DPR और आगे की मंजूरियों के बाद जमीन पर उतरती है, तो इसका असर सिर्फ यात्रा का समय घटने तक सीमित नहीं रहेगा। पटना, हाजीपुर और मुजफ्फरपुर के बीच रोजगार, कारोबार, शिक्षा और औद्योगिक गतिविधियों की आवाजाही तेज होने से पूरे उत्तर बिहार की कनेक्टिविटी को नई रफ्तार मिल सकती है। 

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