गांधीनगर: गुजरात सरकार ने दिवाली के त्योहार को देखते हुए राज्य की जेलों में बंद कैदियों को बड़ी राहत देने का फैसला किया है। सरकार 143 पात्र कैदियों को 15 दिनों की पैरोल देने जा रही है। इस फैसले के बाद योग्य कैदी कुछ समय के लिए जेल से बाहर आकर अपने परिवार के साथ दिवाली का त्योहार मना सकेंगे। सरकार की इस पहल को त्योहार के मौके पर कैदियों को परिवार से मिलने और सामाजिक जीवन से जुड़ने का अवसर देने के तौर पर देखा जा रहा है।

कैदियों के कल्याण की दिशा में सरकार की पहल

गुजरात सरकार ने जेल सुधार और कैदियों के कल्याण की दिशा में पहल करते हुए राज्य की विभिन्न जेलों में सजा काट रहे 143 पात्र कैदियों को दिवाली के अवसर पर 15 दिन की पैरोल देने की मंजूरी दी है। इस निर्णय का उद्देश्य कैदियों को अपने परिवारों के साथ दिवाली का त्योहार मनाने का अवसर प्रदान करना है। राज्य सरकार के अनुसार, उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी के मार्गदर्शन में यह निर्णय लिया गया है। सरकार की कैदी कल्याण पहल और जेल सुधार कार्यक्रम के तहत पात्र कैदियों को त्योहार के दौरान परिवार के साथ समय बिताने का अवसर दिया जाएगा।

143 कैदियों को 15 दिन की मिलेगी पैरोल

सरकार के फैसले के मुताबिक, गुजरात की जेलों में बंद 143 योग्य कैदियों को 15 दिनों के लिए पैरोल दी जाएगी। हालांकि, यह सुविधा राज्य के सभी कैदियों को नहीं मिलेगी। इसका लाभ केवल उन्हीं कैदियों को दिया जाएगा, जो पैरोल के लिए निर्धारित नियमों और पात्रता की शर्तों को पूरा करते हैं।

पैरोल के दौरान कैदियों को कुछ समय के लिए जेल से बाहर रहने की अनुमति मिलती है। इस अवधि में वे अपने परिवार के साथ समय बिता सकते हैं। हालांकि, उन्हें पैरोल से जुड़ी सभी शर्तों और प्रशासन की ओर से दिए गए निर्देशों का पालन करना होगा।

महिला कैदियों और 60 वर्ष से अधिक पुरुष कैदियों को पैरोल का लाभ

गुजरात सरकार वर्ष 2003 से प्रत्येक साल दिवाली के अवसर पर पात्र कैदियों को 15 दिन की पैरोल देती आ रही है। इस नीति के तहत पात्र महिला कैदियों और 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के पुरुष कैदियों को परिवार के साथ त्योहार मनाने के लिए पैरोल का लाभ दिया जाता है। सरकार की मंजूरी के बाद कुल 143 कैदियों को छह नवंबर, 2026 यानी धनतेरस से 15 दिन की पैरोल पर रिहा करने का निर्णय लिया गया है। इनमें 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के 103 पुरुष कैदी और 40 महिला कैदी शामिल हैं।

गंभीर अपराधों में शामिल कैदियों को नहीं दिया जायेगा दिवाली पैरोल

गुजरात जेल एवं सुधार विभाग के पुलिस महानिदेशक के. एल. एन. राव ने बताया कि राज्य सरकार के नियमों के अनुसार गंभीर अपराधों में शामिल कैदियों को दिवाली पैरोल का लाभ नहीं दिया जा सकता है। बयान में कहा गया है कि जिन कैदियों की अपील उच्च न्यायालय में लंबित है, उन्हें भी इस सुविधा से बाहर रखा गया है। इसके अलावा, अनिवासी भारतीय (एनआरआई) कैदियों और दूसरे राज्यों के कैदियों को भी पैरोल नहीं मिलेगी।

नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अधिनियम, टाडा और पोटा के तहत सजा काट रहे कैदी भी इस सुविधा के पात्र नहीं होंगे। आतंकवादी गतिविधियों या राज्य की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों में शामिल कैदियों को भी पैरोल नहीं दी जाएगी।

 

पैरोल की शर्तों का करना होगा पालन

पैरोल पर जेल से बाहर आने वाले कैदियों को तय नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा। उन्हें निर्धारित समय पूरा होने के बाद जेल में वापस लौटना होगा। पैरोल के दौरान किसी भी तरह की शर्त का उल्लंघन करने पर संबंधित कैदी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई हो सकती है।

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