अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीज इलाज के जरिए ठीक होने की उम्मीद करते हैं, लेकिन कई बार अस्पताल में ही ऐसे संक्रमण फैल जाते हैं, जो उनकी जान के लिए खतरा बन जाते हैं। कर्नाटक के एक निजी अस्पताल में हुई स्टडी में ऐसा ही चिंताजनक मामला सामने आया है।
संक्रमण से 30 दिनों में 118 मरीजों की मौत
यहां एसिनेटोबैक्टर बाउमानी (Acinetobacter baumannii) नाम के खतरनाक बैक्टीरिया से संक्रमित मरीजों की मौत का आंकड़ा काफी ज्यादा पाया गया। जुलाई 2021 से दिसंबर 2023 के बीच हुई इस स्टडी में 154 मरीजों के खून में यह बैक्टीरिया पाया गया। इनमें से 118 मरीजों की संक्रमण मिलने के 30 दिनों के भीतर मौत हो गई। यानी करीब 76.6 फीसदी मरीज अपनी जान गंवा बैठे।
क्या है एसिनेटोबैक्टर बाउमानी बैक्टीरिया?
एसिनेटोबैक्टर बाउमानी एक ऐसा बैक्टीरिया है, जो मुख्य रूप से अस्पतालों में संक्रमण फैलाता है। इसका खतरा खासतौर पर आईसीयू में भर्ती गंभीर मरीजों को अधिक होता है। यह फेफड़ों, खून और शरीर के दूसरे हिस्सों में संक्रमण पैदा कर सकता है।
इस बैक्टीरिया की सबसे बड़ी चिंता इसकी एंटीबायोटिक प्रतिरोधक क्षमता है। इसके कुछ प्रकार कई एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति प्रतिरोधी होते हैं। ऐसे में सामान्य दवाओं से संक्रमण को नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है और मरीज की हालत गंभीर हो सकती है।
शुरुआती सात दिनों में भी मौत का बड़ा खतरा
स्टडी के आंकड़ों के मुताबिक, 154 संक्रमित मरीजों में से 57.1 फीसदी की मौत संक्रमण के शुरुआती सात दिनों के भीतर हो गई। इसके अलावा, आधे से ज्यादा मरीजों में फेफड़ों का संक्रमण पाया गया, जबकि करीब 29 फीसदी मामलों में कैथेटर से जुड़े संक्रमण सामने आए। कैथेटर एक पतली मेडिकल नली होती है, जिसका इस्तेमाल दवा या तरल पदार्थ देने और जरूरत पड़ने पर खून निकालने के लिए किया जाता है।
संक्रमण से बचाव के लिए क्या जरूरी?
अस्पतालों में ऐसे संक्रमण रोकने के लिए साफ-सफाई और हाथों की स्वच्छता बेहद जरूरी है। मेडिकल उपकरणों को नियमित रूप से संक्रमणमुक्त करना चाहिए। खासकर आईसीयू और वेंटिलेटर पर भर्ती मरीजों की देखभाल में अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों को संक्रमण नियंत्रण के सभी नियमों का पालन करना चाहिए। साथ ही, संक्रमण की समय पर जांच और उसकी एंटीबायोटिक संवेदनशीलता के आधार पर सही इलाज चुनना जरूरी है।
ये भी पढ़ें: ना उम्र की परवाह, ना लुक की चिंता! कौन हैं वृंदावन के ये सबसे चर्चित Gen Z बाबा?