मुंबई: कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को बॉम्बे हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कथित टिप्पणी को लेकर दर्ज आपराधिक मानहानि मामले को रद्द करने की राहुल गांधी की याचिका खारिज कर दी है।

बॉम्बे हाईकोर्ट के जस्टिस एन. आर. बोरकर की एकल पीठ ने कहा कि निचली अदालत के आदेश में कोई "विकृति या अवैधता" नहीं मिली है। इसके साथ ही राहुल गांधी के खिलाफ गिरगांव मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट में चल रही मानहानि की कार्यवाही जारी रहेगी।

मामला 2019 से जुड़ा है

यह मामला साल 2019 का है, जब गिरगांव मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट ने राहुल गांधी के खिलाफ प्रथम दृष्टया आपराधिक मानहानि का मामला बनता पाया था और उन्हें समन जारी किया था।

राहुल गांधी ने इसके बाद बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर इस कार्यवाही को रद्द करने की मांग की थी।

क्या है पूरा मामला?

शिकायतकर्ता और स्थानीय बीजेपी नेता महेश श्रीश्रीमल ने आरोप लगाया था कि राहुल गांधी ने 20 अगस्त 2018 को राजस्थान के जयपुर में एक रैली के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। यह भाषण राष्ट्रीय टेलीविजन चैनलों पर भी प्रसारित हुआ था।

शिकायत में राहुल गांधी के उस बयान का हवाला दिया गया जिसमें उन्होंने कहा था- "मैं देश का प्रधानमंत्री नहीं बनना चाहता, मैं देश का चौकीदार बनना चाहता हूं। और आज देश में एक नई आवाज उठ रही है... भारत का चौकीदार चोर है।"

शिकायतकर्ता का आरोप था कि यह बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला था और इससे बीजेपी कार्यकर्ताओं की प्रतिष्ठा को भी ठेस पहुंची।

2021 में मिली थी अंतरिम राहत

इस मामले में नवंबर 2021 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने राहुल गांधी को अंतरिम राहत दी थी। कोर्ट ने मजिस्ट्रेट कोर्ट की सुनवाई को अंतिम फैसला आने तक स्थगित करने का निर्देश दिया था, जिसके चलते राहुल गांधी को व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट मिली थी।

अब हाईकोर्ट द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद मानहानि मामले की आगे की सुनवाई फिर से जारी होगी।

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