patna news: बिहार के पटना में आज दारोगा अभ्यर्थियों का बड़ा प्रदर्शन देखने को मिला। प्रदर्शनकारियों ने CM आवास तक मार्च निकाला। प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों पर पटना पुलिस ने लाठीचार्ज भी किया है। पुलिस ने इस दौरान कई अभ्यर्थियों को हिरासत में भी लिया है। अभ्यर्थियों की मांग है कि तत्काल 1,799 पदों पर फिजिकल की तारीख को जारी किया जाए। Mains परीक्षा रद्द होने से गुस्साए अभ्यर्थियों ने ठोस कारण बताने और जल्द फिजिकल की तारीख जारी करने की मांग की है।
अभ्यर्थियों ने सड़कों पर किया प्रदर्शन
बिहार पुलिस में दरोगा पद पर भर्ती के लिए सैंकड़ों उम्मीदवारों ने आज गांधी मैदान से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के आधिकारिक आवास की ओर विरोध मार्च निकाला। अभ्यर्थियों ने एसआई मुख्य परीक्षा को रद्द करने के फैसले को तत्काल वापस करने और उनकी शारीरिक परीक्षा की तारीखों का ऐलान करने की मांग की है। बीते 10 दिनों से अभ्यर्थी लगातार गर्दानीबाग विरोध स्थल पर शांतिपूर्ण धरना दे रहे थे। अभ्यर्थियों ने सड़कों पर प्रदर्शन कर दावा किया कि उनकी शिकायतों को नजरअंदाज किया गया है।
अचानक रद्द की परीक्षा
जनवरी में प्रारंभिक परीक्षा और 28 मई को आयोजित मुख्य परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद, 1,799 सब-इंस्पेक्टर पदों के लिए वह बीते 4 महीनों से कठोर शारीरिक प्रशिक्षण ले रहे थे। दरअसल निर्धारित शारीरिक दक्षता परीक्षा से कुछ दिन पहले ही अधिकारियों ने कई कारणों का हवाला देकर इसे अचानक रद्द कर दिया। हमारी शारीरिक परीक्षा की तारीखें घोषित की जानी चाहिए और मुख्य परीक्षा रद्द करने का निर्णय वापस लिया जाना चाहिए। हम पिछले 4 महीनों से दौड़-भाग और प्रशिक्षण कर रहे हैं। अचानक अपरिहार्य कारणों' का हवाला देते हुए हमारी मुख्य परीक्षा रद्द कर दी गई है।
अभ्यर्थियों की क्या है मांग?
अभ्यर्थियों की मांग है कि, हमारी शारीरिक परीक्षा आयोजित करनी चाहिए और मुख्य परीक्षा रद्द करने का निर्णय वापस लेना चाहिए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि हमारी सिर्फ दो मांगें हैं, बिना किसी ठोस कारण के रद्द की गई मुख्य परीक्षा को बहाल किया जाए और हमारी शारीरिक परीक्षा की तारीखें घोषित की जाएं। लगभग 10,000 उम्मीदवार मुख्यमंत्री से सिर्फ 10 मिनट का समय मांग रहे हैं ताकि वे हमारी शिकायतें सुन सकें। यह पूरी तरह से शांतिपूर्ण मार्च है और हम अपनी सारी बातें सिर्फ मुख्यमंत्री के सामने रखेंगे।
एक सूचना में अपरिहार्य कारणों से की परीक्षा रद्द
जहानाबाद के एक उम्मीदवार आनंद मोहन सिंह ने परीक्षा रद्द करने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए और कहा कि यह निर्णय तब लिया गया जब आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) द्वारा जांच की जा रही थी। वैशाली के अभ्यर्थी गौरव कुमार ने भर्ती आयोग और जांच एजेंसी के बीच विरोधाभास का आरोप लगाया। उनका कहना है कि हमने महीनों तक कड़ी मेहनत की। हमारी शारीरिक परीक्षा नजदीक आ रही थी, और अचानक एक सूचना आई जिसमें कहा गया कि 'अपरिहार्य कारणों' से मुख्य परीक्षा रद्द कर दी गई है। ईओयू पहले से ही मामले की जांच कर रहा था, तो अंतिम जांच रिपोर्ट जमा होने से पहले परीक्षा क्यों रद्द की गई?
क्या बोले आयोग और ईओयू के अधिकारी
आयोग और ईओयू के अधिकारी मामले में विरोधाभासी कारण केंद्रों में समस्या को बता रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमने इस भर्ती प्रक्रिया में लगभग डेढ़ साल लगाया है और हम रद्द करने का फैसला जल्द वापस लेंगे। अन्य अभ्यर्थी गुड्डू कुशवाहा ने कहा कि उम्मीदवारों ने गृह सचिव, आयोग के अध्यक्ष और ईओयू डीआईजी सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की, लेकिन उन्होंने कोई सही जवाब नहीं दिया। हमने जब पूछा कि ठोस सबूत या कारण जनता के सामने रखे बगैर परीक्षा कैसे रद्द की जा सकती है?
क्या बोली महिला उम्मीदवार
उम्मीदवारों पर पड़ने वाले भावनात्मक और शारीरिक बोझ को उजागर करते हुए महिला अभ्यर्थी हेमा ने कहा कि, परीक्षा आमतौर पर कब रद्द होती है? अगर कोई गड़बड़ी या अनियमितता पाई जाती है, तो परीक्षा के तुरंत बाद उसे रद्द कर दिया जाता है? या फिर उन केंद्रों के लिए रद्द किया जाता है जहां धोखाधड़ी हुई है। परीक्षा आयोजित होने के 5 महीने बाद परिणाम घोषित होने के 4 महीने बाद और शारीरिक परीक्षा से ठीक 5 दिन पहले ऐसा नहीं होता। इस चरण में कौन परीक्षा रद्द करता है? यह अन्याय है।
पुलिस ने कई प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों को हिरासत में लिया
नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया के सदस्यों ने भी नई दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। जिसके बाद पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। आंदोलनकारी अभ्यर्थियों ने कहा कि वे तब तक अपना शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रखेंगे जब तक उनके प्रतिनिधिमंडल को सीएम से मिलने और अपना ज्ञापन सौंपने का अवसर नहीं मिलेगा।
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