Maharshtra News: भारत की पहली स्वदेशी तौर से बनाई ह्यूमन पैपिलोमावायरस HPV वैक्सीन सर्वावैक को विश्व स्वास्थ्य संगठन से पूर्ण योग्यता प्राप्त हुई है। वैक्सीन सर्वावैक का निर्माण सीरम इंस्टीटयूट ऑफ इंडिया SII ने डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी और बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन के सहयोग से विकसित हुआ है।

विदेशी वैक्सीन की तुलना में सर्वावैक काफी सस्ती और किफायती है। जिससे भारत सहित दुनिया के कई गरीब देशों में कैंसर रोकथाम अभियान को बड़ा बढ़ावा मिलेगा। सर्वावैक वैक्सीन की खुराक या इसके राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम से काफी हद तक महिलाओं को फायदा मिलेगा।

गर्भाशय ग्रीवा से बचाव करेगा टीका

सर्वावैक वैक्सीन मुख्य तौर पर गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर से बचाती है। जो महिलाओं में होने वाले सबसे आम कैंसरों में से एक है। डब्ल्यूएचओ से इस मंजूरी का मतलब है कि वैक्सीन अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों पर खरी उतरी है। अब इसे संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों और अन्य वैश्विक संगठनों के जरिए दुनिया भर के विकासशील देशों में सप्लाई किया जा सकेगा। इस नियामक उपलब्धि के साथ सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया को जैविक उत्पादों के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन से 32वीं पूर्व योग्यता प्राप्त हो गई है।

एचपीवी के हैं 4 प्रमुख स्ट्रेन

डब्ल्यूएचओ की पूर्ण योग्य टीकों की सूची में शामिल होने से सर्वावैक को संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों द्वारा वैश्विक वितरण के लिए खरीदा जा सकता है। पुनर्संयोजित चतुर्वैलेंट एचपीवी वैक्सीन एक सुरक्षात्मक टीका है, जो ह्यूमन पैपिलोमावायरस एचपीवी के चार प्रमुख स्ट्रेन है। इसमें 6, 11, 16 और 18 से होने वाले संक्रमण और कैंसर से बचाता है। इसे प्रयोगशाला में रिकॉम्बिनेंट डीएनए टेक्नोलॉजी द्वारा वायरल जैसे कणों को तैयार करके बनाया जाता है। इसमें जीवित वायरस नहीं होता है।

टीकाकरण कवरेज में योगदान

सर्वावैक को डब्ल्यूएचओ से पूर्व-योग्यता मिलना एचपीवी के खिलाफ वैश्विक प्रतिक्रिया को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम है। यह उपलब्धि देश में काफी प्रभावी रहेगी। देश में एचपीवी से संबंधित जोखिम रोकने का अवसर मिलेगा। स्वदेशी रूप से विकसित इस टीके को इस मुकाम तक पहुंचना एक छोटी उपलब्धि नहीं है। हम टीकाकरण कवरेज में योगदान देने और वैश्विक स्वास्थ सेवा को आगे बढ़ाने के लिए तत्पर हैं।

पहले ड्रग्स कंटोलर जनरल ऑफ इंडिया ने दी थी मंजूरी

भारत में इससे पहले ड्रग्स कंटोलर जनरल ऑफ इंडिया द्वारा इसके उपयोग को मंजूरी दी गई। सर्वावैक का इस्तेमाल एचपीवी के 4 प्रकारों के कारण होने वाली बीमारियों की रोकथाम के लिए किया जाता है। जैव प्रौद्योगिकी विभाग और जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद डब्ल्यूएचओ-आईएआरसी और गेट्स फाउंडेशन के सहयोग से विकसत सर्वावैक एक रिकॉमबिीनेंट क्वाड्रिवेलेंट है। एचपीवी वैक्सीन जो एचपीवी टाइप 6,11,16 और 18 को लक्षित करती है।

इन समस्याओं में मिलेगी मदद

इस टीके में लड़कों और युवा पुरुषों में गुदा कैंसर और लड़कियों और युवा महिलाओं में गर्भाशय ग्रीवा, योनी, वजाइनल और गुदा कैंसर, लड़कियों और महिलाओं में गर्भाशय ग्रीवा, योनि, वजाइनल और गुदा कैंसर की रोकथाम शामिल है। यह जननांग मस्सों की रोकथाम के लिए भी उपयोगी है।

एचपीवी के जानिए प्रकार

सर्वावैक का उपयोग 9 से 26 साल की आयु की लड़कियों और महिलाओं में एचपीवी प्रकार 16 और 18 के कारण होने वाले गर्भाशय ग्रीवा, वल्वर, योनि और गुदा कैंसर तथा एचपीवी प्रकार 6 और 11 के कारण होने वाले जननांग मस्सों की रोकथाम के लिए किया जाता है। इसका उपयोग 9 से 26 वर्ष की आयु के लड़कों और पुरुषों में एचपीवी प्रकार 16 और 18 के कारण होने वाले गुदा कैंसर तथा एचपीवी प्रकार 6 और 11 के कारण होने वाले जननांग मस्सों की रोकथाम के लिए भी किया जाता है।

मांसपेशियों में इंजेक्शन के तौर पर लगाया जाता है यह टीका

9 से 14 वर्ष की आयु के व्यक्तियों को सर्वावैक का टीका 2 खुराकों में दिया जाता है। जब्कि 15 से 26 वर्ष की आयु के व्यक्तियों को 3 खुराकों में यह टीका दिया जाता है। यह टीका मांसपेशियों में इंजेक्शन के तौर पर लगाया जाता है। सर्वावैक 0.5 मिलीलीटर की 1 खुराक वाली शीशियों और 1.0 मिलीलीटर की 2 खुराक वाली शीशियों में उपलब्ध है।

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