गुवाहाटी: मिजोरम में म्यांमार, मणिपुर और बांग्लादेश से आए करीब 40,000 विस्थापित लोगों को आश्रय दिया गया है। राज्य के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने गुरुवार को कहा कि इन लोगों की देखभाल करना राज्य के लिए एक बड़ी आर्थिक और मानवीय चुनौती है।

मुख्यमंत्री के अनुसार, सीमावर्ती क्षेत्रों की परिस्थितियों के आधार पर विस्थापित लोगों की संख्या में बदलाव होता रहता है। कुछ लोग अपने घर लौट जाते हैं, जबकि कुछ नए लोग मिजोरम में शरण लेते हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत शरणार्थी प्रोटोकॉल का हस्ताक्षरकर्ता नहीं है, इसलिए राज्य सरकार इन्हें आधिकारिक तौर पर ‘शरणार्थी’ कहने के बजाय ‘विस्थापित लोग’ कहती है।

भोजन, आवास और शिक्षा की व्यवस्था

लालदुहोमा ने बताया कि म्यांमार से हजारों लोग मिजोरम पहुंचे हैं। इसके अलावा मणिपुर और बांग्लादेश से आए कई हजार लोग भी राज्य में रह रहे हैं।

राज्य सरकार ने इन लोगों की पहचान के लिए बायोमेट्रिक प्रणाली का इस्तेमाल किया है। साथ ही, उन्हें भोजन और आश्रय उपलब्ध कराया जा रहा है। उनके बच्चों की शिक्षा की व्यवस्था भी कुछ हद तक की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन लोगों का मिजोरम में लंबे समय तक रहना क्षेत्र की भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। जब तक वे अपने घरों को लौटने में सक्षम नहीं होते, तब तक राज्य को उनके साथ रहना होगा।

उन्होंने यह भी कहा कि इन्हें स्थायी नागरिकता नहीं दी जा रही है, लेकिन मानवीय परिस्थितियों को देखते हुए जरूरतमंद लोगों को प्रवेश देने से इनकार करना मुश्किल है।

भारत-म्यांमार सीमा पर बाड़ लगाने का विरोध

मुख्यमंत्री ने भारत-म्यांमार सीमा पर बाड़ लगाने के मुद्दे पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि मिजोरम में राजनीतिक दल और गैर-सरकारी संगठन इस कदम का विरोध करते हैं, क्योंकि मिजो समुदाय के लोगों के जातीय, पारिवारिक और सांस्कृतिक संबंध भारत, म्यांमार तथा बांग्लादेश में फैले हुए हैं।

लालदुहोमा के अनुसार, ब्रिटिश शासन के दौरान मिजो समुदाय विभिन्न क्षेत्रों और देशों में बंट गया था। समुदाय के कई लोग आज भी एक साझा प्रशासनिक व्यवस्था के तहत एकजुट होने की आकांक्षा रखते हैं।

आर्थिक दबाव कम करने के लिए मितव्ययिता के कदम

मुख्यमंत्री ने राज्य की वित्तीय स्थिति पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार को पिछले शासन से कई लंबित वित्तीय देनदारियां विरासत में मिली थीं।

इन देनदारियों को चुकाने के लिए सरकार ने मितव्ययिता के उपाय अपनाए हैं। इसके तहत मंत्रियों, विधायकों और अधिकारियों को मिलने वाली कुछ सुविधाओं में कटौती की गई है।

लालदुहोमा ने दावा किया कि अब केवल कुछ देनदारियां शेष हैं और सरकार को उम्मीद है कि उन्हें इस वर्ष के अंत तक चुका दिया जाएगा।

सुरक्षा संबंधी खर्च के लिए केंद्रीय सहायता का मुद्दा

मुख्यमंत्री ने कहा कि मिजोरम को सुरक्षा संबंधी व्यय (Security Related Expenditure-SRE) के तहत वह सहायता नहीं मिली है, जो कुछ पड़ोसी राज्यों को दी जाती है। उन्होंने तर्क दिया कि राज्य में अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण स्थिति होने के कारण उसे इस सहायता के लिए पात्र नहीं माना गया।

हालांकि, उन्होंने कहा कि राज्य की समस्याओं और आवश्यकताओं के समाधान के लिए केंद्र सरकार से सहयोग मिल रहा है।

मिजोरम में विस्थापित लोगों की बढ़ती जरूरतों और सीमावर्ती क्षेत्रों की बदलती परिस्थितियों के बीच राज्य सरकार के सामने मानवीय सहायता और सीमित वित्तीय संसाधनों के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती बनी हुई है।

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