Narak Chaturdashi 2026: नरक चतुर्दशी का दिन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसे यम चतुर्दशी व छोटी दिवाली भी बोलते है। यह लक्ष्मी पूजन से पहले आता है, जो बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। इस तिथि पर यम दीपक जलाने का विधान है। तो बताते हैं इस साल नरक चतुर्दशी कब मनाई जाएगी और इस मौके पर यम देव के नाम का दीया क्यों जलाया जाता है साथ ही पूजा की सही विधि और शुभ मुर्हूत?
मुख्य तिथियां और मुहूर्त (2026)
चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: 7 नवंबर 2026 की सुबह 10:48 बजे से चतुर्दशी तिथि की शुरूआत होगी।
चतुर्दशी तिथि की समाप्त: 8 नवंबर 2026 की सुबह 11:28 बजे तक चतुर्दशी तिथि की समाप्ति होगी।
अभ्यंग स्नान (सूर्योदय से पूर्व स्नान) मुहूर्त: 8 नवंबर 2026 को सुबह 05:38 बजे से सुबह 06:40 बजे तक रहेगा।
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क्यों जलाया जाता है यम का दीपक?
छोटी दिवाली के दिन यम देव के नाम का दीपक जलाने का विधान है। इस दीपक का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नरक चतुर्दशी के दिन यम का दीपक जलाने से परिवार में अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता है। इसके साथ ही उस व्यक्ति के लिए नरक के द्वार बंद हो जाते हैं। इसके साथ ही अच्छे स्वास्थ्य का वरदान प्राप्त होता है और यम देव का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है। ऐसे में इस मौके पर यम का दीपक अवश्य जलाएं क्योंकि इसे शास्त्र में भी अनिवार्य माना गया है।
कान्हा जी मंत्र
1. ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः
2. हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे
हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे
3.कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने।
प्रणत क्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नम:
दीपावली के 5 दिवसीय महोत्सव का दूसरा दिवस नरक चतुर्दशी, जिसे छोटी दिवाली या चौदस के नाम से भी कुछ लोग जाने जाते है। आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र और शक्तिपूर्ण दिन है। यह दिवस न केवल बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है, बल्कि आत्मा के भीतर बसे अंधकार को ज्ञान और भक्ति के प्रकाश से दूर करने का संदेश भी देता है।
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जानिए पौराणिक मान्यता
हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, यह वही दिन है जब भगवान कृष्ण ने 16,000 गोपियों को बचाया था और राक्षस नरकासुर पर विजय प्राप्त की थी। दैत्य का संहार कर देवताओं और मनुष्यों को उसके अत्याचारों से मुक्त कराया था। इसीलिए इस तिथि को नरक चतुर्दशी कहा गया। वह दिन जब “नरक” अर्थात अंधकार और पाप का अंत हुआ। तभी से यह दिन बुराई, आलस्य, नकारात्मकता और अशुद्धता को दूर कर प्रकाश, पवित्रता और समृद्धि का स्वागत करने का प्रतीक बन गया।
नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर आत्मा को किया जाता है शुद्ध
इस वर्ष नरक चतुर्दशी का शुभ पर्व रविवार यानी 8 नवंबर 2026 को मनाया जा रहा है। प्रातःकाल से ही घर-आंगन में पवित्रता और उल्लास का वातावरण दिखाई देता है। शास्त्रों की माने तो इस दिन सबसे पहले सूर्योदय से पूर्व स्नान कर शरीर और मन की शुद्धि करनी चाहिए। स्नान से पूर्व तिल के तेल की मालिक करना अत्यंत शुभ माना जाता है, क्योंकि यह शरीर से नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर आत्मा को शुद्ध करता है।
पहले कर लें साफ सफाई
इसके पश्चात घर की संपूर्ण सफाई करनी चाहिए। धर्मग्रंथों के अनुसार, इस दिन घर से समस्त अशुद्धता, कबाड़, पुराने टूटे सामान, बेकार वस्तुएं और अनुपयोगी दवाइयां निकाल देना चाहिए। यह केवल भौतिक स्वच्छता नहीं, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक शुद्धि का भी प्रतीक है। जब घर से नकारात्मकता हटती है, तो उसमें लक्ष्मी का वास होता है।
जानिए कहां जलाएं पहला दीपक?
शाम के समय, जब सूर्य अस्त हो जाए, तब घर के मुख्य द्वार के दाहिनी ओर चौमुखा दीपक जलाने की परंपरा है। यह दीपक चारों दिशाओं में प्रकाश फैलाता है, जो जीवन के हर क्षेत्र में सुख, शांति और समृद्धि का संकेत देता है। मान्यता है कि यह दीपक बुराइयों और अशुभ शक्तियों को घर से दूर करता है तथा देवत्व का आह्वान करता है।
पितृ तृप्ति के लिए जलाए इस स्थान पर दीपक
रसोईघर में जहां पानी रखा जाता है, वहां एक दीपक जलाना पितृ तृप्ति का प्रतीक माना गया है। इससे पूर्वज प्रसन्न होते हैं और परिवार पर अपनी कृपा दृष्टि बनाए रखते हैं। इसी प्रकार घर के प्रत्येक कोने में दीप प्रज्वलित करने से वातावरण शुद्ध होता है और नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है।
भीतर का प्रकाश भी दमक उठता है
नरक चतुर्दशी केवल धार्मिक अनुष्ठानों का दिन नहीं, बल्कि एक आंतरिक शुद्धि और आध्यात्मिक जागरण का अवसर है। यह पर्व हमें सिखाता है कि जैसे भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का अंत कर जग में प्रकाश फैलाया, वैसे ही हमें भी अपने भीतर की अज्ञानता, ईर्ष्या, क्रोध और आलस्य का नाश कर आत्मा का प्रकाश प्रकट करना चाहिए। यही सच्ची रूप चौदस है। जब बाहरी सजावट के साथ-साथ भीतर का प्रकाश भी दमक उठे।
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