वॉशिंगटन डीसी: उइगर अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था Campaign for Uyghurs की कार्यकारी निदेशक रुशन अब्बास ने यूरोपीय विश्वविद्यालयों पर कथित चीनी दबाव को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि चीन की सरकार यूरोप के शैक्षणिक संस्थानों में चीन से जुड़े मुद्दों पर होने वाली रिसर्च और चर्चाओं को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है।

रुशन अब्बास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर Lingua Sinica की एक रिपोर्ट साझा करते हुए यह प्रतिक्रिया दी। रिपोर्ट में फ्रांस की यूनिवर्सिटी ऑफ स्ट्रासबर्ग में 2019 में शिनजियांग में चीन की नीतियों पर आयोजित एक पैनल चर्चा को कथित रूप से बाधित करने के प्रयासों का जिक्र किया गया था।

शिनजियांग पर चर्चा रोकने की कोशिश का दावा

रिपोर्ट के अनुसार, चीनी अध्ययन के एसोसिएट प्रोफेसर और कार्यक्रम के सह-आयोजक थॉमस बुटोननेट ने दावा किया कि स्ट्रासबर्ग स्थित चीनी वाणिज्य दूतावास से जुड़े चीनी प्रतिभागियों ने चर्चा के दौरान बार-बार हस्तक्षेप किया।

उन्होंने आरोप लगाया कि इन प्रतिभागियों ने ऐसे पर्चे बांटे, जिनमें शिनजियांग की स्थिति को सकारात्मक रूप में दिखाया गया था।

रिपोर्ट में कहा गया कि कार्यक्रम से पहले भी दबाव बनाने की कोशिश की गई थी। एक चीनी छात्र ने कथित तौर पर विश्वविद्यालय के फैकल्टी ऑफ लेटर्स के डीन से संपर्क कर कार्यक्रम रद्द करने की मांग की थी।

चीनी वाणिज्य दूतावास ने विश्वविद्यालय से की थी अपील

रिपोर्ट के मुताबिक, इसके बाद चीनी वाणिज्य दूतावास ने यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष से संपर्क कर शैक्षणिक चर्चा को रोकने का औपचारिक अनुरोध किया था। हालांकि, विश्वविद्यालय ने कार्यक्रम रद्द करने से इनकार कर दिया।

रुशन अब्बास ने कहा कि यह घटना दिखाती है कि चीन का प्रभाव उसकी सीमाओं से बाहर जाकर यूरोप में अकादमिक स्वतंत्रता को भी प्रभावित कर सकता है।

रिसर्च और फंडिंग को लेकर आत्म-सेंसरशिप का दावा

अब्बास ने आरोप लगाया कि रिसर्च फंडिंग, संस्थागत साझेदारी, वीजा और चीन तक पहुंच जैसे मुद्दों के कारण कई शोधकर्ता खुद पर नियंत्रण रखने लगे हैं और संवेदनशील विषयों पर खुलकर चर्चा करने से बचते हैं।

उन्होंने कहा, "मैं जानती हूं कि बीजिंग किन मुद्दों को जांच से बचाना चाहता है।"

उन्होंने इस मामले को अपनी बहन डॉ. गुलशन अब्बास से भी जोड़ा, जिनके बारे में उन्होंने दावा किया कि वह लगभग आठ वर्षों से जेल में हैं।

चीन की नीतियों और उइगर मुद्दे पर उठाए सवाल

रुशन अब्बास ने चीनी कम्युनिस्ट पार्टी पर आरोप लगाया कि वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीन की नीतियों और उइगर समुदाय से जुड़े कथित मानवाधिकार उल्लंघनों की जांच को रोकने की कोशिश कर रही है।

Lingua Sinica की रिपोर्ट में स्ट्रासबर्ग की घटना को अकादमिक बहस में कथित प्रत्यक्ष राजनयिक हस्तक्षेप के शुरुआती उदाहरणों में से एक बताया गया है।

यूरोपीय संस्थानों से स्वतंत्रता बचाने की अपील

रुशन अब्बास ने यूरोपीय विश्वविद्यालयों से अपनी स्वतंत्रता बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसी भी देश को यह तय करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए कि विश्वविद्यालयों में क्या शोध किया जाए और किन विषयों पर सार्वजनिक बहस हो।

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