Suvendu Adhikari: 2020 में टीएमसी छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए विधायक दल के नेता शुभेंदु अधिकारी ने शनिवार को पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले ली है और अब वह बंगाल के नए मुख्यमंत्री बन गए हैं। शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री अमित शाह, राजनाथ सिंह, जेपी नड्डा और धर्मेंद्र प्रधान के साथ-साथ त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा और असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा, दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता और उत्तराखंड के सीएम पुष्कर धामी शामिल हुए। खास बात यह है कि उनको बंगाल में बीजेपी का पहला सीएम होने का सौभाग्य मिला है। शुभेंदु अधिकारी बंगाल के पूर्वी मेदिनीपुर की रसूखदार परिवार से ताल्लुक रखते हैं। बात करें उनके परिवार की तो, पिता कांग्रेस से सांसद रहे जबकी भाई टीएमसी से सांसद रहे और वह खुद भी टीएमसी में मंत्री रह चुके हैं। इतना भरापूरा परिवार, अब सवाल यह है कि इतने सक्सेसफुल होने के बाद भी आखिर 55 साल के शुभेंदु ने क्यों नहीं की शादी । बता दें कि 2021 के चुनाव के दौरान एक टीवी इंटरव्यू में उन्होंने खुद बताई थी वजह।
राजनीतिक परिवार से आते हैं शुभेंदु अधिकारी
शुभेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल के पूर्वी मेदिनीपुर के एक प्रभावशाली राजनीतिक परिवार से जुड़े हैं। उनके पिता शिशिर अधिकारी कांग्रेस के सांसद रह चुके हैं, जबकि उनके भाई सौमेंदु अधिकारी भी राजनीति में सक्रिय हैं। लंबे समय से राजनीति में सक्रिय शुभेंदु अब राज्य की राजनीति में अहम चेहरा बन चुके हैं। हालांकि उनकी निजी जिंदगी को लेकर अक्सर एक सवाल चर्चा में रहता है कि उन्होंने अब तक शादी क्यों नहीं की।
छात्र राजनीति से शुरू हुआ सफर
एक पुराने टीवी इंटरव्यू में शुभेंदु अधिकारी ने बताया था कि वे साल 1987 से छात्र राजनीति से जुड़े हुए हैं। धीरे-धीरे उन्होंने खुद को पूरी तरह सार्वजनिक जीवन और राजनीति के लिए समर्पित कर दिया। उनका कहना था कि राजनीति ही उनकी प्राथमिकता बन गई और इसी रास्ते पर आगे बढ़ते हुए उन्होंने अविवाहित रहने का फैसला लिया।
स्वतंत्रता सेनानियों से मिली प्रेरणा
शुभेंदु अधिकारी ने अपने फैसले के पीछे क्षेत्र के तीन प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानियों सतीश सामंतो, सुशील धारा और अजय मुखर्जी का जिक्र किया था। उन्होंने कहा कि ये तीनों नेता अविवाहित रहे और पूरी जिंदगी जनता की सेवा में समर्पित कर दी। इन्हीं से प्रेरणा लेकर उन्होंने भी शादी न करने का निर्णय लिया।
जनता की सेवा को बनाया जीवन का लक्ष्य
शुभेंदु का मानना है कि पारिवारिक जिम्मेदारियों से दूर रहकर वे समाज और जनता के लिए ज्यादा समय दे सकते हैं। उन्होंने कहा था कि उनका उद्देश्य अपना पूरा जीवन सार्वजनिक सेवा में लगाना है। वहीं, उनके पिता शिशिर अधिकारी ने एक इंटरव्यू में बताया था कि शुरुआत में बेटे के इस फैसले से वे नाराज थे और उन्होंने शुभेंदु को डांटा भी था। बाद में उन्हें महसूस हुआ कि बेटे ने अपने सिद्धांतों और उद्देश्य को ध्यान में रखकर यह फैसला लिया है।
Written By: Namita Verma.