कई बार फोन इस्तेमाल करते समय अचानक ऐप्स अपडेट होने लगते हैं। इससे न सिर्फ काम के समय परेशानी होती है, बल्कि अगर अपडेट मोबाइल डेटा से हो रहे हों तो डेटा भी जल्दी खत्म हो सकता है। इसकी वजह आमतौर पर फोन या ऐप स्टोर की ऑटो-अपडेट सेटिंग होती है। ऐप्स को अपडेट करने का उद्देश्य केवल नए फीचर्स देना नहीं है, बल्कि तकनीकी खामियों को दूर करना, सुरक्षा मजबूत करना और नए ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ बेहतर कम्पैटिबिलिटी देना भी है। ऐसे में सवाल उठता है कि ऐप्स का ऑटो-अपडेट बंद करना चाहिए या नहीं।

ऐप्स अपने-आप अपडेट क्यों होते हैं?

ऐप डेवलपर्स समय-समय पर अपने ऐप्स के नए वर्जन जारी करते हैं। इनमें बग फिक्स, सिक्योरिटी सुधार, नए फीचर्स और परफॉर्मेंस से जुड़े बदलाव शामिल हो सकते हैं। नए Android या iOS वर्जन आने पर भी ऐप्स में जरूरी बदलाव किए जाते हैं, ताकि वे नए सॉफ्टवेयर के साथ ठीक से काम कर सकें। अगर किसी ऐप को लंबे समय तक अपडेट नहीं किया जाता, तो उसमें कुछ नए फीचर्स का सपोर्ट नहीं मिल सकता। कुछ मामलों में ऐप की परफॉर्मेंस प्रभावित हो सकती है या वह नए सिस्टम पर ठीक से काम नहीं कर सकता। हालांकि, हर अपडेट को उसी समय इंस्टॉल करना जरूरी नहीं होता और यूजर अपनी सुविधा के मुताबिक अपडेट सेटिंग बदल सकता है।

ऑटो-अपडेट बंद करने पर क्या बदलेगा?

अगर आप चाहते हैं कि ऐप्स कब अपडेट हों, इसका फैसला आप खुद करें, तो ऑटो-अपडेट बंद किया जा सकता है। इसका एक फायदा यह है कि अनचाहे समय पर मोबाइल डेटा खर्च नहीं होगा। Android फोन में Google Play Store खोलकर प्रोफाइल आइकन पर जाएं। इसके बाद Settings > Network preferences > Auto-update apps में जाकर अपनी पसंद के अनुसार सेटिंग चुनी जा सकती है। यहां ऑटो-अपडेट पूरी तरह बंद करने या केवल Wi-Fi के जरिए अपडेट करने का विकल्प मिल सकता है। मोबाइल डेटा बचाने के लिए केवल Wi-Fi पर अपडेट होने वाली सेटिंग एक संतुलित विकल्प हो सकती है। इससे ऐप्स को जरूरी अपडेट मिलते रहते हैं और मोबाइल डेटा भी अनावश्यक रूप से खर्च नहीं होता।

क्या ऑटो-अपडेट बंद करना सही है?

ऑटो-अपडेट बंद करना अपने आप में गलत नहीं है, लेकिन इसे लंबे समय तक नजरअंदाज करना जोखिम भरा हो सकता है। कुछ अपडेट खास तौर पर सुरक्षा कमजोरियों को ठीक करने के लिए जारी किए जाते हैं। ऐसे अपडेट समय पर इंस्टॉल नहीं करने पर पुराना ऐप संभावित सुरक्षा जोखिम के संपर्क में रह सकता है। इसलिए किसी अपडेट को रोकने से पहले उसके रिलीज नोट्स देखना उपयोगी है। अगर अपडेट में सिक्योरिटी पैच, जरूरी बग फिक्स या महत्वपूर्ण कम्पैटिबिलिटी सुधार दिया गया है, तो उसे ज्यादा समय तक टालने से बचना बेहतर है।

पुराने ऐप्स से क्या दिक्कत हो सकती है?

समय के साथ कई ऐप्स अपने पुराने वर्जन का सपोर्ट कम या बंद कर देते हैं। सोशल मीडिया, मैसेजिंग, स्ट्रीमिंग और क्लाउड आधारित सेवाओं में यह ज्यादा देखने को मिल सकता है, क्योंकि इन्हें लगातार बदलते सर्वर और तकनीकी जरूरतों के साथ अपडेट किया जाता है। पुराना वर्जन इस्तेमाल करने पर नए फीचर्स उपलब्ध न होने, कुछ सेवाओं के काम न करने या ऐप के बार-बार क्रैश होने जैसी समस्याएं आ सकती हैं। अगर कोई ऐप धीमा चल रहा है या लगातार परेशानी दे रहा है, तो उसका नया वर्जन इंस्टॉल करने से समस्या दूर हो सकती है। वहीं, अगर फोन का Android या iOS वर्जन इतना पुराना हो चुका है कि उसे जरूरी सुरक्षा अपडेट नहीं मिल रहे और नए ऐप्स का सपोर्ट भी लगातार खत्म हो रहा है, तो यह पुराने डिवाइस को अपग्रेड करने पर विचार करने का संकेत हो सकता है।