हरियाणा के अंबाला में कल पुलिस और सिख समुदाय के बीच हिंसक झड़प के बाद हो गई। तकरीबन 8 घंटे तक 20 किलोमीटर तक दिल्ली-चंडीगढ़ हावे पर भारी जाम लगा रहा। आपसी झड़प के दौरान एक DSP का अंगूठा कट गया और 6 से 7 पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए। प्रदर्शनकारी 'इंटरनेशनल एंटी-खालिस्तानी टेररिस्ट फ्रंट' के नेशनल प्रेसिडेंट गुरसिमरन सिंह मंड की गिरफ्तारी की मांग पर अड़े थे। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले दागे और लाठीचार्ज किया। करीब 9 बजे प्रदर्शनकारी हाईवे से हटे।
कौन है गुरसिमरन सिंह मंड जिसे लेकर हुआ विवाद?
अंबाला में बीते दिन हुए बवाल के पीछे का पूरा मामला गुरसिमरन सिंह मंड से जुड़ा है। कुछ दिन पूर्व ऐतिहासिक पंजोखरा साहिब गुरुद्वारे में गुरसिमरन सिंह मंड की पिटाई हुई थी। मंड खुद को खालिस्तान विरोधी नेता बताते हैं और इंटरनेशनल एंटी-खालिस्तानी टेररिस्ट फ्रंट के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। पुलिस ने उनकी पिटाई के बाद कुछ युवाओं के खिलाफ भी कार्रवाई की। वहीं दूसरी तरफ सिख समाज का आरोप है कि कार्रवाई एक तरफा की गई। जिसे लेकर गुरुवार को प्रदर्शन हुआ। हाईवे जाम किया गया। पुलिस से टकराव हुआ। गुरसिमरन सिंह मंड का नाम अंबाला में हुए विवाद के बाद कोई नहीं जानता था, मंड खुद को खालिस्तान विरोधी सिख नेता के तौर पर पेश करते हैं और इंटरनेशनल एंटी-खालिस्तानी टेररिस्ट फ्रंट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बताते हैं। मंड की पहचान ऐसी शख्सियत के तौर पर हुई जो खालिस्तान समर्थक विचारधारा का विरोध करते हैं। इसी वजह से कई बार उनका विरोध भी देखने को मिला। लेकिन इस बार का जो विवाद है वह पंजोखरा साहिब गुरुद्वारे में हुई घटना से शुरू हुआ।
यहां से शुरू हुआ था विवाद
7 अगस्त को गुरसिमरन सिंह मंड पंजोखरा साहिब गुरुद्वारे पहुंचे थे। जहां गुरुद्वारे के बाहर कुछ निहंगों ने उन्हें रोका था। बात बहसबाजी से शुरू हुई और फिर लाठी और धार हथियारों से हमला हुआ था। वहीं मामले में मंड का कहना था कि जब वह वहां से निकलने का प्रयास कर रहे तो मौजूदा भीड़ ने कार को घेर लिया। मारपीट कर गाड़ी में तोड़ फोड़ हुई। जबरन देश विरोधी नारे लगाने के साथ-साथ कान पकड़कर माफी मांगने को कहा गया। फिलहाल इन आरोपों की कोई पुष्टी नहीं हुई। घटना में मंड के बेटे भवजोत सिंह और हरियाणा पुलिस और सीआईडी के कुछ जवान भी घायल हुए। पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और कुछ लोगों के खिलाफ कार्रवाई की। सिख समाज के लोगों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने मामले में एकतरफा कार्रवाई की। युवाओं के खिलाफ केस दर्ज कर गिरफ्तार किया गया था। मंड के खिलाफ जो शिकायत मिली उस पर कार्रवाई नहीं हुई। पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज और दूसरे सबूतों को आधार मानकर आरोपियों को पहचान रही है। लेकिन सिख समुदाय अभी भी अपनी मांगों पर अड़ा है।
आखिर क्यों हुआ प्रदर्शन
दरअसल, 6 दिन पूर्व पंजाब के खालिस्तानी विरोधी नेता गुरसिमरन सिंह मंड पर हमला हुआ। निहंग किसान, खालिस्तान विरोधी नेता गुरसिमरन सिंह मंड पर 6 दिन पहले हुए हमले के आरोपियों की रिहाई की मांग कर रहे थे। इसी के चलते हरियाणा के अंबाला में प्रदर्शन कर रहे सिख-किसानों ने गुरुवार की देर रात बवाल मचा दिया। प्रदर्शनकारियों ने दोपहर 1 बजे से दिल्ली-चंडीगढ़ नेशनल हाईवे जाम कर रखा था। देर रात हाईवे पर पुलिस पहुंची। जहां पुलिस ने हाईवे खुलवाने का प्रयास किया। जिसके बाद सिख समुदाय ने पुलिस टीम पर हमला कर दिया। इसमें अंबाला के DSP वीरेंद्र का अंगूठा कट गया, जबकि 6-7 पुलिसकर्मियों को गंभीर चोटें आईं। उन्हें ICU में भर्ती कराया गया। कुछ प्रदर्शनकारी भी घायल हुए। भीड़ को हटाने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज, फायरिंग और आंसू गैस के गोले दागे।
DGP ने की अपने पुलिसकर्मियों की सराहना
DGP अजय सिंघल ने अस्पताल पहुंचकर घायल पुलिसकर्मियों का हाल जाना डीजीपी ने मिलिट्री हॉस्पिटल व नागरिक अस्पताल पहुंचकर घायल पुलिसकर्मियों से मुलाकात की। डॉक्टरों से भी घायलों के हालात की चर्चा की। डीजीपी ने पुलिसकर्मियों के साहस व कर्तव्यनिष्ठा की सराहना करते हुए कहा कि हरियाणा पुलिस अपने जवानों के साथ मजबूती से खड़ी है। कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है। नागरिकों से अपील है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखें और कानून अपने हाथ में न लें।
Written By: MADHVI TANWAR