अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले पर विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने इसे अत्यंत गंभीर और दुर्भाग्यपूर्ण बताया, उन्होंने कहा कि इस घटना से देश-विदेश में रहने वाले करोड़ों हिंदुओं की धार्मिक भावनाएं प्रभावित हुई हैं, साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि मंदिर के संचालन या वित्तीय प्रबंधन की जिम्मेदारी विश्व हिंदू परिषद की नहीं है। एक मीडिया इंटरव्यू में आलोक कुमार ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद राम मंदिर निर्माण से संबंधित वीएचपी की भूमिका समाप्त हो गई थी। इसके बाद मंदिर के निर्माण, प्रबंधन और प्रशासन की जिम्मेदारी संबंधित ट्रस्ट के पास है, इसलिए दान या अन्य वित्तीय मामलों के लिए वीएचपी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

चंपत राय के संबंध में क्या कहा?

चंपत राय के खिलाफ कार्रवाई की मांग पर आलोक कुमार ने कहा कि जांच प्रक्रिया पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। उनके अनुसार, विशेष जांच दल (SIT) की जांच शुरू होने के बाद चंपत राय ने मंदिर ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने यह भी कहा कि अब तक लगाए गए आरोप सीधे तौर पर चंपत राय पर नहीं, बल्कि उनके चालक पर केंद्रित हैं। आलोक कुमार ने यह भी स्पष्ट किया कि चंपत राय विश्व हिंदू परिषद में अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं, लेकिन उन्हें मंदिर ट्रस्ट में महासचिव के रूप में वीएचपी ने नियुक्त नहीं किया था। इसलिए ट्रस्ट में उनकी भूमिका के लिए परिषद जिम्मेदार नहीं है। हालांकि उन्होंने माना कि यदि जांच में लापरवाही सामने आती है तो उस पहलू पर विचार किया जा सकता है।

जनता का विश्वास बहाल करने के लिए चार सुझाव

आलोक कुमार ने मामले में पारदर्शिता और लोगों का भरोसा कायम रखने के उद्देश्य से चार प्रमुख कदम उठाने की मांग की। उन्होंने सबसे पहले तत्काल एफआईआर दर्ज करने की बात कही। इसके अलावा जांच प्रक्रिया को तेज करने, मामले की सुनवाई फास्ट-ट्रैक कोर्ट में कराने तथा दोषी पाए जाने वालों को सख्त कानूनी सजा देने की आवश्यकता पर जोर दिया, उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर भी एक पोस्ट साझा किया, जिसमें राम मंदिर की तस्वीर के साथ इन चार मांगों को प्रमुखता से रखा गया था।

यूपी सरकार ने गठित की एसआईटी

उत्तर प्रदेश सरकार ने पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। यह टीम चढ़ावे के लेखा-जोखा, जमीन से जुड़े लेन-देन, कथित रूप से गायब हुए कीमती सामान और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में संभावित अनियमितताओं की जांच कर रही है। एसआईटी अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को सौंप चुकी है। वहीं, राम मंदिर ट्रस्ट ने किसी भी बड़े वित्तीय घोटाले या गंभीर अनियमितता के आरोपों को खारिज किया है।

 

 

Written By Toshi Shah