लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में युवाओं और न्यायिक व्यवस्था से जुड़े कई अहम फैसलों पर मुहर लगी। सरकार ने स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तिकरण योजना के तहत प्रदेश के युवाओं के लिए 25 लाख टैबलेट खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके अलावा इलाहाबाद हाईकोर्ट और प्रदेश के जनपदीय न्यायालयों में 81 कोर्ट मैनेजर्स की तैनाती को लेकर नई नियमावली को भी मंजूरी दी गई है।

25 लाख युवाओं को मिलेंगे मुफ्त टैबलेट
स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तीकरण योजना के तहत खरीदे जाने वाले 25 लाख टैबलेट पात्र युवाओं को निशुल्क उपलब्ध कराए जाएंगे। कैबिनेट ने टेंडर प्रक्रिया में चयनित संस्थाओं को टैबलेट की खरीद के लिए परचेज ऑर्डर जारी करने की अनुमति दी है। चालू वित्तीय वर्ष में टैबलेट खरीद के लिए 2,374.60 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है।

पढ़ाई से रोजगार तक डिजिटल मदद
योजना के तहत स्नातक, स्नातकोत्तर, डिप्लोमा, कौशल विकास और विभिन्न शिक्षण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों में अध्ययनरत पात्र युवाओं को टैबलेट दिए जाएंगे। इससे युवाओं को ऑनलाइन पढ़ाई, प्रशिक्षण, सरकारी एवं गैर-सरकारी योजनाओं, रोजगार और स्वरोजगार से जुड़ी सेवाओं तक आसानी से पहुंच बनाने में मदद मिलेगी। सरकार का उद्देश्य युवाओं को सिर्फ डिजिटल डिवाइस देना नहीं, बल्कि उन्हें तकनीकी रूप से सक्षम बनाकर शिक्षा और रोजगार के नए अवसरों से जोड़ना है।

ITI और कौशल प्रशिक्षण लेने वाले युवाओं को भी लाभ
वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना के मुताबिक, इस फैसले से उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, स्वास्थ्य शिक्षा, कौशल विकास प्रशिक्षण और आईटीआई से जुड़े पंजीकृत युवाओं को डिजिटल संसाधनों का लाभ मिलेगा। टैबलेट के जरिए प्रशिक्षण सामग्री तक आसान पहुंच से युवाओं की रोजगारपरक दक्षता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है। तकनीकी रूप से सक्षम युवा आगे चलकर रोजगार सृजन और सेवा क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

यूपी में 81 कोर्ट मैनेजर्स की होगी तैनाती

कैबिनेट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट और प्रदेश के जनपदीय न्यायालयों में कार्यरत कोर्ट मैनेजर्स की सेवा व्यवस्था को व्यवस्थित करने के लिए ‘द इलाहाबाद हाईकोर्ट (कोर्ट मैनेजर्स सेंट्रलाइज्ड सर्विस) रूल्स-2026’ के मसौदे को भी मंजूरी दी है। नई व्यवस्था के तहत इलाहाबाद हाईकोर्ट और प्रदेश के जनपदीय न्यायालयों में कुल 81 कोर्ट मैनेजर्स तैनात किए जाएंगे।

56,100 से 1.77 लाख रुपये तक होगा वेतनमान
नई नियमावली में कोर्ट मैनेजर्स के वेतन और सेवा संबंधी ढांचे को भी संशोधित किया गया है। उनका वेतनमान 56,100 रुपये से लेकर 1,77,500 रुपये तक निर्धारित किया गया है। नई व्यवस्था लागू होने से राज्य सरकार पर करीब 3.97 करोड़ रुपये का सालाना अतिरिक्त वित्तीय भार आने का अनुमान है।

अदालतों के कामकाज को मिलेगा बेहतर प्रबंधन
सरकार के मुताबिक, कोर्ट मैनेजर्स न्यायालयों में मानव संसाधन, आधारभूत सुविधाओं, केस-फ्लो मैनेजमेंट, प्रशासनिक समन्वय और अन्य प्रबंधकीय कार्यों की निगरानी में मदद करेंगे। सेवा नियमों में एकरूपता आने से कोर्ट मैनेजर्स की जिम्मेदारियां और सेवा शर्तें अधिक स्पष्ट होंगी। इससे न्यायालयों के प्रशासनिक कामकाज को गति देने और न्यायिक संस्थानों के प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। यह नियमावली सुप्रीम कोर्ट के 16 मई 2025 के निर्देशों के अनुपालन में तैयार की गई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देशों और निष्कर्षों के आधार पर तैयार मसौदे को राज्य सरकार के समक्ष रखा गया था, जिसे अब कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। 

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