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150 साल पहले रचा गया ‘वंदे मातरम’, 2026 में फिर क्यों बना चर्चा का केंद्र?

2026 में ‘वंदे मातरम’ को लेकर कई अहम बदलाव हुए हैं। राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े कानून में संशोधन के बाद इसे राष्ट्रगान के साथ कानूनी संरक्षण मिला है। वहीं, आकाशवाणी ने भी लंबे समय से प्रसारित किए जा रहे दो-छंद वाले संस्करण की जगह छह-छंद वाला विस्तृत संस्करण अपने सुबह के प्रसारण में शामिल किया है। इन बदलावों के साथ राष्ट्रीय गीत एक बार फिर देश की सार्वजनिक और सांस्कृतिक चर्चा के केंद्र में है।

150 साल पहले रचा गया ‘वंदे मातरम’, 2026 में फिर क्यों बना चर्चा का केंद्र?
Vande mataram

देश आज अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज हर भारतीय के दिल में ‘वंदे मातरम’ की गूंज सुनाई दे रही है। बता दें कि करीब डेढ़ सौ साल पहले रचा गया यह गीत भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान धीरे-धीरे अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष का प्रतीक बन गया था। बता दें कि आजादी की लड़ाई के दौरान निकलने वाले जुलूसों और आंदोलनों में ‘वंदे मातरम’ के नारे सुनाई देते थे। ब्रिटिश सरकार ने कई बार इसे दबाने की कोशिश की, लेकिन आंदोलनकारियों ने इसे और बुलंद आवाज में अपनाया। स्वतंत्रता के बाद इसे राष्ट्रगान का दर्जा नहीं दिया गया, बल्कि राष्ट्रीय गीत के रूप में मान्यता मिली। हालांकि, इसके कुछ अंशों को लेकर समय-समय पर विवाद भी सामने आते रहे। यही वजह रही कि सार्वजनिक और राजनीतिक आयोजनों में मुख्य रूप से इसके शुरुआती दो छंदों का ही इस्तेमाल होता रहा।

2026 में फिर केंद्र में आया वंदे मातरम

साल 2026 में ‘वंदे मातरम’ एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा का विषय बना है। केंद्र सरकार ने फरवरी में राष्ट्रीय गीत के प्रस्तुतीकरण को लेकर पहली बार विस्तृत आधिकारिक प्रोटोकॉल जारी किया। इसके तहत यदि किसी कार्यक्रम में राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान दोनों प्रस्तुत किए जाते हैं, तो पहले ‘वंदे मातरम’ और उसके बाद ‘जन गण मन’ होगा। आधिकारिक छह-छंद वाले संस्करण की अवधि लगभग 3 मिनट 10 सेकंड बताई गई है। आधिकारिक कार्यक्रमों में इसके गायन या वादन के दौरान उपस्थित लोगों को सावधान मुद्रा में खड़े रहने का निर्देश दिया गया है।

2026 में ‘वंदे मातरम’ को मिला कानूनी संरक्षण

इस साल राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े कानून में भी बदलाव किया गया है। संसद से पारित ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026’ को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान के साथ कानूनी संरक्षण प्राप्त हो गया है। अब जानबूझकर राष्ट्रीय गीत के गायन में रुकावट डालने या उसे रोकने पर तीन साल तक की सजा, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। 26 मार्च 2026 से आकाशवाणी ने भी अपने सुबह के प्रसारण में लंबे समय से इस्तेमाल किए जा रहे करीब 65 सेकंड के दो-छंद वाले संस्करण के स्थान पर छह-छंद वाला लगभग 3 मिनट 10 सेकंड का संस्करण प्रसारित करना शुरू किया।

15 अगस्त 2026 को लाल किले पर विशेष प्रस्तुति

इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस समारोह में एक और बदलाव देखने को मिल रहा है। 15 अगस्त 2026 को लाल किले की प्राचीर से होने वाले समारोह में ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ से पहले प्रस्तुत किया जाएगा। यह इस गीत की राष्ट्रीय भूमिका को लेकर हाल के बदलावों के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है।

कब लिखा गया था वंदे मातरम?

‘वंदे मातरम’ के रचयिता प्रसिद्ध बंगाली साहित्यकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय थे। उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार इसकी रचना 7 नवंबर 1875 को हुई थी और बाद में इसे साहित्यिक पत्रिका ‘बंगदर्शन’ में प्रकाशित किया गया। वर्ष 1882 में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने इसे अपने चर्चित उपन्यास ‘आनंदमठ’ में शामिल किया। इसलिए ‘वंदे मातरम’ को केवल 1882 में लिखा गया गीत कहना सही नहीं होगा। इसकी रचना और शुरुआती प्रकाशन इससे पहले हो चुके थे, जबकि ‘आनंदमठ’ में शामिल होने के बाद इसे व्यापक पहचान मिली।

मातृभूमि की वंदना से निकला ‘वंदे मातरम’

‘वंदे मातरम’ का सामान्य अर्थ है-‘हे मां, मैं तुम्हें नमन करता हूं।’ यहां ‘मां’ का संकेत मातृभूमि की ओर है। ‘आनंदमठ’ की कथा संन्यासियों के एक समूह के इर्द-गिर्द घूमती है, जिन्हें ‘संतान’ कहा गया है। ये पात्र मातृभूमि के लिए अपना जीवन समर्पित करने का संकल्प लेते हैं। इसी पृष्ठभूमि में ‘वंदे मातरम’ गीत सामने आता है। गीत में भारतभूमि को मां के रूप में चित्रित करते हुए उसकी हरियाली, नदियों, खेतों, फसलों और प्राकृतिक सौंदर्य का भावपूर्ण वर्णन किया गया है। करीब डेढ़ शताब्दी का सफर तय कर चुका ‘वंदे मातरम’ आज भी भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की ऐतिहासिक स्मृति और राष्ट्र की सांस्कृतिक चेतना से जुड़ा एक महत्वपूर्ण गीत बना हुआ है।

 

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   Written By Toshi Shah  

 

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