अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव अब एक गंभीर मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में ईरान के खिलाफ समुद्री दबाव बढ़ा दिया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बुधवार को जानकारी दी कि अमेरिकी नौसेना ने ईरानी बंदरगाहों और तटीय इलाकों से जुड़े समुद्री रास्तों पर निगरानी और रोक-थाम की कार्रवाई फिर से शुरू कर दी है। इस कदम के बाद क्षेत्र में सैन्य टकराव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

ईरान पर दबाव बढ़ाने की रणनीति

अमेरिकी सेंट्रल कमांड की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी जानकारी के अनुसार, अमेरिकी सेना ने शाम 4 बजे से ईरानी समुद्री गतिविधियों पर सख्ती शुरू की। बयान में बताया गया कि मध्य-पूर्व क्षेत्र में पहले से ही बड़ी संख्या में अमेरिकी नौसैनिक जहाज और सैन्य विमान तैनात हैं। अमेरिका का यह कदम ईरान पर रणनीतिक दबाव बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

सीजफायर से रुकी थी अमेरिकी कार्रवाई

इससे पहले भी अमेरिका ने अप्रैल में ईरान के खिलाफ इसी तरह की समुद्री कार्रवाई शुरू की थी। हालांकि, जून में हुए अस्थायी संघर्ष विराम के बाद इसे रोक दिया गया था। उस समय दोनों देशों के बीच ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत आगे बढ़ाने की योजना बनाई गई थी। उम्मीद थी कि 60 दिनों के भीतर किसी स्थायी समझौते की दिशा में प्रगति होगी, लेकिन हॉर्मुज क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण वार्ता प्रभावित हो गई।

ईरान के खिलाफ सख्त रुख जारी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को इस नाकेबंदी को दोबारा लागू करने की घोषणा की थी। शुरुआत में उन्होंने हॉर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर अतिरिक्त 20 प्रतिशत शुल्क लगाने का विचार भी सामने रखा था, लेकिन बाद में इस फैसले को वापस ले लिया गया।

तेल-गैस बाजार पर पड़ेगा असर

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। दुनिया के कुल तेल और प्राकृतिक गैस व्यापार का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। ऐसे में अगर यहां लंबे समय तक सैन्य तनाव बना रहता है, तो इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ सकता है। पहले भी इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने पर तेल और गैस की कीमतों में तेजी देखी गई है।

तनाव बढ़ा तो बिगड़ सकता है वैश्विक ऊर्जा बाजार का संतुलन

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की इस कार्रवाई के जवाब में ईरान अपनी रणनीति और आक्रामक कर सकता है। हॉर्मुज क्षेत्र में किसी भी सैन्य टकराव का असर सिर्फ दोनों देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और आर्थिक स्थिरता पर भी पड़ सकता है।

 

 

Written By Toshi Shah