Auraiya Industrial Corridor: बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे अब औरैया के औद्योगिक विकास की नई तस्वीर लिखने की तैयारी में है। एक्सप्रेसवे के किनारे इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के फेज-2 के लिए सात गांवों की करीब 756 एकड़ यानी 306 हेक्टेयर भूमि चिह्नित की गई है। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद यहां आधुनिक औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जाएगा। उद्योगों के लिए विकसित भूखंड उपलब्ध होने से बड़े निवेश का रास्ता खुलने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

फेज-2 में राजंदाजपुर, मिहौली, शाहबदा, मलकपुर, सैनपुर, निगड़ा और कबीरपुर गांवों की जमीन शामिल है। इनमें सबसे ज्यादा 194.373 हेक्टेयर भूमि शाहबदा में चिह्नित की गई है। प्रस्तावित क्षेत्र में ग्राम समाज और निजी भूमि भी शामिल है। यूपीडा की ओर से भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू करने से पहले संबंधित पक्षों से आपत्तियां आमंत्रित की गई हैं।

सड़क से लेकर बिजली-पानी तक होंगी आधुनिक सुविधाएं
भूमि अधिग्रहण पूरा होने के बाद यूपीडा की ओर से औद्योगिक क्षेत्र में आधुनिक बुनियादी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। यहां चौड़ी सड़कें, बिजली, जलापूर्ति, ड्रेनेज, सीवरेज और स्ट्रीट लाइट जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। इसके बाद उद्योग स्थापित करने के इच्छुक उद्यमियों को विकसित भूखंड आवंटित किए जाएंगे। इससे क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को व्यवस्थित तरीके से बढ़ावा मिलने की संभावना है। बड़े उद्योगों के साथ-साथ छोटे और मध्यम स्तर की इकाइयों के लिए भी यहां निवेश के अवसर पैदा हो सकते हैं।

एक्सप्रेसवे की कनेक्टिविटी बनेगी सबसे बड़ी ताकत
प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्र की सबसे बड़ी खासियत इसकी बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से सीधी कनेक्टिविटी होगी। एक्सप्रेसवे के जरिए कच्चे माल की आपूर्ति और तैयार उत्पादों को दूसरे शहरों तक पहुंचाना आसान होगा। बेहतर परिवहन सुविधा से लॉजिस्टिक लागत कम होने और निवेशकों के लिए क्षेत्र की उपयोगिता बढ़ने की उम्मीद है। फेज-2 के विकसित होने के बाद औरैया में बड़े उद्योगों के साथ एमएसएमई इकाइयों को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है। इससे औद्योगिक निवेश का दायरा बढ़ सकता है।

उद्योग आएंगे तो गांवों में भी बढ़ेगा कारोबार
औद्योगिक कॉरिडोर का असर सिर्फ फैक्ट्रियों तक सीमित रहने की उम्मीद नहीं है। उद्योगों के आसपास होटल, भोजनालय, किराये के मकान, वाहन सेवा, मरम्मत केंद्र, पैकेजिंग, वेयरहाउस और परिवहन जैसी गतिविधियां भी बढ़ सकती हैं। इससे आसपास के गांवों के स्थानीय बाजारों को नया ग्राहक वर्ग मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिल सकती है। सबसे बड़ी उम्मीद स्थानीय युवाओं को है, जिन्हें अपने ही क्षेत्र में रोजगार के नए विकल्प मिलने की आस है।

पहले आपत्तियां, फिर होगी अधिग्रहण की प्रक्रिया
इंडस्ट्रियल कॉरिडोर फेज-2 के लिए सात गांवों की करीब 306 हेक्टेयर भूमि चिह्नित की गई है। यूपीडा ने भूमि अधिग्रहण से पहले आपत्तियां आमंत्रित की हैं। नियमानुसार प्रक्रिया पूरी होने के बाद भूमि अधिग्रहण किया जाएगा। इसके बाद औद्योगिक क्षेत्र में जरूरी बुनियादी ढांचा विकसित कर उद्योगों के लिए भूखंड आवंटित किए जाएंगे। अविनाश चंद्र मौर्य, अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) ने बताया कि इंडस्ट्रियल कॉरिडोर फेज-2 के लिए सात गांवों की करीब 306 हेक्टेयर भूमि चिह्नित की गई है। यूपीडा की ओर से आपत्तियां आमंत्रित की गई हैं। नियमानुसार प्रक्रिया पूरी होने के बाद भूमि अधिग्रहण किया जाएगा और इसके बाद औद्योगिक अवसंरचना विकसित कर उद्योगों के लिए भूखंड आवंटित किए जाएंगे।

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