केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय में बड़ा प्रशासनिक बदलाव हुआ है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 25 जुलाई 2026 को उनका इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया। इसके बाद केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया।

26 जुलाई को प्रह्लाद जोशी ने संभाला पदभार

प्रह्लाद जोशी ने 26 जुलाई को आधिकारिक रूप से केंद्रीय शिक्षा मंत्री के रूप में अपना पदभार ग्रहण कर लिया। हालांकि, वे शिक्षा मंत्रालय के साथ-साथ अपने पहले से संभाल रहे मंत्रालयों की जिम्मेदारी भी जारी रखेंगे। वर्तमान में उनके पास उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय का प्रभार है।

प्रह्लाद जोशी ने जताई जिम्मेदारी निभाने की प्रतिबद्धता

शिक्षा मंत्रालय का कार्यभार संभालने के बाद प्रह्लाद जोशी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है, जिसे वे पूरी निष्ठा और विनम्रता के साथ निभाएंगे। उन्होंने कहा कि यह उनके लिए कर्तव्य का विषय है और वे अपनी पूरी क्षमता के साथ मंत्रालय के काम को आगे बढ़ाने का प्रयास करेंगे।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने पिछले 12 वर्षों में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के कार्यों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के कार्यान्वयन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।

छात्र आंदोलनों के बीच हुआ नेतृत्व परिवर्तन

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ऐसे समय में आया जब राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) से जुड़े विवादों को लेकर देशभर में छात्रों और विभिन्न संगठनों की ओर से विरोध प्रदर्शन किए जा रहे थे। प्रश्नपत्र लीक और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार पर सवाल उठाए गए थे।

धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे के बाद कहा था कि यह मामला उनके लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है और हाल की घटनाओं से वे व्यथित हैं। इसके बाद केंद्र सरकार ने शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी प्रह्लाद जोशी को सौंपने का फैसला किया।

प्रह्लाद जोशी का राजनीतिक सफर

प्रह्लाद जोशी का जन्म 27 नवंबर 1962 को कर्नाटक के विजयपुरा में हुआ था। साधारण परिवार से आने वाले जोशी ने छात्र जीवन से ही सामाजिक गतिविधियों में रुचि दिखाई। वे लंबे समय से जनहित के मुद्दों से जुड़े रहे हैं और राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाते आए हैं।

उन्होंने कर्नाटक की राजनीति से अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की और बाद में राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। अब शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी मिलने के बाद उनके सामने राष्ट्रीय शिक्षा नीति को आगे बढ़ाने, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों से जुड़े मुद्दों के समाधान जैसी कई बड़ी चुनौतियां होंगी।

शिक्षा मंत्रालय के सामने होंगी कई प्राथमिकताएं

नए शिक्षा मंत्री के रूप में प्रह्लाद जोशी के सामने उच्च शिक्षा सुधार, परीक्षा प्रणाली को मजबूत करना, डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देना और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन जैसी प्राथमिकताएं रहेंगी। उन्होंने भरोसा जताया है कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में वे शिक्षा क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए काम करेंगे और देश की शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने का प्रयास करेंगे।

Written By: Geeta Sharma