फ्रैंकफर्ट। जेय सिंध मुत्तहिदा महाज (JSMM) के चेयरमैन शफी मुहम्मद बुरफत ने भारत के स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने 15 अगस्त को औपनिवेशिक शासन के खिलाफ संघर्ष, बलिदान और दृढ़ संकल्प की याद दिलाने वाला ऐतिहासिक दिन बताया।
स्वतंत्रता आंदोलन में बलिदान देने वालों को श्रद्धांजलि
सिंधी राष्ट्र की ओर से जारी संदेश में शफी बुरफत ने भारत के लोगों को "हार्दिक बधाई, गहरा सम्मान और शुभकामनाएं" दीं। उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में बलिदान देने वाले लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
अपने संदेश की शुरुआत "वंदे मातरम्" से करते हुए बुरफत ने कहा कि यह भारत के स्वतंत्रता संग्राम में ऐतिहासिक महत्व रखने वाला नारा है, जो देशभक्ति, मातृभूमि के प्रति समर्पण, बलिदान और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि भारत की आजादी किसी एक व्यक्ति, राजनीतिक दल, धर्म या विचारधारा की उपलब्धि नहीं थी, बल्कि यह विभिन्न क्षेत्रों, समुदायों, धर्मों और राजनीतिक विचारों से जुड़े लोगों के व्यापक आंदोलन का परिणाम थी।
गांधी और स्वतंत्रता आंदोलन के नेताओं को किया याद
बुरफत ने महात्मा गांधी के अहिंसा और जन आंदोलन के योगदान, नेताजी सुभाष चंद्र बोस के क्रांतिकारी संघर्ष और आजाद हिंद फौज के नेतृत्व, जवाहरलाल नेहरू के आधुनिक और लोकतांत्रिक भारत के दृष्टिकोण तथा सरदार वल्लभभाई पटेल के राजनीतिक और संगठनात्मक नेतृत्व को याद किया।
उन्होंने क्रांतिकारी शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को भी श्रद्धांजलि दी और उनके बलिदान को औपनिवेशिक शासन के खिलाफ संघर्ष का अमर प्रतीक बताया।
डॉ. भीमराव अंबेडकर के योगदान की सराहना
JSMM प्रमुख ने डॉ. भीमराव अंबेडकर के संविधान निर्माण, लोकतंत्र, समानता, सामाजिक न्याय और मानव गरिमा के लिए योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, पारसी और अन्य समुदायों की भागीदारी इसकी सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक रही।
बुरफत ने लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता, कानून का शासन, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, धार्मिक स्वतंत्रता, समानता और अल्पसंख्यकों के अधिकारों को दक्षिण एशिया में शांति और स्थिरता के लिए जरूरी बताया।
सिंध और भारत के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंध
उन्होंने सिंध और भारत के बीच ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंधों का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार सिंधु घाटी सभ्यता, साहित्य, भाषा, संगीत, आध्यात्मिक परंपराएं, व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान दोनों क्षेत्रों की साझा विरासत को दर्शाते हैं।
भारत में रहने वाले सिंधी समुदाय की प्रशंसा
उन्होंने भारत में रहने वाले सिंधी समुदाय की भी प्रशंसा की, जिसने विभाजन के बाद कठिन परिस्थितियों में अपने जीवन को फिर से स्थापित किया। उन्होंने कहा कि भारतीय सिंधियों ने व्यापार, शिक्षा, साहित्य, संस्कृति, विज्ञान और सामाजिक विकास के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
दक्षिण एशिया के भविष्य को लेकर बुरफत ने युद्ध, धार्मिक कट्टरता, नफरत और वर्चस्व से मुक्त क्षेत्र की बात कही। उन्होंने लोकतंत्र, मानव स्वतंत्रता, राष्ट्रीय अधिकारों, आपसी सम्मान और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को बढ़ावा देने की अपील की।
उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक समुदायों की पहचान, भाषा, संस्कृति, सम्मान और लोकतांत्रिक आकांक्षाओं का सम्मान क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता के लिए जरूरी है।
सिंधी लोगों की "लोकतांत्रिक राष्ट्रीय आकांक्षाओं" को भारत समझेगा
अपने संदेश में बुरफत ने उम्मीद जताई कि भारत का वर्तमान और भविष्य का नेतृत्व सिंधी लोगों की "लोकतांत्रिक राष्ट्रीय आकांक्षाओं" को समझेगा और मान्यता देगा। उन्होंने सिंधुदेश की मांग का भी उल्लेख किया।
अंत में JSMM चेयरमैन ने भारत के लोगों, स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारों, भारत के सिंधी समुदाय और लोकतांत्रिक एवं धर्मनिरपेक्ष मूल्यों में विश्वास रखने वालों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने भारत की लोकतांत्रिक प्रगति, ज्ञान, समृद्धि, सामाजिक न्याय और मानव विकास की कामना की।
उन्होंने अपने संदेश का समापन "वंदे मातरम्" के साथ किया और इसे मातृभूमि के प्रति सम्मान, राष्ट्रीय गौरव और स्वतंत्रता की भावना का प्रतीक बताया।
Written By: Pradeep Singh