राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के शरद पवार गुट के राष्ट्रीय प्रवक्ता नसीम सिद्दीकी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लाल किले से दिए भाषण को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी, उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री के संबोधन में विकास, बेरोजगारी, अर्थव्यवस्था और युवाओं से जुड़े वास्तविक मुद्दों की तुलना में हिंदू-मुस्लिम जैसे विषयों पर अधिक जोर दिया गया।
रोजगार, चीन और युवाओं के मुद्दे पर पीएम मोदी को घेरा
सिद्दीकी ने कहा कि प्रधानमंत्री को देश की आर्थिक स्थिति, रोजगार, जीडीपी और सीमा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर बात करनी चाहिए थी, उन्होंने चीन द्वारा अरुणाचल प्रदेश में कथित अतिक्रमण का मुद्दा उठाते हुए कहा कि अगर इन विषयों पर चर्चा होती तो विपक्ष इसका स्वागत करता। उनके मुताबिक, राष्ट्रीय पर्व के मंच का इस्तेमाल धार्मिक और राजनीतिक मुद्दों के लिए करना उचित नहीं है, उन्होंने प्रधानमंत्री के युवाओं और जेन-जी को लेकर किए गए आह्वान पर भी सवाल उठाए। सिद्दीकी का दावा है कि सरकार एक तरफ युवाओं को एआई और ऑनलाइन शिक्षा की ट्रेनिंग देने की बात कर रही है, जबकि दूसरी तरफ रोजगार के अवसर लगातार कम हो रहे हैं, उन्होंने अग्निवीर योजना का हवाला देते हुए कहा कि सेना में पहले जहां लंबे समय तक नौकरी का अवसर मिलता था, वहीं अब युवाओं को सीमित अवधि की सेवा दी जा रही है।
निजीकरण और विपक्ष की गैरमौजूदगी पर भी साधा निशाना
सिद्दीकी ने सरकारी संस्थानों के निजीकरण को लेकर भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा, उन्होंने एयर इंडिया, एलआईसी, रेलवे और अन्य सरकारी संस्थानों के संबंध में सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि सार्वजनिक क्षेत्र की संपत्तियों को निजी हाथों में सौंपा जा रहा है। प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में विपक्षी नेताओं की गैरमौजूदगी पर प्रतिक्रिया देते हुए सिद्दीकी ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के वहां नहीं पहुंचने को अलग नजरिए से देखा जाना चाहिए। उनका आरोप था कि राष्ट्रीय मुद्दों और देश के भविष्य पर चर्चा करने के बजाय राजनीतिक दलों के बीच विभाजन और टकराव को ज्यादा महत्व दिया जा रहा है।
योगी सरकार के सम्मान फैसले पर सिद्दीकी ने उठाए सवाल
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नीतियों पर भी सिद्दीकी ने टिप्पणी की। पुलिसकर्मियों को सम्मानित किए जाने के फैसले पर उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन किसी भी कार्रवाई का मूल्यांकन निष्पक्ष तरीके से होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर किसी व्यक्ति को उसकी जाति या धर्म के आधार पर विशेष महत्व दिया जाता है, तो यह दुर्भाग्यपूर्ण होगा। सिद्दीकी ने कहा कि देश की सुरक्षा के लिए बलिदान देने वाले जवानों और पुलिसकर्मियों का सम्मान सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उनके अनुसार, बेहतर प्रदर्शन करने वाले पुलिसकर्मियों को नियमानुसार पदक या अन्य पुरस्कार दिए जाने चाहिए, लेकिन सम्मान देने में किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए।
पाकिस्तान, गोमूत्र और मराठी भाषा के मुद्दे पर सिद्दीकी ने सरकार को घेरा
इसके अलावा उन्होंने पाकिस्तान की ओर से मिलने वाली कथित धमकियों, गोमूत्र की खरीद से जुड़े पायलट प्रोजेक्ट और महाराष्ट्र में रिक्शा चालकों के लिए मराठी भाषा की अनिवार्यता जैसे मुद्दों पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। बता दें कि सिद्दीकी ने केंद्र और भाजपा शासित राज्यों की नीतियों पर सवाल उठाते हुए सरकार से रोजगार, अर्थव्यवस्था, युवाओं और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर अधिक ध्यान देने की मांग की।
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Written By Toshi Shah