सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने आज यानी शुक्रवार को POCSO मामले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती (Swami Avimukteshwaranand Saraswati) को मिली अग्रिम जमानत को बरकरार रखा। यह मामला शिकायतकर्ता आशुतोष महाराज (Ashutosh Maharaj) की ओर से दायर याचिका से जुड़ा था, जिसमें कहा गया था कि हाईकोर्ट ने गंभीर आरोपों के बावजूद आरोपी की गिरफ्तारी पर रोक लगाकर गलत निर्णय दिया था। शिकायतकर्ता ने यह भी तर्क दिया कि ऐसे मामलों में अग्रिम जमानत बेहद असाधारण परिस्थितियों में ही दी जानी चाहिए।
जस्टिस एम एम सुंदरेश ने शिकायतकर्ता से किए सवाल
सुनवाई के दौरान जस्टिस एम एम सुंदरेश (M M Sundresh) और जस्टिस एन कोतिश्वर सिंह (N Kotiswar Singh) की पीठ ने शिकायतकर्ता से सवाल किया कि कथित घटना की जानकारी होने के बावजूद शिकायत दर्ज करने में देरी क्यों हुई। अदालत ने टिप्पणी की कि यदि उन्हें पहले से जानकारी थी, तो समय पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका की खारिज
शिकायतकर्ता ने जवाब में कहा कि वह उस समय मानसिक रूप से बहुत आहत थे, इसलिए तत्काल शिकायत नहीं कर पाए। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और याचिका खारिज कर दी।
आरोप गंभीर हैं इन पर सख्ती होने चाहिए- शिकायतकर्ता
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया था कि हाईकोर्ट द्वारा मीडिया से संपर्क पर लगाए गए प्रतिबंध का कथित रूप से पालन नहीं किया गया। साथ ही यह दावा भी किया गया कि आरोप गंभीर हैं और इन पर सख्त कानूनी दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए।
क्या है पूरा मामला
मामले की शुरुआत प्रयागराज स्थित एक धार्मिक शिविर में दो नाबालिगों के कथित शोषण के आरोपों से हुई थी। शिकायत के आधार पर विशेष पॉक्सो अदालत ने एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया, जिसके बाद आरोपी पक्ष ने हाईकोर्ट का रुख किया और वहां से अग्रिम जमानत हासिल कर ली।
Written By Toshi Shah