भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ियों की फिटनेस को लेकर बीसीसीआई (BCCI) ने अपने मानक और कड़े कर दिए हैं। अब टीम इंडिया में जगह बनाए रखने के लिए खिलाड़ियों को पहले की तुलना में कठिन फिटनेस टेस्ट से गुजरना होगा। इंग्लैंड और आयरलैंड दौरे के दौरान खिलाड़ियों की फिटनेस पर सवाल उठे थे। खराब फील्डिंग के कारण कई अहम कैच भी हाथ से निकल गए थे। जिसके बाद नए नियमों के तहत खिलाड़ियों को फिटनेस साबित करने के लिए दो अलग-अलग टेस्ट पास करने होंगे। इसमें ब्रॉन्को टेस्ट के साथ 2 किलोमीटर की दौड़ भी शामिल कर दी गई है। दोनों टेस्ट एक ही फिटनेस असेसमेंट का हिस्सा होंगे।
10 मिनट में पूरी करनी होगी 2 किलोमीटर दौड़
बीसीसीआई ने अब 2 किलोमीटर की दौड़ को भी अनिवार्य कर दिया है। खिलाड़ियों को यह दूरी तय समय के भीतर पूरी करनी होगी। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की ओर से इसके लिए करीब 9 से 10 मिनट की समय सीमा निर्धारित की गई है। यानी खिलाड़ियों को अधिकतम 10 मिनट में 2 किलोमीटर की दौड़ पूरी करनी होगी। फिटनेस टेस्ट का यह हिस्सा खिलाड़ियों की एरोबिक क्षमता और सहनशक्ति को परखने के लिए अहम माना जा रहा है।
ब्रॉन्को टेस्ट का समय भी घटा
टीम इंडिया में ब्रॉन्को फिटनेस टेस्ट की शुरुआत एड्रियन ली रॉक्स ने की थी। इस टेस्ट में 0 से 60 मीटर के बीच निर्धारित मार्किंग के आधार पर शटल रन कराया जाता है। खिलाड़ियों को कुल पांच सेट पूरे करने होते हैं और इस दौरान करीब 1200 मीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। इस टेस्ट को बिना ब्रेक पूरा करना होता है। पहले खिलाड़ियों को इसे पूरा करने के लिए करीब 6 मिनट का समय दिया जाता था, लेकिन अब समय सीमा घटाकर 5 मिनट 15 सेकेंड से 5 मिनट 20 सेकेंड के बीच कर दी गई है। फिटनेस टेस्ट की चुनौती इसलिए और बढ़ गई है क्योंकि ब्रॉन्को टेस्ट खत्म करने के तुरंत बाद खिलाड़ियों को 2 किलोमीटर की दौड़ भी पूरी करनी होगी।
फिटनेस को लेकर BCCI ने क्यों बढ़ाई सख्ती?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बोर्ड के भीतर खिलाड़ियों की फिटनेस को लेकर पहले से चिंता थी। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि कुछ खिलाड़ियों को फिटनेस टेस्ट के दौरान अपेक्षाकृत आसान मानक दिए गए थे।
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के स्टाफ पर नीतीश कुमार रेड्डी और हर्षित राणा को पूरी तरह फिट नहीं होने के बावजूद फिटनेस क्लियरेंस देने के आरोप भी सामने आए थे। हर्षित राणा के वजन को लेकर भी अब सख्त मानक तय किए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक उनका वजन एक समय 97 किलोग्राम तक पहुंच गया था। अब उन्हें अपना वजन 96 किलोग्राम से नीचे बनाए रखना होगा। बीसीसीआई का यह कदम खिलाड़ियों की फिटनेस, फील्डिंग क्षमता और चोटों से बचाव को बेहतर करने की दिशा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। नए नियमों के बाद टीम इंडिया के खिलाड़ियों के लिए फिटनेस टेस्ट पास करना पहले से कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो गया है।
Written By Toshi Shah