नई दिल्ली: NEET-UG पेपर लीक के विरोध में देशभर में हुए छात्र आंदोलनों के दौरान पुलिस की कथित कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह मामला स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच का बनता है। साथ ही संकेत दिए कि पूरे घटनाक्रम की जांच के लिए एक स्वतंत्र समिति गठित की जा सकती है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि जिसने भी कानून हाथ में लिया है या अपनी अधिकार सीमा से बाहर जाकर कार्रवाई की है, उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून सभी पर समान रूप से लागू होता है।
पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच जरूरी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि छात्रों पर पुलिस की कथित ज्यादती के आरोपों को हल्के में नहीं लिया जा सकता। इन सभी आरोपों की स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच आवश्यक है, ताकि तथ्यों के आधार पर सच्चाई सामने आ सके। अदालत ने कहा कि यदि जांच कराई जाती है तो वह वैज्ञानिक तरीके और उपलब्ध सबूतों के आधार पर होगी। जांच समिति में कौन-कौन शामिल होगा, इसका फैसला बाद में किया जाएगा।
पुलिस ज्यादती पर दिशा-निर्देशों को संकलित करने की जरूरत
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि अब समय आ गया है कि पुलिस ज्यादती से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट द्वारा समय-समय पर तय किए गए न्यायिक सिद्धांतों को एक जगह संकलित किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसे मामलों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश उपलब्ध हो सकें।
सुप्रीम कोर्ट की प्रमुख टिप्पणियां
प्रथम दृष्टया स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच का मामला बनता है।
जिसने भी कानून हाथ में लिया है, उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
पुलिस प्रोटोकॉल का उल्लंघन हुआ है तो कानून अपना काम करेगा।
छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
जांच वैज्ञानिक तरीके और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगी।
जांच समिति की संरचना पर अदालत बाद में फैसला करेगी।
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Written By Shailesh Yadav